शाहजहांपुर: उपकरण और टायर के अभाव में रोडवेज बसों के पहिये थमे, बीएस-6 के जरूरी उपकरण भी नहीं मिल रहे
दिवाली से पहले शाहजहांपुर रोडवेज डिपो में कल-पुर्जों और टायरों का गंभीर संकट है। टायर के अभाव में सात बसें और बैटरी नहीं मिलने से चार बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। बीएस-6 बसों के जरूरी उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। मुख्यालय को एक सप्ताह पहले मांग भेजी गई थी, पर सामान नहीं मिला।
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दिवाली पर यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगी है, लेकिन रोडवेज की तैयारियों पर टायर, बैटरी और स्पेयर पार्ट्स का संकट भारी पड़ रहा है। शाहजहांपुर डिपो की सात बसें टायर के अभाव में खड़ी हैं, जबकि चार बसें बैटरी नहीं मिलने के कारण ऑनरोड नहीं हो पा रही हैं। इसके अलावा बीएस-6 बसों के क्रेश किंग फिल्टर, कमानी के पट्टे, पुश रॉड, इंजेक्टर और एटीएस फिल्टर जैसे जरूरी उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। करीब एक सप्ताह पहले मुख्यालय को मांग भेजे जाने के बावजूद सामान नहीं मिलने से दिवाली पर बसों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शाहजहांपुर डिपो के बेड़े में 148 निगम और 76 अनुबंधित बसें हैं। निगम की बसों का संचालन शटल और लंबे रूटों पर किया जाता है। दशहरा के बाद दीपावली को देखते हुए बसों की छोटी-बड़ी कमियां दूर करने का काम शुरू किया गया, लेकिन कल-पुर्जों की कमी मरम्मत कार्य में बाधा बन रही है। पुवायां रोड स्थित वर्कशॉप में चार बसें बैटरी और सात बसें टायर के अभाव में खड़ी हैं। आयशर बसों के लिए नए और दुरुस्त टायरों की भी जरूरत है।
मांग भेजने के बाद भी नहीं मिला सामान
परिवहन निगम के फोरमैन ने टायर, बैटरी समेत अन्य छोटे-बड़े कल-पुर्जों की सूची तैयार कर एआरएम के माध्यम से मुख्यालय भेजी है। करीब एक सप्ताह बीतने के बाद भी सामान उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके चलते खराब बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं और उनके चालक-परिचालक भी बसों के सही होने का इंतजार कर रहे हैं।
खड़ी बसों के उपकरण निकालकर चला रहे काम
सड़क पर संचालित बसों में उपकरण संबंधी दिक्कत आने पर फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है। किसी बस में उपकरण खराब होने पर वर्कशॉप में खड़ी बस से उसका उपकरण निकालकर दूसरी बस में लगाया जा रहा है। इससे बसों का संचालन जारी रखा जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था कितने समय तक चल पाएगी, इस पर सवाल है।
दीपावली पर दिल्ली मार्ग पर बढ़ेगी सबसे ज्यादा भीड़
दीपावली के दौरान दिल्ली मार्ग पर सबसे ज्यादा यात्रियों की भीड़ रहती है। लंबे रूट की बसों से निगम को अच्छा राजस्व भी मिलता है। त्योहार पर यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण पहले ही बसों के संसाधन कम पड़ते हैं। ऐसे में यदि खराब बसें समय पर दुरुस्त नहीं हुईं तो यात्रियों को बसों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एआरएम की ओर से बसों को जल्द दुरुस्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन मुख्यालय से कल-पुर्जे नहीं मिलने से समस्या बनी हुई है।
एआरएम अरुण कुमार ने बताया कि लोको फोरमैन के जरिये मिली सूची को मुख्यालय भेज दिया गया है। यहां से लगातार डिमांड भेजी जा रही है। सामान मिलने पर खराब खड़ी बसों की मरम्मत कराकर उनका संचालन कराया जाएगा।