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आरटीई : गरीब बच्चों के प्रवेश में पेच फंसा लौटा रहे स्कूल संचालक

संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Thu, 09 Apr 2026 12:48 AM IST
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RTE: School operators are returning poor children due to problems in their admission
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शाहजहांपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत चयनित बच्चों को निजी स्कूल के संचालक प्रवेश देने के बजाय टरका रहे हैं। बच्चों के अभिभावकों से अभिलेख मांगने के साथ ही उनके घरों की स्थिति देखने के लिए शिक्षकों को भेजा जा रहा। प्रवेश शुल्क, आईडी कार्ड फीस समेत कई तरह शुल्क मांगने की बात सामने आने पर बीएसए ने स्कूलों को नोटिस जारी किया है।
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आरटीई के तहत तीन चरणों में आवेदन कराने के बाद बच्चों का चयन लाॅटरी के माध्यम से किया गया। लाॅटरी में चयन के बाद बच्चों को प्रवेश के लिए ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। अब बच्चे प्रवेश लेने के लिए निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में वहां उनके प्रवेश में कई तरह के पेंच फंसाए जा रहे हैं।
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बीएसए कार्यालय में समीक्षा के दौरान सामने आया कि स्कूलों में अनावश्यक अभिलेख मांगने के साथ ही बच्चों की पात्रता को जांचने के लिए संबंधित अभिभावक के घर का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। निशुल्क शिक्षा के लिए आवंटन के बाद भी विद्यालय में प्रवेश के लिए प्रवेश शुल्क, भवन शुल्क, इलेक्ट्रिसिटी शुल्क, आईडी कार्ड फीस, सिक्योरिटी शुल्क, वार्षिक शुल्क आदि जैसे आधारहीन खर्चों का उल्लेख कर अभिभावकों से धनराशि की मांग की जा रही है। आवंटन सूची में नाम होने के बाद भी लौटा रहे हैं।
इसके अलावा विद्यालय को विभाग से पत्र नहीं आने, बच्चे का वार्ड और विद्यालय का वार्ड समान नहीं होने की बात कहकर प्रवेश नहीं दे रहे हैं। इसे लेकर बीएसए दिव्या गुप्ता ने सख्ती बरती है। बीएसए ने बताया कि प्री प्राइमरी व कक्षा एक में बच्चों को सीट आवंटित होने के बाद भी प्रवेश से वंचित करने की जानकारी मिली है। यह एक्ट का उल्लंघन है। चयनित बच्चों को प्रवेश से गलत तरीके से वंचित किया जा रहा है। ऐसे में सभी दोषी विद्यालयों के खिलाफ नोटिस जारी करने व आरटीई एक्ट के प्रावधानों का पालन कराने का आदेश उच्च स्तर से प्राप्त हुआ है। बीएसए ने स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि आवंटित किए बच्चों का तत्काल प्रवेश लेकर सूचना कार्यालय में उपलब्ध कराएं।



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ये है स्थिति



प्रथम चरण में 1098 आवेदन आए थे। 470 नाम लाॅटरी में निकाले गए। 51 आवेदन निरस्त किए गए। दूसरे चरण में 442 आवेदन आए, जिनमें से 199 का चयन किया गया। बाद में 47 आवेदन निरस्त किए गए। तीसरे चरण में कुल 546 आवेदन आए थे, जिनमें से 288 का चयन किया गया। 91 निरस्त किए गए।
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