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Shahjahanpur News: शिक्षामित्रों और अनुदेशकाें को आर्थिक संकट से मिलेगी निजात
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मोहम्मद शुएब
- फोटो : सांकेतिक
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शाहजहांपुर। लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद बेसिक शिक्षा परिषद में कार्यरत अनुदेशकों व शिक्षामित्रों को आर्थिक संकट से निजात मिलेगी। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मानदेय बढ़ोतरी पर मुहर लग गई। इसे लेकर शिक्षामित्रों व अनुदेशकों में खुशी का माहौल है। उन्होंने फैसले का स्वागत करने के साथ ही नियमित किए जाने की मांग की है।
जिले के प्राथमिक स्कूलों में तीन हजार से ज्यादा शिक्षामित्र व उच्च प्राथमिक स्कूलों में 666 अनुदेशकों की नियुक्ति है। शिक्षकों के समान पढ़ाने वाले शिक्षामित्रों की नियुक्ति वर्ष 2001 में हुई थी। पांच अगस्त 2014 को शिक्षामित्रों को समायोजित करते हुए सहायक अध्यापक बना दिया गया। उनके समायोजन से वेतन में भी कई गुना बढ़ोतरी हुई थी।
25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन को निरस्त कर दिया। तब से शिक्षामित्रों को मात्र दस हजार रुपये मानदेय मिल रहा था। नियमित करने की मांग को लेकर शिक्षामित्र लंबे समय से मांग कर रहे थे। इस बीच कैबिनेट ने उनकी मांग पर सुनवाई करते हुए मानदेय में बढ़ोतरी कर दी है। वहीं अनुदेशक भी अल्प मानदेय से परेशान थे। उनकी भी सरकार ने सुन ली है।
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सरकार का फैसला स्वागत योग्य है। उम्मीद है कि सरकार सभी समस्याओं का समाधान करेगी। कैशलेस चिकित्सा के मामले में बेसिक शिक्षामंत्री से मुलाकात भी की है।
-यदवीर यादव, प्रांतीय महामंत्री, आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन
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लंबे समय से दस हजार रुपये मानदेय पर शिक्षामित्र कार्य कर रहे थे। अब मानदेय में बढ़ोतरी सराहनीय है। मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत करते हैं। आशा है कि नियमित भी जल्द ही किया जाएगा।
-राखी पांडेय, शिक्षामित्र
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मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री ने अनुदेशकों की फरियाद को सुन लिया है। लंबे समय से अनुदेशक अल्प मानदेय पर कार्य कर रहे थे। शासन का फैसले ने अनुदेशकों के परिवारों में खुशियां ला दी हैं।
-रवि वर्मा, जिलाध्यक्ष, प्रांतीय जूनियर हाई स्कूल अनुदेशक संघ
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कैबिनेट की बैठक में मानदेय बढ़ोतरी पर मुहर लग गई है। यह काफी खुशी की बात है। अनुदेशकों का एरियर भी समय से दिया जाए। शासन के फैसले से नियमित होने की आस भी बढ़ गई है।
-मोहम्मद शुएब, अनुदेशक
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जिले के प्राथमिक स्कूलों में तीन हजार से ज्यादा शिक्षामित्र व उच्च प्राथमिक स्कूलों में 666 अनुदेशकों की नियुक्ति है। शिक्षकों के समान पढ़ाने वाले शिक्षामित्रों की नियुक्ति वर्ष 2001 में हुई थी। पांच अगस्त 2014 को शिक्षामित्रों को समायोजित करते हुए सहायक अध्यापक बना दिया गया। उनके समायोजन से वेतन में भी कई गुना बढ़ोतरी हुई थी।
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25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन को निरस्त कर दिया। तब से शिक्षामित्रों को मात्र दस हजार रुपये मानदेय मिल रहा था। नियमित करने की मांग को लेकर शिक्षामित्र लंबे समय से मांग कर रहे थे। इस बीच कैबिनेट ने उनकी मांग पर सुनवाई करते हुए मानदेय में बढ़ोतरी कर दी है। वहीं अनुदेशक भी अल्प मानदेय से परेशान थे। उनकी भी सरकार ने सुन ली है।
सरकार का फैसला स्वागत योग्य है। उम्मीद है कि सरकार सभी समस्याओं का समाधान करेगी। कैशलेस चिकित्सा के मामले में बेसिक शिक्षामंत्री से मुलाकात भी की है।
-यदवीर यादव, प्रांतीय महामंत्री, आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन
लंबे समय से दस हजार रुपये मानदेय पर शिक्षामित्र कार्य कर रहे थे। अब मानदेय में बढ़ोतरी सराहनीय है। मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत करते हैं। आशा है कि नियमित भी जल्द ही किया जाएगा।
-राखी पांडेय, शिक्षामित्र
मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री ने अनुदेशकों की फरियाद को सुन लिया है। लंबे समय से अनुदेशक अल्प मानदेय पर कार्य कर रहे थे। शासन का फैसले ने अनुदेशकों के परिवारों में खुशियां ला दी हैं।
-रवि वर्मा, जिलाध्यक्ष, प्रांतीय जूनियर हाई स्कूल अनुदेशक संघ
कैबिनेट की बैठक में मानदेय बढ़ोतरी पर मुहर लग गई है। यह काफी खुशी की बात है। अनुदेशकों का एरियर भी समय से दिया जाए। शासन के फैसले से नियमित होने की आस भी बढ़ गई है।
-मोहम्मद शुएब, अनुदेशक

मोहम्मद शुएब- फोटो : सांकेतिक

मोहम्मद शुएब- फोटो : सांकेतिक

मोहम्मद शुएब- फोटो : सांकेतिक
