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Shahjahanpur News: प्राथमिक शिक्षा की नींव जर्जर...बच्चों के सिर से छिनी छत
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देवकली में स्कूल का भवन ध्वस्त होने के बाद पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते छात्र-छात्राएं। संवाद
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शाहजहांपुर। परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जिले में प्राथमिक शिक्षा की हकीकत इससे अलग है। जर्जर भवनों के कारण 20 प्रतिशत विद्यालयों में नौनिहाल खुले आसमान के नीचे, पेड़ों की छांव या पंचायत भवनों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। कई विद्यालयों में एक ही हॉल या दो कमरों में पहली से पांचवीं तक की सभी कक्षाएं संचालित हो रही हैं। बारिश होने पर पढ़ाई बाधित हो जाती है और कई जगह छुट्टी तक करनी पड़ती है।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 2,716 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनके रखरखाव के लिए छात्र संख्या के आधार पर हर वर्ष कंपोजिट ग्रांट भी जारी होती है, लेकिन इसके बावजूद 591 विद्यालय जर्जर श्रेणी में हैं। इनमें से 476 विद्यालयों के भवन या तो ध्वस्त किए जा चुके हैं या उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। ऐसे विद्यालय पंचायत भवनों या अन्य अस्थायी स्थानों पर संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन वर्षों बाद भी नए भवन नहीं बन सके हैं।
नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बाडूजई द्वितीय में जर्जर छत के नीचे पढ़ाई होती है। बारिश में हॉल की छत टपकने लगती है, जबकि दूसरे कमरे की लकड़ी की धन्नी टूट चुकी है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। भावलखेड़ा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पैना का भवन चार वर्ष पहले जर्जर घोषित होने के बाद गिरा दिया गया था। तब से विद्यालय पंचायत भवन में संचालित हो रहा है।
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यहां एक हॉल और दो कमरों में पहली से पांचवीं तक के 50 बच्चों की पढ़ाई होती है। जगह कम होने से गर्मी में बरगद के पेड़ के नीचे कक्षाएं लगती हैं और मिड-डे मील भी सीमित स्थान में बनता है। प्राथमिक विद्यालय आदमपुर की तस्वीर और भी चिंताजनक है। भवन ध्वस्त होने के बाद 38 बच्चे खुले में पढ़ रहे हैं।
मिड-डे मील दिव्यांग शौचालय के गेट के पास तैयार होता है। शौचालय में बर्तन व अन्य सामान रखा जाता है। बारिश के दौरान बच्चों के पास बैठने की सुरक्षित जगह तक नहीं रहती, जबकि टूटी चहारदीवारी से छुट्टा पशुओं का भी खतरा बना रहता है।
बिल्हरिया, शाहबाजपुर, भुड़िया, उदियापुर, कुआंडाडा और बरतारा समेत कई विद्यालयों में भी भवन गिराए जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था से शिक्षण कार्य चलाया जा रहा है, लेकिन नए भवनों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
कुर्रियाकलां गांव के मझारी गांव में वर्ष 2003 में बना विद्यालय जर्जर होने के बाद बच्चे अतिरिक्त कक्ष में पढ़ रहे हैं। भवन के मलबे की नीलामी दो बार टल चुकी है। वहीं, देवकली के प्राथमिक विद्यालय रामदेवरी में सितंबर 2024 में भवन गिराने के बाद से 51 बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ रहे हैं। बारिश होने पर विद्यालय में अवकाश करना पड़ता है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र के 44 बच्चों के लिए भी भवन उपलब्ध नहीं है।
कांट क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अजीजपुर जिगनेरा में तीन कमरे जर्जर होने से बंद हैं। 120 से अधिक बच्चों के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं हैं, इसलिए अधिकतर कक्षाएं पेड़ के नीचे लगती हैं। बरसात में जलभराव होने से पढ़ाई प्रभावित होती है।
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जिले में 591 विद्यालय भवन जर्जर हैं, जिनमें 476 विद्यालय पंचायत भवन या अन्य अस्थायी स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। दोबारा सर्वे कराकर नए भवनों का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
-जयशंकर श्रीवास्तव, बीएसए
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जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 2,716 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनके रखरखाव के लिए छात्र संख्या के आधार पर हर वर्ष कंपोजिट ग्रांट भी जारी होती है, लेकिन इसके बावजूद 591 विद्यालय जर्जर श्रेणी में हैं। इनमें से 476 विद्यालयों के भवन या तो ध्वस्त किए जा चुके हैं या उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। ऐसे विद्यालय पंचायत भवनों या अन्य अस्थायी स्थानों पर संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन वर्षों बाद भी नए भवन नहीं बन सके हैं।
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नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बाडूजई द्वितीय में जर्जर छत के नीचे पढ़ाई होती है। बारिश में हॉल की छत टपकने लगती है, जबकि दूसरे कमरे की लकड़ी की धन्नी टूट चुकी है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। भावलखेड़ा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पैना का भवन चार वर्ष पहले जर्जर घोषित होने के बाद गिरा दिया गया था। तब से विद्यालय पंचायत भवन में संचालित हो रहा है।
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यहां एक हॉल और दो कमरों में पहली से पांचवीं तक के 50 बच्चों की पढ़ाई होती है। जगह कम होने से गर्मी में बरगद के पेड़ के नीचे कक्षाएं लगती हैं और मिड-डे मील भी सीमित स्थान में बनता है। प्राथमिक विद्यालय आदमपुर की तस्वीर और भी चिंताजनक है। भवन ध्वस्त होने के बाद 38 बच्चे खुले में पढ़ रहे हैं।
मिड-डे मील दिव्यांग शौचालय के गेट के पास तैयार होता है। शौचालय में बर्तन व अन्य सामान रखा जाता है। बारिश के दौरान बच्चों के पास बैठने की सुरक्षित जगह तक नहीं रहती, जबकि टूटी चहारदीवारी से छुट्टा पशुओं का भी खतरा बना रहता है।
बिल्हरिया, शाहबाजपुर, भुड़िया, उदियापुर, कुआंडाडा और बरतारा समेत कई विद्यालयों में भी भवन गिराए जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था से शिक्षण कार्य चलाया जा रहा है, लेकिन नए भवनों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
कुर्रियाकलां गांव के मझारी गांव में वर्ष 2003 में बना विद्यालय जर्जर होने के बाद बच्चे अतिरिक्त कक्ष में पढ़ रहे हैं। भवन के मलबे की नीलामी दो बार टल चुकी है। वहीं, देवकली के प्राथमिक विद्यालय रामदेवरी में सितंबर 2024 में भवन गिराने के बाद से 51 बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ रहे हैं। बारिश होने पर विद्यालय में अवकाश करना पड़ता है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र के 44 बच्चों के लिए भी भवन उपलब्ध नहीं है।
कांट क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अजीजपुर जिगनेरा में तीन कमरे जर्जर होने से बंद हैं। 120 से अधिक बच्चों के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं हैं, इसलिए अधिकतर कक्षाएं पेड़ के नीचे लगती हैं। बरसात में जलभराव होने से पढ़ाई प्रभावित होती है।
जिले में 591 विद्यालय भवन जर्जर हैं, जिनमें 476 विद्यालय पंचायत भवन या अन्य अस्थायी स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। दोबारा सर्वे कराकर नए भवनों का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
-जयशंकर श्रीवास्तव, बीएसए

देवकली में स्कूल का भवन ध्वस्त होने के बाद पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते छात्र-छात्राएं। संवाद

देवकली में स्कूल का भवन ध्वस्त होने के बाद पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते छात्र-छात्राएं। संवाद

देवकली में स्कूल का भवन ध्वस्त होने के बाद पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते छात्र-छात्राएं। संवाद

देवकली में स्कूल का भवन ध्वस्त होने के बाद पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते छात्र-छात्राएं। संवाद