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Shahjahanpur News: आज हर-हर महादेव से गूंजेंगे शिवालय
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बाबा विश्वनाथ मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : 1
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शाहजहांपुर। भगवान भोलेनाथ को समर्पित सावन का पहला सोमवार आज है। जिले में कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर हैं जिनमें श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। यहां आज सुबह से लेकर शाम तक हर-हर महादेव करते श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा। यहां रविवार को ही भोलेनाथ के भक्तों का जमावड़ा लगा रहा। देर रात तक कांवड़ियों के दल यहां पहुंचते रहे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए शिवालयों पर रविवार से ही पुलिस तैनात कर दी गई।
चिनौर स्थित त्रिलोकीनाथ मंदिर में रविवार को पुलिस बल की मौजूदगी में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया। इसके साथ ही चौकसी नाथ मंदिर, मदनापुर के फिरोजपुर धाम में शिवधाम, बंडा-पूरनपुर मार्ग पर एकोत्तरनाथ मंदिर के साथ ही तिलहर, जलालाबाद, शाहजहांपुर के शिवालयों पर श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे।
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बाबा विश्वनाथ मंदिर
नगर के मध्य टाउनहॉल में स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि यह मंदिर जहां पर स्थापित है, वहां पहले कभी अमरूदों की बगिया थी। नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष फजलुर रहमान खान यहां एक मस्जिद बनवाना चाहते थे। 50-60 के दशक में एक रात सरदार दर्शन सिंह एडवोकेट के घर से पत्थर लाकर पेड़ के नीचे रख दिया गया। रात में ही पूजा अर्चना शुरू हो गई। बाद में माहौल गर्म होता देख पूजा-अर्चना पर रोक लगा दी गई। सन 1957 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद के हस्तक्षेप के बाद मंदिर पर लगी रोक प्रशासन ने हटा दी।
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बाबा बनखंडीनाथ मंदिर
सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के पास स्थित बाबा बनखंडी नाथ मंदिर जनमानस की श्रद्धा का बड़ा केंद्र है। इस स्थान पर कभी जंगल हुआ करता था। साधु-संन्यासी यहां विश्राम के लिए रुकते थे। एक बार एक संन्यासी को शिव मंदिर के निर्माण का सपना आया। इसके बाद हुई खोदाई में कुदाल शिवलिंग से टकराई। इससे शिवलिंग खंडित हो गया। इससे भगवान का नाम बनखंडी नाथ प्रसिद्ध हुआ। मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।
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श्री पटना देवीकली मंदिर
कलान तहसील में स्थित श्री पटना देवीकली मंदिर दैत्य गुरु शुक्राचार्य की तपोस्थली रहा है। उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां एक बड़ा सरोवर है जिसे शुक्र काशी के नाम से जाना जाता है। मंदिर की खोदाई में महाभारत कालीन सिक्के और पात्र मिले थे। यहां पर कांवड़िये गंगा से जलकर भरकर जलाभिषेक करते हैं। पूरे वर्ष यहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सावन माह में हजारों की संख्या में रोजाना श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। संवाद
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सुनासीर नाथ धाम
बंडा। कस्बे से सात किमी दूर डुंडवा गांव के संपर्क मार्ग पर स्थित पौराणिक महत्व के सुनासीर नाथ धाम स्थित शिव मंदिर में सावन माह आरंभ होते ही भगवान शंकर के जलाभिषेक के लिए शिव भक्त पहुंचने लगे हैं। ऐसी लोक मान्यता है कि गौतम ऋषि के शाप से मुक्ति पाने के लिए देवराज इंद्र ने सुनासीर नाथ धाम के गोमती तट पर तपस्या की थी। पुत्र प्राप्ति की मनौती पूरी होने पर वहां लोग कद्दू (सीताफल) भी चढ़ाए जाते हैं। संवाद
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चिनौर स्थित त्रिलोकीनाथ मंदिर में रविवार को पुलिस बल की मौजूदगी में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया। इसके साथ ही चौकसी नाथ मंदिर, मदनापुर के फिरोजपुर धाम में शिवधाम, बंडा-पूरनपुर मार्ग पर एकोत्तरनाथ मंदिर के साथ ही तिलहर, जलालाबाद, शाहजहांपुर के शिवालयों पर श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे।
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बाबा विश्वनाथ मंदिर
नगर के मध्य टाउनहॉल में स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि यह मंदिर जहां पर स्थापित है, वहां पहले कभी अमरूदों की बगिया थी। नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष फजलुर रहमान खान यहां एक मस्जिद बनवाना चाहते थे। 50-60 के दशक में एक रात सरदार दर्शन सिंह एडवोकेट के घर से पत्थर लाकर पेड़ के नीचे रख दिया गया। रात में ही पूजा अर्चना शुरू हो गई। बाद में माहौल गर्म होता देख पूजा-अर्चना पर रोक लगा दी गई। सन 1957 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद के हस्तक्षेप के बाद मंदिर पर लगी रोक प्रशासन ने हटा दी।
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बाबा बनखंडीनाथ मंदिर
सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के पास स्थित बाबा बनखंडी नाथ मंदिर जनमानस की श्रद्धा का बड़ा केंद्र है। इस स्थान पर कभी जंगल हुआ करता था। साधु-संन्यासी यहां विश्राम के लिए रुकते थे। एक बार एक संन्यासी को शिव मंदिर के निर्माण का सपना आया। इसके बाद हुई खोदाई में कुदाल शिवलिंग से टकराई। इससे शिवलिंग खंडित हो गया। इससे भगवान का नाम बनखंडी नाथ प्रसिद्ध हुआ। मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।
श्री पटना देवीकली मंदिर
कलान तहसील में स्थित श्री पटना देवीकली मंदिर दैत्य गुरु शुक्राचार्य की तपोस्थली रहा है। उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां एक बड़ा सरोवर है जिसे शुक्र काशी के नाम से जाना जाता है। मंदिर की खोदाई में महाभारत कालीन सिक्के और पात्र मिले थे। यहां पर कांवड़िये गंगा से जलकर भरकर जलाभिषेक करते हैं। पूरे वर्ष यहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सावन माह में हजारों की संख्या में रोजाना श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। संवाद
सुनासीर नाथ धाम
बंडा। कस्बे से सात किमी दूर डुंडवा गांव के संपर्क मार्ग पर स्थित पौराणिक महत्व के सुनासीर नाथ धाम स्थित शिव मंदिर में सावन माह आरंभ होते ही भगवान शंकर के जलाभिषेक के लिए शिव भक्त पहुंचने लगे हैं। ऐसी लोक मान्यता है कि गौतम ऋषि के शाप से मुक्ति पाने के लिए देवराज इंद्र ने सुनासीर नाथ धाम के गोमती तट पर तपस्या की थी। पुत्र प्राप्ति की मनौती पूरी होने पर वहां लोग कद्दू (सीताफल) भी चढ़ाए जाते हैं। संवाद

बाबा विश्वनाथ मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

बाबा विश्वनाथ मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

बाबा विश्वनाथ मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1