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फुरकान एनकाउंटर: 12 साल की दहशत का खात्मा, हत्या और नशे के कारोबार से लेकर 'सीजेपी' के आंदोलन तक; पूरी कहानी

Fri, 07 Aug 2026 12:00 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, शामली
अमर उजाला नेटवर्क, शामली Published by: Mohd Mustakim Updated Fri, 07 Aug 2026 12:00 PM IST
सार

Shamli News: पुलिस ने शामली के कैराना समेत तीन राज्यों में सक्रिय मुकीम काला गैंग के बदमाश फुरकान को एनकाउंटर में मार गिराया। फुरकान के पास असलहों समेत 30 कारतूस मिले, जिससे आशंका है कि वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने जा रहा था। साल 2014 में फुरकान ने कैराना में व्यापारी नेता विनोद सिंघल की हत्या की थी, जिसके बाद पलायन का मुद्दा गर्माया था।

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Furkan Encounter: End of a 12-year reign of terror—from the drug trade to the 'CJP' agitation
फुरकान एनकाउंटर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शामली जिले के झिंझाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए एक लाख रुपये के इनामी बदमाश फुरकान के तार तीन राज्यों से जुड़े हुए थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि फुरकान लूट और रंगदारी की वारदातों की आड़ में बड़े पैमाने पर नशे का कारोबार भी चला रहा था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट की पड़ताल में नशा तस्करी से जुड़े कई लोगों के साथ उसके संपर्क होने का खुलासा हुआ है।
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नशे की खेप के स्रोत और सप्लाई नेटवर्क
पुलिस की जांच के अनुसार, फुरकान पंजाब के अमृतसर और फिरोजपुर, असम के म्यांमार बॉर्डर क्षेत्र, और उत्तर प्रदेश के बरेली से नशे की खेप मंगवाता था। इस खेप को वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के विभिन्न इलाकों में सप्लाई करता था। इस अवैध धंधे में उसने अपने परिवार के सदस्यों को भी शामिल कर रखा था। पुलिस को फुरकान के तीन सोशल मीडिया अकाउंट मिले हैं, जिनकी जांच से पता चला है कि वह कैराना के अलावा हरियाणा के पानीपत, सोनीपत और गुरुग्राम के कई लोगों के संपर्क में था। पुलिस अब इन सभी संपर्कों की गहन जांच कर रही है और इस नशीले नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
 
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पत्नी भी नशा तस्करी में गिरफ्तार
पुलिस अधीक्षक एनपी सिंह ने बताया कि फुरकान ने अपनी पत्नी रेशमा और अन्य रिश्तेदारों की मदद से नशे का कारोबार शुरू किया था। लगभग एक वर्ष पूर्व उसकी पत्नी रेशमा को भी नशा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जो करीब पांच महीने पहले ही जमानत पर रिहा हुई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि फुरकान नशे के कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल अपने आपराधिक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए करता था। इसी धंधे की आड़ में वह रंगदारी और लूट जैसी वारदातों को भी अंजाम देता रहा।
 
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पहचान छिपाने के लिए अपनाता था ये तरीके
पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, फुरकान पुलिस को भ्रमित करने के लिए दाढ़ी रखता था और कंधे पर तौलिया डालकर चलता था। पंजाब और हरियाणा में रहने के दौरान उसने कई लोगों के सामने खुद को 'हाफिज' के तौर पर पेश किया और कहा कि वह मस्जिद में नमाज पढ़ाता है, ताकि उस पर कोई शक न करे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि फुरकान पुलिस से बचने के लिए अपने परिवार के साथ पंजाब में बसने की योजना बना रहा था और इसके लिए उसने तैयारियां भी शुरू कर दी थीं।
 

बैग से मिले कारतूस, वारदात की थी तैयारी?
पुलिस ने मुठभेड़ के बाद फुरकान के पास से एक बैग बरामद किया था। इस बैग में उसके कपड़े और 30 से अधिक कारतूस मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि फुरकान किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। बरामद सामान की विस्तृत जांच की जा रही है।
 

राजनीतिक आंदोलन में भी रहा शामिल
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि फुरकान हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के एक आंदोलन में भी शामिल हुआ था। पुलिस को इस संबंध में अहम जानकारी मिली है और वह फुरकान के दिल्ली प्रवास और उसके संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मन्ना माजरा गांव का एक युवक फुरकान के लगातार संपर्क में था और दोनों दिल्ली में आंदोलन के दौरान करीब दो दिन साथ रहे। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फुरकान आंदोलन में किन-किन लोगों से मिला और वहां जाने का उसका असली मकसद क्या था। पुलिस आंदोलन स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटा रही है और फुरकान के मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट व अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उसके संपर्कों की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि कहीं फुरकान ने आंदोलन की आड़ में अपने नेटवर्क का विस्तार करने या राजनीतिक शरण लेने की योजना तो नहीं बनाई थी।
 

मुकीम काला गैंग के सदस्यों पर भी पुलिस की नजर
कुख्यात मुकीम काला और फुरकान के मारे जाने के बाद पुलिस की नजर दोनों गिरोहों के बचे हुए सदस्यों पर टिकी हुई है। पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मुकीम काला गैंग के अधिकांश सदस्य या तो जेल में हैं या पुलिस कार्रवाई में मारे जा चुके हैं। पुलिस गिरफ्त से बाहर बचे सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है। वर्ष 2021 में चित्रकूट जेल में गैंगवार में मुकीम काला की मौत के बाद उसके करीबी रिजवान ने गिरोह की कमान संभाली थी। पुलिस की लगातार कार्रवाई से गिरोह का नेटवर्क कमजोर पड़ा है और अधिकांश सदस्य कानून के शिकंजे में आ गए हैं।

मुकीम काला गैंग के प्रमुख सदस्य
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुकीम काला गैंग के कुल 14 प्रमुख सदस्य थे। इनमें से दो (मुकीम काला और अरशद) मारे जा चुके हैं, आठ सदस्य विभिन्न जेलों में बंद हैं, तीन सदस्य जेल से बाहर हैं, जबकि एक सदस्य पुलिस रडार से बाहर है।

मौत: मुकीम काला, अरशद (बढ़ी माजरा)
जेल में बंद: शेख जादानगर (तितरो), हैदर (तितरो), महताब (बलवा), नीरज (लांक), मुनसाद (खंद्रावली), बशर (हाजीपुरा) सहित अन्य सदस्य।
जेल से बाहर: रिजवान (जहानपुरा), हारून (बरनावी), आसिफ (खंद्रावली)।
पुलिस रडार से बाहर: फरमान (भूरा गांव)।
 

राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी हथियार बनाने की तैयारी
कैराना पलायन प्रकरण के मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये के इनामी बदमाश फुरकान के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा कानून-व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को एक बड़ा मुद्दा बना सकती है। पार्टी कैराना पलायन और फुरकान एनकाउंटर को जोड़कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल बनाने का प्रयास कर सकती है। वहीं, विपक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गया है।
 

12 साल बाद फुरकान का अंत
वर्ष 2014 में व्यापारी विनोद सिंघल की हत्या के बाद पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने फुरकान का आतंक खत्म करने में पूरे 12 साल लग गए। पुलिस जब भी उसके करीब पहुंची, वह या तो भाग निकला या फिर अपनी जमानत तुड़वाकर जेल पहुंच गया। पुलिस से बचने के लिए फुरकान ने रंगदारी की आड़ में ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क भी खड़ा कर लिया था। आखिरकार, 5 अगस्त को पुलिस की घेराबंदी में फुरकान मारा गया और उसके आतंक का अंत हुआ।

भूरा संभाल सकता है 'गैंग्स ऑफ कैराना' की कमान
फुरकान के मारे जाने के बाद पुलिस को आशंका है कि उसका करीबी और शार्प शूटर वाजिद उर्फ भूरा अब 'गैंग्स ऑफ कैराना' की कमान संभाल सकता है। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, फुरकान के गिरोह में कुल सात सदस्य थे। फुरकान के मारे जाने के बाद वाजिद उर्फ भूरा, सद्दू, शौकीन, हारून, नौशाद और रिजवान सक्रिय बताए जा रहे हैं। इनमें वाजिद उर्फ भूरा फिलहाल बाहर है और पुलिस का मानना है कि वही गिरोह की कमान संभाल सकता है।
 

मेरठ, बागपत, सहारनपुर और हरियाणा तक फैला था नेटवर्क 
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि फुरकान का गिरोह मेरठ, बागपत, सहारनपुर के अलावा हरियाणा के करनाल और पानीपत तक फैला हुआ था। पुलिस इन जिलों में भी संदिग्धों की तलाश में दबिश दे रही है और गिरोह से जुड़े लोगों की भूमिका खंगाल रही है। फुरकान पुलिस से बचने के लिए अक्सर हरियाणा के करनाल और गाजियाबाद के लोनी में अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेता था, जिनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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