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Shamli News: आईसीयू में वेंटिलेटर फांक रहे धूल
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शामली। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी के कारण मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। आईसीयू में लगे वेंटिलेटर धूप फांक रहे है, वहीं बर्न यूनिट व ब्लड बैंक चालू न होने से उन पर ताले लटके हैं। गंभीर मरीजों को मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है।
पूर्वी यमुना नहर किनारे जिला अस्पताल को शुरू हुए करीब छह साल हो गए। ओपीडी में 1200 के आसपास मरीज रोजाना उपचार करा रहे हैं, लेकिन अभी तक मरीजों के लिए चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हो सकी है।
अस्पताल परिसर में बर्न यूनिट का भवन बना है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक व स्टाफ की अभी तक नियुक्ति न होने से भवन के गेट पर ताला लगा है।
हालत ये है कि भवन के गेट व परिसर में घासफूस उगी हुई है। आग से झुलसने वाले मरीजों के लिए अस्पताल में बर्न वार्ड बनाया गया है, जिसमें चिकित्सक गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मेरठ मेडिकल रेफर करते हैं। बर्न यूनिट के लिए प्लास्टिक सर्जन, तीन जनरल सर्जन, तीन चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट, फिजियोथैरेपिस्ट और स्टाफ नर्स समेत 22 लोगों का स्टाफ स्वीकृत है, लेकिन अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई।
n लाइसेंस के इंतजार में शुरू नहीं हुआ ब्लड बैंक : जिला अस्पताल में ब्लड बैंक चालू करने की प्रक्रिया दो साल से अधिक समय से चल रही है। ब्लड बैंक के लिए मशीन व उपकरण एक साल पहले आ चुके हैं और लाइसेंस के लिए प्रदेश व केंद्र की टीम द्वारा जांच व निरीक्षण की प्रक्रिया भी हो चुकी है, लेकिन शासन स्तर से लाइसेंस जारी नहीं होने से ब्लड बैंक चालू नहीं हो सका। मरीजाें को सीएचसी शामली पर रक्त संग्रहण केंद्र से रक्त लेना पड़ता है या फिर प्राइवेट ब्लड बैंक से महंगा शुल्क देकर लेना पड़ रहा है।
n आईसीयू में धूल फांक रहे वेंटीलेटर : जिला अस्पताल में आईसीयू चालू है, लेकिन उसमें लगे 28 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। उन्हें चलाने के लिए फिजिशियन, निश्चेतक की नियुक्ति नहीं है। स्टाफ नर्स को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, लेकिन किसी चिकित्सक को प्रशिक्षण नहीं दिया गया। मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल रही है।
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पूर्वी यमुना नहर किनारे जिला अस्पताल को शुरू हुए करीब छह साल हो गए। ओपीडी में 1200 के आसपास मरीज रोजाना उपचार करा रहे हैं, लेकिन अभी तक मरीजों के लिए चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हो सकी है।
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अस्पताल परिसर में बर्न यूनिट का भवन बना है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक व स्टाफ की अभी तक नियुक्ति न होने से भवन के गेट पर ताला लगा है।
हालत ये है कि भवन के गेट व परिसर में घासफूस उगी हुई है। आग से झुलसने वाले मरीजों के लिए अस्पताल में बर्न वार्ड बनाया गया है, जिसमें चिकित्सक गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मेरठ मेडिकल रेफर करते हैं। बर्न यूनिट के लिए प्लास्टिक सर्जन, तीन जनरल सर्जन, तीन चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट, फिजियोथैरेपिस्ट और स्टाफ नर्स समेत 22 लोगों का स्टाफ स्वीकृत है, लेकिन अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई।
n लाइसेंस के इंतजार में शुरू नहीं हुआ ब्लड बैंक : जिला अस्पताल में ब्लड बैंक चालू करने की प्रक्रिया दो साल से अधिक समय से चल रही है। ब्लड बैंक के लिए मशीन व उपकरण एक साल पहले आ चुके हैं और लाइसेंस के लिए प्रदेश व केंद्र की टीम द्वारा जांच व निरीक्षण की प्रक्रिया भी हो चुकी है, लेकिन शासन स्तर से लाइसेंस जारी नहीं होने से ब्लड बैंक चालू नहीं हो सका। मरीजाें को सीएचसी शामली पर रक्त संग्रहण केंद्र से रक्त लेना पड़ता है या फिर प्राइवेट ब्लड बैंक से महंगा शुल्क देकर लेना पड़ रहा है।
n आईसीयू में धूल फांक रहे वेंटीलेटर : जिला अस्पताल में आईसीयू चालू है, लेकिन उसमें लगे 28 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। उन्हें चलाने के लिए फिजिशियन, निश्चेतक की नियुक्ति नहीं है। स्टाफ नर्स को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, लेकिन किसी चिकित्सक को प्रशिक्षण नहीं दिया गया। मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल रही है।

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