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Shamli News: एक मैसेज के इंतजार में खो रहा सुकून
Sun, 09 Aug 2026 01:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 09 Aug 2026 01:14 AM IST
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शामली। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने संवाद को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है लेकिन अब यही सुविधा कई लोगों के लिए मानसिक परेशानी का कारण बन रही है। व्हाट्सएप पर भेजे गए संदेश का देर से जवाब मिलना, सोशल मीडिया पोस्ट पर उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया न आना या पोस्ट देखने के बाद भी रिप्लाई नहीं मिलना कई युवाओं और नौकरीपेशा लोगों में तनाव, बेचैनी और घबराहट बढ़ा रहा है। जिला अस्पताल के मन कक्ष में हर माह ऐसे 10 से 12 लोग उपचार और परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।
अनिंद्रा के शिकार हो गए कर्मचारी
रेलपार क्षेत्र निवासी एक निजी कंपनी कर्मचारी सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद बार-बार मोबाइल देखने लगा। प्रतिक्रिया देर से मिलने पर उसे लगने लगा कि लोग उससे नाराज हैं। कुछ ही समय में वह अनिद्रा और मानसिक तनाव का शिकार हो गया। वर्तमान में उसका मन कक्ष में उपचार चल रहा है।
चिड़चिड़ापन का शिकार हो गया छात्र
कांधला निवासी बीए का छात्र प्रतिदिन सोशल मीडिया पर स्टेटस और पोस्ट साझा करता था। दोस्तों की ओर से जवाब नहीं मिलने पर उसने यह मान लिया कि लोग उससे दूरी बना रहे हैं। धीरे-धीरे उसमें चिड़चिड़ापन बढ़ गया और उसे मानसिक परामर्श की जरूरत पड़ी।
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जवाब नहीं मिलने पर तनाव ग्रस्त हो गया युवक
दिल्ली रोड निवासी एक युवक गुरुग्राम की निजी कंपनी में कार्यरत है। सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया न मिलने और ग्रुप में संदेशों का उत्तर देर से आने के कारण वह लगातार तनाव में रहने लगा। इसके बाद उसे अनिद्रा की शिकायत होने लगी। चिकित्सकीय सलाह के बाद उसने मोबाइल का उपयोग सीमित करना शुरू किया।
हर मैसेज का तुरंत जवाब जरूरी नहीं
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं मन कक्ष प्रभारी डॉ. अतुल बंसल ने बताया कि सोशल मीडिया पर हर संदेश या पोस्ट का तुरंत जवाब मिलना संभव नहीं होता। इसे व्यक्तिगत रूप से लेना उचित नहीं है। लगातार मोबाइल देखने की आदत मानसिक तनाव को बढ़ाती है। इससे बचने के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करें, मोबाइल से नियमित अंतराल पर दूरी बनाएं और परिवार व मित्रों के साथ आमने-सामने बातचीत को प्राथमिकता दें। जरूरत पड़ने पर कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) के माध्यम से भी इस समस्या से बाहर निकला जा सकता है।
डिजिटल संतुलन बनाए रखना जरूरी
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया और मोबाइल का जरूरत से ज्यादा उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। यदि लगातार बेचैनी, अनिद्रा या तनाव महसूस हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
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अनिंद्रा के शिकार हो गए कर्मचारी
रेलपार क्षेत्र निवासी एक निजी कंपनी कर्मचारी सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद बार-बार मोबाइल देखने लगा। प्रतिक्रिया देर से मिलने पर उसे लगने लगा कि लोग उससे नाराज हैं। कुछ ही समय में वह अनिद्रा और मानसिक तनाव का शिकार हो गया। वर्तमान में उसका मन कक्ष में उपचार चल रहा है।
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चिड़चिड़ापन का शिकार हो गया छात्र
कांधला निवासी बीए का छात्र प्रतिदिन सोशल मीडिया पर स्टेटस और पोस्ट साझा करता था। दोस्तों की ओर से जवाब नहीं मिलने पर उसने यह मान लिया कि लोग उससे दूरी बना रहे हैं। धीरे-धीरे उसमें चिड़चिड़ापन बढ़ गया और उसे मानसिक परामर्श की जरूरत पड़ी।
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जवाब नहीं मिलने पर तनाव ग्रस्त हो गया युवक
दिल्ली रोड निवासी एक युवक गुरुग्राम की निजी कंपनी में कार्यरत है। सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया न मिलने और ग्रुप में संदेशों का उत्तर देर से आने के कारण वह लगातार तनाव में रहने लगा। इसके बाद उसे अनिद्रा की शिकायत होने लगी। चिकित्सकीय सलाह के बाद उसने मोबाइल का उपयोग सीमित करना शुरू किया।
हर मैसेज का तुरंत जवाब जरूरी नहीं
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं मन कक्ष प्रभारी डॉ. अतुल बंसल ने बताया कि सोशल मीडिया पर हर संदेश या पोस्ट का तुरंत जवाब मिलना संभव नहीं होता। इसे व्यक्तिगत रूप से लेना उचित नहीं है। लगातार मोबाइल देखने की आदत मानसिक तनाव को बढ़ाती है। इससे बचने के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करें, मोबाइल से नियमित अंतराल पर दूरी बनाएं और परिवार व मित्रों के साथ आमने-सामने बातचीत को प्राथमिकता दें। जरूरत पड़ने पर कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) के माध्यम से भी इस समस्या से बाहर निकला जा सकता है।
डिजिटल संतुलन बनाए रखना जरूरी
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया और मोबाइल का जरूरत से ज्यादा उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। यदि लगातार बेचैनी, अनिद्रा या तनाव महसूस हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।