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साइबर ठगों का जाल : 2500 फर्जी नंबरों से की ठगी
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 31 Mar 2026 01:42 AM IST
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शामली। जिले में साइबर ठगी का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। ठग फर्जी सिम और नंबरों के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले आठ महीनों में करीब 2500 फर्जी नंबरों के जरिए ठगी की गई। इनमें से 1500 नंबरों को ब्लॉक कराया जा चुका है।
पुलिस के अनुसार जिले में हर माह करीब दो करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो रही है। ठग कंपनियों में निवेश पर दोगुना लाभ देने, एपीके फाइल भेजने, रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर रोज कमाई का लालच देकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि ठगी के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड खरीदे जाते हैं और इस्तेमाल के बाद उन्हें बंद कर दिया जाता है। कई मामलों में दिल्ली, हरियाणा और देहरादून के रेहड़ी-पटरी व मजदूरों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जैसे ही ठगी की रकम खातों में पहुंचती है, संबंधित सिम को तुरंत बंद कर दिया जाता है। गिरोह के संबंध में अहम जानकारी मिली है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
मोबाइल फोन भी हो रहे ब्लॉक
पुलिस और पीड़ित केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर पोर्टल के माध्यम से मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर को ब्लॉक करा सकते हैं। अब तक 600 से अधिक मोबाइल फोन ब्लॉक कराए जा चुके हैं।
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की रिपोर्ट के आधार पर जिस डिवाइस से ठगी की जाती है, उसे भी ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है, जिससे उसका दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सके।
ऐसे करें बचाव : एसपी के अनुसार
समय-समय पर जांच करें कि आपके दस्तावेजों पर कोई अन्य सिम तो सक्रिय नहीं
अनजान लिंक या एपीके फाइल बिल्कुल न खोलें
लालच देने वाले निवेश ऑफर से बचें
किसी को भी बैंक डिटेल या ओटीपी साझा न करें
ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें
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पुलिस के अनुसार जिले में हर माह करीब दो करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो रही है। ठग कंपनियों में निवेश पर दोगुना लाभ देने, एपीके फाइल भेजने, रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर रोज कमाई का लालच देकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।
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जांच में सामने आया है कि ठगी के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड खरीदे जाते हैं और इस्तेमाल के बाद उन्हें बंद कर दिया जाता है। कई मामलों में दिल्ली, हरियाणा और देहरादून के रेहड़ी-पटरी व मजदूरों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जैसे ही ठगी की रकम खातों में पहुंचती है, संबंधित सिम को तुरंत बंद कर दिया जाता है। गिरोह के संबंध में अहम जानकारी मिली है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
मोबाइल फोन भी हो रहे ब्लॉक
पुलिस और पीड़ित केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर पोर्टल के माध्यम से मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर को ब्लॉक करा सकते हैं। अब तक 600 से अधिक मोबाइल फोन ब्लॉक कराए जा चुके हैं।
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की रिपोर्ट के आधार पर जिस डिवाइस से ठगी की जाती है, उसे भी ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है, जिससे उसका दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सके।
ऐसे करें बचाव : एसपी के अनुसार
समय-समय पर जांच करें कि आपके दस्तावेजों पर कोई अन्य सिम तो सक्रिय नहीं
अनजान लिंक या एपीके फाइल बिल्कुल न खोलें
लालच देने वाले निवेश ऑफर से बचें
किसी को भी बैंक डिटेल या ओटीपी साझा न करें
ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें