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Shamli News: शामली–सहारनपुर से फर्जी जाति और अन्य प्रमाण पत्र बनवाकर किया 30 लाख का गोलमाल
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: एसडीएम की जांच में सामने आए तथ्य
- जिलाधिकारी बोले, मामले में फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपियों पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में उद्यान विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों के अलावा डीलर आशीष ने शामली और सहारनपुर से फर्जी जाति प्रमाण पत्र, जमीन की खतौनी और अनापत्ति प्रमाण पत्र लगाकर योजना में गड़बड़ी की थी। विभागीय अधिकारियों की जांच में यह बातें सामने आई हैं। उधर, जिलाधिकारी ने भी इस मामले का पूरा ब्योरा तलब करते हुए संबंधितों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में किसानों को पिछड़ी जाति के किसानों को अनुसूचित वर्ग का दर्शाकर करीब 30 लाख रुपये के गोलमाल की शिकायत किसानों ने जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों से की थी। गंगोह के जेहरा गांव के किसान पृथ्वी सिंह, राम स्वरुप, सूरत सिंह, प्रमोद कुमार, प्रकाश आदि ने शिकायत की थी। पूर्व मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी की जांच में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के नाम पर करीब 30 लाख रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई थी। अब एसडीएम विनय कुमार को मामले की जांच सौंपी गई।
जांच में सामने आया है कि गंगोह के जेहरा गांव के किसान पृथ्वी सिंह, राम स्वरुप, सूरत सिंह, प्रमोद कुमार, प्रकाश समेत 12 किसानों के सामान्य और पिछड़ी जाति के होने के बावजूद फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जन सुविधा केंद्रों से बनवाया गया। इसके अलावा किसानों की अधिक जमीन दर्शाने के लिए खतौनी और अनापत्ति प्रमाण पत्र भी फर्जी तरीके से तैयार कराए गए। मामले में सहारनपुर की कंपनी के डीलर आशीष तथा उद्यान विभाग के अन्य अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है।
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जिलाधिकारी आलोक यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में गोलमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पूरे मामले का ब्योरा तलब कर लिया गया है और जल्द कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- जिनके पास जमीन ही नहीं, उनको भी बना दिया पात्र
जिन किसानों के पास जमीन ही नहीं, उन्हें भी योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया गया। जांच में सामने आया है कि किसान रामशरण के पास कोई जमीन नहीं है, जबकि जग्गू, पहल सिंह और कटार सिंह के पास नलकूप नहीं है, इसके बावजूद उनके खातों में राशि पहुंचाई गई।
यह है मामला
वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ऊन, जेहरा क्षेत्र के किसानों ने आवेदन किया था। बाद में कई किसानों ने शिकायत की कि विभागीय कर्मचारियों ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर लाभ दिया और राशि को अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया।
इस मामले में विभागीय स्तर पर कनिष्ठ सहायक और प्रभारी सहायक लेखाकार सचिन कुमार पर कार्रवाई की गई है, जबकि दो अन्य को नोटिस जारी किए गए थे। प्रमाण पत्र कहां बने इसकी जांच एसडीएम विनय को सौंपी गई थी।
किसान बोले, जिलाधिकारी से करेंगे शिकायत
चौसाना क्षेत्र में खेती करने वाले ग्राम जेहरा के किसान सोनू, प्रमोद आदि का कहना है कि मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है और दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिलाधिकारी से मिलकर शिकायत करेंगे।
- जिलाधिकारी बोले, मामले में फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपियों पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में उद्यान विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों के अलावा डीलर आशीष ने शामली और सहारनपुर से फर्जी जाति प्रमाण पत्र, जमीन की खतौनी और अनापत्ति प्रमाण पत्र लगाकर योजना में गड़बड़ी की थी। विभागीय अधिकारियों की जांच में यह बातें सामने आई हैं। उधर, जिलाधिकारी ने भी इस मामले का पूरा ब्योरा तलब करते हुए संबंधितों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में किसानों को पिछड़ी जाति के किसानों को अनुसूचित वर्ग का दर्शाकर करीब 30 लाख रुपये के गोलमाल की शिकायत किसानों ने जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों से की थी। गंगोह के जेहरा गांव के किसान पृथ्वी सिंह, राम स्वरुप, सूरत सिंह, प्रमोद कुमार, प्रकाश आदि ने शिकायत की थी। पूर्व मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी की जांच में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के नाम पर करीब 30 लाख रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई थी। अब एसडीएम विनय कुमार को मामले की जांच सौंपी गई।
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जांच में सामने आया है कि गंगोह के जेहरा गांव के किसान पृथ्वी सिंह, राम स्वरुप, सूरत सिंह, प्रमोद कुमार, प्रकाश समेत 12 किसानों के सामान्य और पिछड़ी जाति के होने के बावजूद फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जन सुविधा केंद्रों से बनवाया गया। इसके अलावा किसानों की अधिक जमीन दर्शाने के लिए खतौनी और अनापत्ति प्रमाण पत्र भी फर्जी तरीके से तैयार कराए गए। मामले में सहारनपुर की कंपनी के डीलर आशीष तथा उद्यान विभाग के अन्य अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है।
जिलाधिकारी आलोक यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में गोलमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पूरे मामले का ब्योरा तलब कर लिया गया है और जल्द कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- जिनके पास जमीन ही नहीं, उनको भी बना दिया पात्र
जिन किसानों के पास जमीन ही नहीं, उन्हें भी योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया गया। जांच में सामने आया है कि किसान रामशरण के पास कोई जमीन नहीं है, जबकि जग्गू, पहल सिंह और कटार सिंह के पास नलकूप नहीं है, इसके बावजूद उनके खातों में राशि पहुंचाई गई।
यह है मामला
वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ऊन, जेहरा क्षेत्र के किसानों ने आवेदन किया था। बाद में कई किसानों ने शिकायत की कि विभागीय कर्मचारियों ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर लाभ दिया और राशि को अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया।
इस मामले में विभागीय स्तर पर कनिष्ठ सहायक और प्रभारी सहायक लेखाकार सचिन कुमार पर कार्रवाई की गई है, जबकि दो अन्य को नोटिस जारी किए गए थे। प्रमाण पत्र कहां बने इसकी जांच एसडीएम विनय को सौंपी गई थी।
किसान बोले, जिलाधिकारी से करेंगे शिकायत
चौसाना क्षेत्र में खेती करने वाले ग्राम जेहरा के किसान सोनू, प्रमोद आदि का कहना है कि मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है और दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिलाधिकारी से मिलकर शिकायत करेंगे।