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शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट : शमन के लिए दुकानदारों ने जमा कराए दो करोड़, फिर से बाजार गुलजार की आस
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मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को नई शमन नीति से बड़ी राहत की उम्मीद है। सोमवार को व्यापारियों ने विभाग द्वारा निर्धारित शुल्क जमा करने की प्रक्रिया उत्साहपूर्वक शुरू कर दी। ज्ञात हो कि 8 मार्च को धरने पर बैठे व्यापारियों को वास्तुविद नियोजक की ओर से शमन हेतु पत्र प्राप्त हुआ था जिसके प्रथम चरण में 80 व्यापारियों को राहत प्रदान करते हुए शमन के आदेश दिए गए थे।
व्यापारियों को राहत पाने के लिए 10 फुट का सेट बैक छोड़ना अनिवार्य है साथ ही 36 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है। भुगतान की प्रक्रिया में जैना ज्वैलर्स की ओर से सर्वाधिक सवा करोड़ रुपये की धनराशि जमा कराई गई है। इसके अतिरिक्त गणपति प्लाजा और साहिल प्लाजा के दुकानदारों ने भी तत्परता दिखाते हुए कुल मिलाकर लगभग दो करोड़ रुपये आवास एवं विकास परिषद के खातों में जमा कर दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 सप्ताह के भीतर ध्वस्तीकरण के कड़े निर्देश दिए थे। इस आदेश की जद में 1468 निर्माण आ रहे हैं जो मूल रूप से आवासीय मानचित्र पर बने हैं लेकिन वर्तमान में व्यावसायिक उपयोग (शोरूम व कॉम्प्लेक्स) में हैं। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आवास विकास परिषद ने वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के साथ सर्वे तेज कर दिया है।
दुकानदारों के बीच मची हलचल
बाजार में वर्तमान में दो तरह की स्थितियां देखने को मिल रही हैं। लगभग 150 से अधिक दुकानदारों ने दुकानों के शटर हटाकर वहां दीवार, खिड़की और दरवाजे लगाकर उन्हें पुनः आवासीय स्वरूप देना शुरू कर दिया है। वहीं व्यापारियों का मानना है कि नई नीति का लाभ बड़े भूखंड वाले ही ले पाएंगे। 25 से 38 वर्ग मीटर के छोटे मकानों में चल रही दुकानें 10 फुट सेट बैक छोड़ने पर लगभग समाप्त हो जाएंगी।
प्रमुख जमाकर्ता और आंकड़े
शुल्क जमा करने वाले प्रमुख व्यापारियों में मिली रस्तोगी (6 लाख), राजीव राजवंशी (4.5 लाख), पुनीत कुमार (4.35 लाख) शामिल हैं। एडवोकेट राहुल मलिक ने बताया कि राधे प्रिंट पैलेस ने 2 लाख और महिपाल सिंह ने 3.19 लाख रुपये जमा कराए हैं। जैना ज्वैलर्स के रोहित जैन ने पुष्टि की है कि शमन नीति के अंतर्गत नियमानुसार धनराशि जमा कर दी गई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 सप्ताह के भीतर ध्वस्तीकरण के कड़े निर्देश दिए थे। इस आदेश की जद में 1468 निर्माण आ रहे हैं जो मूल रूप से आवासीय मानचित्र पर बने हैं लेकिन वर्तमान में व्यावसायिक उपयोग (शोरूम व कॉम्प्लेक्स) में हैं। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आवास विकास परिषद ने वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के साथ सर्वे तेज कर दिया है।
दुकानदारों के बीच मची हलचल
बाजार में वर्तमान में दो तरह की स्थितियां देखने को मिल रही हैं। लगभग 150 से अधिक दुकानदारों ने दुकानों के शटर हटाकर वहां दीवार, खिड़की और दरवाजे लगाकर उन्हें पुनः आवासीय स्वरूप देना शुरू कर दिया है। वहीं व्यापारियों का मानना है कि नई नीति का लाभ बड़े भूखंड वाले ही ले पाएंगे। 25 से 38 वर्ग मीटर के छोटे मकानों में चल रही दुकानें 10 फुट सेट बैक छोड़ने पर लगभग समाप्त हो जाएंगी।
प्रमुख जमाकर्ता और आंकड़े
शुल्क जमा करने वाले प्रमुख व्यापारियों में मिली रस्तोगी (6 लाख), राजीव राजवंशी (4.5 लाख), पुनीत कुमार (4.35 लाख) शामिल हैं। एडवोकेट राहुल मलिक ने बताया कि राधे प्रिंट पैलेस ने 2 लाख और महिपाल सिंह ने 3.19 लाख रुपये जमा कराए हैं। जैना ज्वैलर्स के रोहित जैन ने पुष्टि की है कि शमन नीति के अंतर्गत नियमानुसार धनराशि जमा कर दी गई है।