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Shamli News: 55 सेकंड के वीडियो में कैद है हैवानियत
Tue, 18 Aug 2026 12:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 18 Aug 2026 12:42 AM IST
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सजा... मखमूलपुर में 6 अप्रैल 2022 को कंकरखेड़ा के पिता पुत्र की पिटाई करते हुए ले जाते सिपाही
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कैराना (शामली)। दोहरे हत्याकांड से पहले की 55 सेकंड के वीडियो में आरोपी विक्रांत और अन्य लोग भूपेंद्र व उसके बेटे अर्जुन को पीटते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक पुलिसकर्मी भी नजर आ रहा है, जो आरोपियों को रोकने का प्रयास करता दिख रहा है। पिता-पुत्र के साथ मारपीट का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो ने हत्याकांड से पहले हुई भयावहता को फिर सामने ला दिया है। संवाद
इतनी बेरहमी की सजा मौत से कम नहीं, बचाव पक्ष ने मांगी कम से कम सजा
कैराना। पिता-पुत्र हत्याकांड में दोषी ठहराए गए बर्खास्त सिपाही और उसके परिजनों समेत चार दोषियों की सजा पर फैसला सुनाए जाने से पहले अदालत में करीब एक घंटे तक सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच बहस हुई। मुकदमे की वादी सुरेश देवी की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मपाल सिंह चौहान ने अदालत के सामने तर्क रखा कि आरोपियों ने भूपेंद्र और उसके बेटे अर्जुन को बंधक बनाकर लंबे समय तक यातनाएं दीं। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में ही पिता-पुत्र के साथ मारपीट करते हुए उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया। बाद में दोनों को जंगल में ले जाकर गोली मारकर हत्या कर दी गई। अधिवक्ता ने वारदात की गंभीरता और आरोपियों की बेरहमी का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराध में दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता चंद्रवीर ने अदालत के समक्ष दोषियों को कम से कम सजा देने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में सजा पर फैसला सुनाया। संवाद
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इतनी बेरहमी की सजा मौत से कम नहीं, बचाव पक्ष ने मांगी कम से कम सजा
कैराना। पिता-पुत्र हत्याकांड में दोषी ठहराए गए बर्खास्त सिपाही और उसके परिजनों समेत चार दोषियों की सजा पर फैसला सुनाए जाने से पहले अदालत में करीब एक घंटे तक सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच बहस हुई। मुकदमे की वादी सुरेश देवी की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मपाल सिंह चौहान ने अदालत के सामने तर्क रखा कि आरोपियों ने भूपेंद्र और उसके बेटे अर्जुन को बंधक बनाकर लंबे समय तक यातनाएं दीं। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में ही पिता-पुत्र के साथ मारपीट करते हुए उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया। बाद में दोनों को जंगल में ले जाकर गोली मारकर हत्या कर दी गई। अधिवक्ता ने वारदात की गंभीरता और आरोपियों की बेरहमी का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराध में दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता चंद्रवीर ने अदालत के समक्ष दोषियों को कम से कम सजा देने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में सजा पर फैसला सुनाया। संवाद
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