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Shamli News: गला दबाकर की गई थी पशु व्यापारी और बेटे की हत्या, गले की हड्डी टूटी मिली
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संभल के मृतक भीमसैन का फाइल फोटो। पुलिस
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- देर रात में पोस्टमार्टम के बाद दोनों शवों को परिजनों के सुपुर्द किया
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला संभल के धनारी थानाक्षेत्र के गांव भिरावटी मजरा मलुआ निवासी पशु व्यापारी नरेश यादव (40) व उसके बेटे भीमसैन (20) के शवों का देर रात में पोस्टमार्टम हुआ। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को दोनों के शव सुपुर्द कर दिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दोनों की मौत गला दबाकर की गई थी। दोनों के गले की हड्डी भी टूटी हुई मिली। परिजन दोनों शव लेकर घर चले गए।
संभल जिले की धनारी थाना पुलिस ने साथ में लाए एक आरोपी की निशानदेही पर मंगलवार शाम को नरेश यादव व उसके बेटे भीमसैन के शव शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव काबड़ौत के जंगल में राजेंद्र के खेत से बरामद किए थे। दोनों शव सड़ी गली अवस्था में थे। पिता-पुत्र दो अप्रैल की रात से लापता थे। पुलिस ने दोनों शवों का शामली में पोस्टमार्टम कराया। पुलिस की सूचना पर रात में करीब दो बजे मृतक नरेश के भाई रामसरन व दुर्गन, चचेरा भाई ओमपाल शामली पहुंचे।
उनके साथ उनके गांव निवासी एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष डॉ. सुनील यादव भी पहुंचे। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर शवों की शिनाख्त की। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने दोनों शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद दोनों शव लेकर परिजन घर चले गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिता-पुत्र की मौत गला दबाने से होना आया। साथ ही दोनों की गले की हड्डी भी टूटी हुई पाई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर माना जा रहा है कि हत्यारोपियों के साथ पिता-पुत्र ने संघर्ष किया था। हत्या करने बाद आरोपियों ने दोनों शवों को जंगल में फेंक दिया था और उनकी पिकअप गाड़ी लूटकर पंजाब की तरफ भाग गए थे।
-- परिवार में दोनों ही कमाने वाले थे पिता-पुत्र
मृतक नरेश के छोटे भाई दुर्गन ने बताया कि नरेश तीन भाइयों में मझला था। परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। नरेश व उसका बड़ा बेटा भीमसैन भाड़े पर अपना पिकअप चलाने के साथ पशुओं का व्यापार भी करते थे। पिकअप को उन्होंने बैंक से लोन लेकर खरीदा था। नरेश व उसके बड़े बेटे की मौत के बाद परिवार में पत्नी दो बेटी विनीता व ऊषा और दो छोटे बेटे कन्हैया व ओमबीर रह गए हैं। पिता-पुत्र की मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट बन गया है।
-- यह था मामला
संभल जिले के गांव भिरावटी मजरा मलुआ निवासी नरेश यादव व उसका बेटा भीमसैन दो अप्रैल को अपने भाई रामसरन की भैंस पिकअप में लेकर बेचने के लिए अमावती बाजार थाना कैलादेवी में गए थे। वहीं बाजार में दो अनजान लोग मिले, जिन्होंने खुद को व्यापारी बताते हुए मेरठ से लेबर लाने के लिए पिकअप को बुक कर लिया। भैंस न बिकने पर नरेश व उसका बेटा भैंस को घर छोड़कर उन लोगों द्वारा फोन पर बताए गए पते गांव सैंधन थाना कैलादेवी शाम को करीब साढ़े सात बजे पहुंचे और वहां से मेरठ के लिए चल दिए। रात करीब दस बजे रिश्तेदार से नरेश की फोन पर बात हुई तो उन्होंने अपनी लोकेशन दिल्ली रोड पर गढ़ टोल प्लाजा के पास बताई थी। उस समय भीमसैन को गाड़ी चलाना बताया था। इसके बाद से दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए थे। परिजनों ने थाना धनारी पर उनके लापता होने की सूचना दी थी।
-- परिजन बोले पुलिस गंभीरता से लेती तो बच सकती थी पिता-पुत्र की जान
शामली। नरेश यादव व उसके बेटे भीमसैन की हत्या को लेकर परिजनों में गम के साथ पुलिस के प्रति गुस्सा रहा। नरेश के भाई रामसरन ने बताया कि उन्होंने अपने भाई व भतीजे के लापता होने व फोन बंद आने की जानकारी थाना धनारी पुलिस को पहले ही दे दी थी। चार अप्रैल को लिखित में थाने पर तहरीर दे दी थी, लेकिन पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस ने न तो उनकी रिपोर्ट दर्ज की और न ही मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाकर जांच कराई। दो दिन पहले जब परिजनों ने हंगामा किया तब जाकर छह अप्रैल को शाम करीब साढ़े चार बजे एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई। परिजनों का आरोप है कि अगर पुलिस पहले से ही मामले को गंभीरता से लेती तो उसके भाई व भतीजे की जान बच सकती थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला संभल के धनारी थानाक्षेत्र के गांव भिरावटी मजरा मलुआ निवासी पशु व्यापारी नरेश यादव (40) व उसके बेटे भीमसैन (20) के शवों का देर रात में पोस्टमार्टम हुआ। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को दोनों के शव सुपुर्द कर दिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दोनों की मौत गला दबाकर की गई थी। दोनों के गले की हड्डी भी टूटी हुई मिली। परिजन दोनों शव लेकर घर चले गए।
संभल जिले की धनारी थाना पुलिस ने साथ में लाए एक आरोपी की निशानदेही पर मंगलवार शाम को नरेश यादव व उसके बेटे भीमसैन के शव शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव काबड़ौत के जंगल में राजेंद्र के खेत से बरामद किए थे। दोनों शव सड़ी गली अवस्था में थे। पिता-पुत्र दो अप्रैल की रात से लापता थे। पुलिस ने दोनों शवों का शामली में पोस्टमार्टम कराया। पुलिस की सूचना पर रात में करीब दो बजे मृतक नरेश के भाई रामसरन व दुर्गन, चचेरा भाई ओमपाल शामली पहुंचे।
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उनके साथ उनके गांव निवासी एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष डॉ. सुनील यादव भी पहुंचे। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर शवों की शिनाख्त की। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने दोनों शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद दोनों शव लेकर परिजन घर चले गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिता-पुत्र की मौत गला दबाने से होना आया। साथ ही दोनों की गले की हड्डी भी टूटी हुई पाई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर माना जा रहा है कि हत्यारोपियों के साथ पिता-पुत्र ने संघर्ष किया था। हत्या करने बाद आरोपियों ने दोनों शवों को जंगल में फेंक दिया था और उनकी पिकअप गाड़ी लूटकर पंजाब की तरफ भाग गए थे।
मृतक नरेश के छोटे भाई दुर्गन ने बताया कि नरेश तीन भाइयों में मझला था। परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। नरेश व उसका बड़ा बेटा भीमसैन भाड़े पर अपना पिकअप चलाने के साथ पशुओं का व्यापार भी करते थे। पिकअप को उन्होंने बैंक से लोन लेकर खरीदा था। नरेश व उसके बड़े बेटे की मौत के बाद परिवार में पत्नी दो बेटी विनीता व ऊषा और दो छोटे बेटे कन्हैया व ओमबीर रह गए हैं। पिता-पुत्र की मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट बन गया है।
संभल जिले के गांव भिरावटी मजरा मलुआ निवासी नरेश यादव व उसका बेटा भीमसैन दो अप्रैल को अपने भाई रामसरन की भैंस पिकअप में लेकर बेचने के लिए अमावती बाजार थाना कैलादेवी में गए थे। वहीं बाजार में दो अनजान लोग मिले, जिन्होंने खुद को व्यापारी बताते हुए मेरठ से लेबर लाने के लिए पिकअप को बुक कर लिया। भैंस न बिकने पर नरेश व उसका बेटा भैंस को घर छोड़कर उन लोगों द्वारा फोन पर बताए गए पते गांव सैंधन थाना कैलादेवी शाम को करीब साढ़े सात बजे पहुंचे और वहां से मेरठ के लिए चल दिए। रात करीब दस बजे रिश्तेदार से नरेश की फोन पर बात हुई तो उन्होंने अपनी लोकेशन दिल्ली रोड पर गढ़ टोल प्लाजा के पास बताई थी। उस समय भीमसैन को गाड़ी चलाना बताया था। इसके बाद से दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए थे। परिजनों ने थाना धनारी पर उनके लापता होने की सूचना दी थी।
शामली। नरेश यादव व उसके बेटे भीमसैन की हत्या को लेकर परिजनों में गम के साथ पुलिस के प्रति गुस्सा रहा। नरेश के भाई रामसरन ने बताया कि उन्होंने अपने भाई व भतीजे के लापता होने व फोन बंद आने की जानकारी थाना धनारी पुलिस को पहले ही दे दी थी। चार अप्रैल को लिखित में थाने पर तहरीर दे दी थी, लेकिन पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस ने न तो उनकी रिपोर्ट दर्ज की और न ही मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाकर जांच कराई। दो दिन पहले जब परिजनों ने हंगामा किया तब जाकर छह अप्रैल को शाम करीब साढ़े चार बजे एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई। परिजनों का आरोप है कि अगर पुलिस पहले से ही मामले को गंभीरता से लेती तो उसके भाई व भतीजे की जान बच सकती थी।

संभल के मृतक भीमसैन का फाइल फोटो। पुलिस