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Shamli News: प्राचीन शिव मंदिर की दीवार गिरी, जीर्णोद्धार पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 11 May 2026 12:39 AM IST
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जलालाबाद में मंदिर की गिरी दीवार। संवाद
- फोटो : जेतवन परिसर में सभा के दौरान मौजूद अनुयायी।
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जलालाबाद। कस्बे के दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के पास प्राचीन शिव-हनुमान मंदिर के जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण का कार्य अभी पूरा नहीं हो पाया है, लेकिन हाल ही में हुई बारिश से मंदिर की दीवार गिरने से सुंदरीकरण पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रदेश सरकार की वंदन योजना के तहत शिव मंदिर के सुंदरीकरण व जीर्णोद्धार के लिए शासन से सवा करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई थी। इस धनराशि से मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसमें अभी भी कुछ कार्य बीच में अधूरे छोड़ दिए गए है। मंदिर परिसर में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण पानी जमा हो गया। पानी के दबाव और मिट्टी के धंसाव के कारण मंदिर की दीवार भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि उस वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। श्रद्धालुओं का आरोप है कि कार्य में लापरवाही के साथ मानकों को ताक पर रखकर निर्माण किया गया है।
कस्बा निवासी मोनू पाल ने बताया कि मंदिर का कायाकल्प होने के बावजूद भी कार्य अधूरे छोड़े गए हैं। मंदिर के बरामदे का फर्श भी पानी के कारण बैठा चुका है। पास की दीवार भी गिर चुकी है। कई बार इसकी प्रशासन को शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।
मंदिर समिति के प्रबंधक दीपक पाल का कहना है कि ठेकेदार को बार बार कहने के बावजूद भी पुरानी दीवारों को ज्यों की त्यों छोड़ दिया गया था। मंदिर के पास से गुजर रहे दखौड़ी मार्ग पर नाला का निर्माण होना था जो अभी तक अधूरा पड़ा है। प्रशासन को इसकी जांच करानी चाहिए।
मंदिर समिति के प्रधान सुंदर ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सवा करोड़ रुपये पास हुए थे, लेकिन मंदिर का उचित कायाकल्प नहीं हुआ। प्रशासन को इसकी गहनता से जांच करानी चाहिए।
वंदना योजना तहत मंदिर में कराए जाने वाले कार्यों में दीवार का निर्माण शामिल नहीं है। मंदिर परिसर में धंसे हुए फर्श व गिरी दीवार की जल्द ही मरम्मत कराई जाएगी। - जयवीर शर्मा, ईओ नगर पंचायत जलालाबाद
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प्रदेश सरकार की वंदन योजना के तहत शिव मंदिर के सुंदरीकरण व जीर्णोद्धार के लिए शासन से सवा करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई थी। इस धनराशि से मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसमें अभी भी कुछ कार्य बीच में अधूरे छोड़ दिए गए है। मंदिर परिसर में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण पानी जमा हो गया। पानी के दबाव और मिट्टी के धंसाव के कारण मंदिर की दीवार भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि उस वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। श्रद्धालुओं का आरोप है कि कार्य में लापरवाही के साथ मानकों को ताक पर रखकर निर्माण किया गया है।
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कस्बा निवासी मोनू पाल ने बताया कि मंदिर का कायाकल्प होने के बावजूद भी कार्य अधूरे छोड़े गए हैं। मंदिर के बरामदे का फर्श भी पानी के कारण बैठा चुका है। पास की दीवार भी गिर चुकी है। कई बार इसकी प्रशासन को शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।
मंदिर समिति के प्रबंधक दीपक पाल का कहना है कि ठेकेदार को बार बार कहने के बावजूद भी पुरानी दीवारों को ज्यों की त्यों छोड़ दिया गया था। मंदिर के पास से गुजर रहे दखौड़ी मार्ग पर नाला का निर्माण होना था जो अभी तक अधूरा पड़ा है। प्रशासन को इसकी जांच करानी चाहिए।
मंदिर समिति के प्रधान सुंदर ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सवा करोड़ रुपये पास हुए थे, लेकिन मंदिर का उचित कायाकल्प नहीं हुआ। प्रशासन को इसकी गहनता से जांच करानी चाहिए।
वंदना योजना तहत मंदिर में कराए जाने वाले कार्यों में दीवार का निर्माण शामिल नहीं है। मंदिर परिसर में धंसे हुए फर्श व गिरी दीवार की जल्द ही मरम्मत कराई जाएगी। - जयवीर शर्मा, ईओ नगर पंचायत जलालाबाद