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Shravasti News: 6000 दीपों से रोशन हुआ जेतवन
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 03 May 2026 12:31 AM IST
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गंध कुटी पर फूल पूजा करते बौद्ध अनुयायी।- संवाद
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कटरा। बुद्ध पूर्णिमा की शाम बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के जेतवन परिसर में दीप यज्ञ के दौरान 6000 दीप जलाए गए। उधर, गंध कुटी में बौद्ध भिक्षु देवेंद्र के नेतृत्व में विशेष फूल पूजा की गई। इस बीच उन्होंने अहिंसक यज्ञों के महत्व पर आधारित भगवान बुद्ध के उपदेशों की जानकारी दी।
बौद्ध भिक्षु देवेंद्र ने कौशल नरेश प्रसेनजित के यज्ञ का जिक्र करते हुए बताया कि प्रसेनजित ने सैकड़ों पशुओं को बलि देने की तैयारी की थी। भगवान बुद्ध ने ऐसे यज्ञों को अस्वीकार किया, जहां निरीह प्राणियों की हिंसा होती है। उन्होंने कहा कि विद्वानों को ऐसा यज्ञ करना चाहिए, जिसमें हिंसा न हो।
देवेंद्र ने दीर्घ निकाय के कूटदत्त सुत्त का हवाला देते हुए महाविजित राजा की कथा भी सुनाई, जिसमें राजा ने लोक कल्याण के विभिन्न कार्य किए थे। भिक्षु ने बताया कि बुद्ध ने कहा था कि लोगों का भला करने वाले सत्कर्म ही उत्तम यज्ञ हैं।
कार्यक्रम में मौजूद विजय बौद्ध ने बताया कि पूरे परिसर में 6000 दीप जलाए गए हैं। दीप यज्ञ के दौरान जेतवन परिसर के प्रमुख स्थलों गंध कुटी, शिवली स्तूप, बोधिवृक्ष, सभा मंडप, कौशाम कुट्टी और सूर्यकुंड को पुष्पों और दीपों से सजाया गया। इस दौरान राजकिशोर वर्मा, संजय खन्ना, बौद्ध भिक्षु भंवरानंद, नाग लोक व मेघा थेरो आदि मौजूद रहीं।
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बौद्ध भिक्षु देवेंद्र ने कौशल नरेश प्रसेनजित के यज्ञ का जिक्र करते हुए बताया कि प्रसेनजित ने सैकड़ों पशुओं को बलि देने की तैयारी की थी। भगवान बुद्ध ने ऐसे यज्ञों को अस्वीकार किया, जहां निरीह प्राणियों की हिंसा होती है। उन्होंने कहा कि विद्वानों को ऐसा यज्ञ करना चाहिए, जिसमें हिंसा न हो।
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देवेंद्र ने दीर्घ निकाय के कूटदत्त सुत्त का हवाला देते हुए महाविजित राजा की कथा भी सुनाई, जिसमें राजा ने लोक कल्याण के विभिन्न कार्य किए थे। भिक्षु ने बताया कि बुद्ध ने कहा था कि लोगों का भला करने वाले सत्कर्म ही उत्तम यज्ञ हैं।
कार्यक्रम में मौजूद विजय बौद्ध ने बताया कि पूरे परिसर में 6000 दीप जलाए गए हैं। दीप यज्ञ के दौरान जेतवन परिसर के प्रमुख स्थलों गंध कुटी, शिवली स्तूप, बोधिवृक्ष, सभा मंडप, कौशाम कुट्टी और सूर्यकुंड को पुष्पों और दीपों से सजाया गया। इस दौरान राजकिशोर वर्मा, संजय खन्ना, बौद्ध भिक्षु भंवरानंद, नाग लोक व मेघा थेरो आदि मौजूद रहीं।
