फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Breaking the drug network is the biggest challenge of the 100-day campaign.

Siddharthnagar News: नशे के नेटवर्क को तोड़ना 100 दिन के अभियान की सबसे बड़ी चुनाैती

Fri, 31 Jul 2026 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 31 Jul 2026 12:02 AM IST
विज्ञापन
Breaking the drug network is the biggest challenge of the 100-day campaign.
सिद्धार्थनगर। पीएम द्वारा दो अगस्त से शुरू हो रहे 100 दिवसीय नशा विरोधी अभियान की सिद्धार्थनगर में सबसे बड़ी चुनौती नशे की बदलती सप्लाई चेन होगी। भारत-नेपाल सीमा पर सख्ती के बाद तस्करों ने अपने रास्ते और नेटवर्क बदल लिए हैं।
विज्ञापन

पहले नेपाल से तस्करी कर सामान आता था, अब दूसरे राज्यों से शराब, गांजा और स्मैक की खेप जिले तक पहुंचाई जा रही है। ऐसे में अभियान की सफलता केवल बरामदगी के आंकड़ों से नहीं बल्कि अंतरराज्यीय नेटवर्क और स्थानीय सप्लाई चेन पर प्रभावी कार्रवाई से तय होगी।
विज्ञापन

भारत-नेपाल सीमा से सटा सिद्धार्थनगर लंबे समय तक नेपाल से होने वाली शराब, बीयर, गांजा और चरस की तस्करी के लिए संवेदनशील माना जाता रहा। एसएसबी, पुलिस और कस्टम की लगातार सख्ती के बाद सीमा पार से होने वाली तस्करी का स्वरूप बदला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अब हालिया मामलों में हरियाणा और अन्य राज्यों की शराब, उड़ीसा के नेटवर्क से गांजा और बाराबंकी से स्मैक की सप्लाई के मामले लगातार सामने आए हैं। वहीं, नशीले पदार्थ भारत से नेपाल ले जाने की कोशिश में तस्कर दबोचे गए हैं।
पुलिस आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में नशे के सेवन की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। शराब के बाद सबसे अधिक गांजे का इस्तेमाल होता है। सीमावर्ती इलाकों में स्मैक और हेरोइन की उपलब्धता समय-समय पर पुलिस कार्रवाई में सामने आती रही है। चरस की तस्करी की सूचनाएं मिलती रहती हैं लेकिन पिछले करीब डेढ़ वर्ष में इसकी कोई उल्लेखनीय बरामदगी नहीं हुई है।
एजेंसियों का मानना है कि अब बड़ी खेप के बजाय छोटे-छोटे कंसाइनमेंट के जरिये नशीले पदार्थ जिले तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे तस्करी के नेटवर्क का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी लक्ष्मीनारायण कहते हैं कि दो अगस्त से शुरू होने वाले अभियान में पुलिस, एसएसबी, कस्टम और अन्य एजेंसियों का फोकस केवल सीमा पर निगरानी तक सीमित रहेगा तो परिणाम अच्छे नहीं मिलेंगे।
गिरोहों, स्थानीय सप्लायरों, आर्थिक नेटवर्क और सप्लाई चेन को तोड़ना होगा। नशे की मांग और सप्लाई, दोनों पर एक साथ चोट किए बिना परिणाम नहीं मिल पाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed