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Siddharthnagar News: सुनहरा ख्वाब दिखाकर कर रहे मानव तस्करी
Fri, 31 Jul 2026 12:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:10 AM IST
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में विश्व मानव तस्करी विरोध दिवस के अवसर पर बृहस्पतिवार को मानव संसाधन और महिला विकास संस्थान और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘ट्रैप्ड बिहाइंड द स्कैम’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को मानव तस्करी और साइबर अपराध के बदलते स्वरूप से अवगत कराते हुए सतर्क रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक प्रशासन विभाग की प्रो. सुनीता त्रिपाठी ने की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ अपराधी फर्जी नौकरी, शिक्षा और विदेश भेजने का झांसा देकर युवाओं को मानव तस्करी के जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता सबसे प्रभावी हथियार है।
प्रो. हरीश द्विवेदी ने कहा कि मानव तस्करी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। युवाओं में सामाजिक चेतना विकसित कर इस अपराध के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा सकता है।
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एसएसबी 43वीं वाहिनी के सहायक कमांडेंट सचिन ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए एसएसबी लगातार अभियान चला रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को देने की अपील की।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र सिंह ने रोजगार, विवाह और बेहतर जीवन का झांसा देकर की जाने वाली मानव तस्करी के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। साइबर सेल निरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने ऑनलाइन ठगी, फर्जी जॉब ऑफर, फिशिंग लिंक और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक श्याम सुंदर तिवारी ने कहा कि साइबर अपराध और मानव तस्करी अब एक-दूसरे से जुड़े अपराध बनते जा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग ही इन अपराधों से बचाव का प्रभावी माध्यम है।
जिला सलाहकार जय प्रकाश गुप्ता ने सामूहिक प्रयास और समय पर सूचना देने को मानव तस्करी रोकने का सबसे प्रभावी उपाय बताया। वहीं डिस्ट्रिक्ट लीडर प्रसून कुमार शुक्ल ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से साइबर ठगी और मानव तस्करी के नए तरीकों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने मानव तस्करी और साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. यशवंत यादव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुनीता त्रिपाठी ने किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के शिक्षक, एसएसबी, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना, साइबर थाना, कपिलवस्तु कोतवाली पुलिस, नेपाल के पीआरसी के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक प्रशासन विभाग की प्रो. सुनीता त्रिपाठी ने की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ अपराधी फर्जी नौकरी, शिक्षा और विदेश भेजने का झांसा देकर युवाओं को मानव तस्करी के जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता सबसे प्रभावी हथियार है।
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प्रो. हरीश द्विवेदी ने कहा कि मानव तस्करी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। युवाओं में सामाजिक चेतना विकसित कर इस अपराध के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा सकता है।
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एसएसबी 43वीं वाहिनी के सहायक कमांडेंट सचिन ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए एसएसबी लगातार अभियान चला रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को देने की अपील की।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र सिंह ने रोजगार, विवाह और बेहतर जीवन का झांसा देकर की जाने वाली मानव तस्करी के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। साइबर सेल निरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने ऑनलाइन ठगी, फर्जी जॉब ऑफर, फिशिंग लिंक और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक श्याम सुंदर तिवारी ने कहा कि साइबर अपराध और मानव तस्करी अब एक-दूसरे से जुड़े अपराध बनते जा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग ही इन अपराधों से बचाव का प्रभावी माध्यम है।
जिला सलाहकार जय प्रकाश गुप्ता ने सामूहिक प्रयास और समय पर सूचना देने को मानव तस्करी रोकने का सबसे प्रभावी उपाय बताया। वहीं डिस्ट्रिक्ट लीडर प्रसून कुमार शुक्ल ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से साइबर ठगी और मानव तस्करी के नए तरीकों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने मानव तस्करी और साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. यशवंत यादव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुनीता त्रिपाठी ने किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के शिक्षक, एसएसबी, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना, साइबर थाना, कपिलवस्तु कोतवाली पुलिस, नेपाल के पीआरसी के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।