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Siddharthnagar News: रवि किशन, चंद्र प्रकाश व अतुल सर्राफ बन सकते हैं डीडीयू में प्रोफेसर

Mon, 29 Jun 2026 02:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 02:31 AM IST
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Ravi Kishan, Chandra Prakash, and Atul Sarraf could become professors at DDU
- डीडीयू में पहली बार नियुक्त होंगे प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस
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- साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी, कल कार्यपरिषद में खुलेगा लिफाफा

संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। सांसद रवि किशन, उद्यमी चंद्र प्रकाश अग्रवाल व व्यवसायी अतुल सर्राफ दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बन सकते हैं। इनकी नियुक्ति प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के पद पर होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनका साक्षात्कार लिया है। इनकी उपयोगिता व अनुभव को देखते हुए इनका चयन तय माना जा रहा है।
चयन की औपचारिक घोषणा 30 जून को होने वाली कार्य परिषद की बैठक के बाद की जाएगी। इनका पद मानद होगा। डीडीयू की ओर से पहली बार इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान, मीडिया, साहित्य, ललित कला, सिविल सेवा और सशस्त्र बलों सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस के तौर पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। यूजीसी ने 2020 में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसे विशेषज्ञों की नियुक्ति की अनुमति दी थी, जिनके पास परंपरागत डिग्री हो या न हो लेकिन संबंधित क्षेत्र में उत्कृष्ट अनुभव जरूर हो।
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नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा को रोजगारपरक और व्यावहारिक बनाने के लिए अनुभवी प्रोफेशनल्स को विश्वविद्यालय से जोड़ा जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ विद्यार्थियों को कार्यक्षेत्र की चुनौतियों और अवसरों से रूबरू कराएंगे। डीडीयू ने प्रतिष्ठित प्रोफेशनल्स, उद्योग विशेषज्ञों, मीडियाकर्मियों, प्रशासनिक और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी लोगों से संपर्क किया है। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस विद्यार्थियों को केस स्टडी, प्रोजेक्ट आधारित अध्ययन, इंडस्ट्री एक्सपोजर, इंटर्नशिप और कॅरिअर के लिए मार्गदर्शन देंगे। इससे कैंपस प्लेसमेंट बढ़ेगा।
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क्षेत्र विशेष में व्यापक अनुभव जरूरी

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के लिए किसी क्षेत्र में उत्कृष्ट व्यावहारिक अनुभव होना आवश्यक है। इसके लिए पीएचडी या शोध की अनिवार्यता नहीं है। तकनीक, उद्योग, मीडिया, विज्ञान, कला, कानून, उद्यमिता और प्रशासन आदि क्षेत्रों के अनुभवी लोग इस पद पर नियुक्त किए जा सकते हैं।

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति से छात्र-छात्राओं को अपने क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुभवों का पूरा लाभ मिलेगा। इससे छात्रों की व्यावहारिक जानकारी बढ़ेगी। साथ ही प्रोफेशनल निपुणता भी बढ़ेगी। 30 जून को होने वाली कार्य परिषद की बैठक में नियुक्तियों का लिफाफा खुलेगा।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
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