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Siddharthnagar News: हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय
Fri, 31 Jul 2026 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:32 AM IST
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सेमरा स्थित बाबा पल्टन नाथ शिव मंदिर पर जल चढ़ाते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Samvad
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सिद्धार्थनगर। श्रावण मास का शुभारंभ बृहस्पतिवार को भगवान शिव की आराधना और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ हुआ। जिले के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।
पहले दिन मंदिरों में दिनभर दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। चार सावन सोमवार को और अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए हैं।
इटवा स्थित कटेश्वरनाथ धाम, देईपार का प्राचीन शिव मंदिर, भारतभारी शिव मंदिर, हल्लौर का बाबा सिद्धेश्वरनाथ मंदिर, भानपुर रानी का बाबा भुवनेश्वरनाथ मंदिर, बेवा चौराहा शिव मंदिर, बांसी क्षेत्र के प्राचीन शिवालय, जोगिया क्षेत्र के शिव मंदिर, नगर के रामलीला मैदान स्थित दुर्गा-शिव मंदिर, राप्ती तट स्थित शिव मंदिर, शोहरतगढ़, बढ़नी, नौगढ़, उसका बाजार, बिस्कोहर, खेसरहा और कपिलवस्तु क्षेत्र के विभिन्न शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
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मंदिर परिसरों में सफाई, आकर्षक सजावट, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
सावन में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार बांसी क्षेत्र के राप्ती नदी स्थित परसोहन घाट से बड़ी संख्या में कांवड़िए जल भरकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। खुनियांव क्षेत्र के अमहवा घाट से भी स्थानीय कांवड़ यात्राएं निकल रही हैं।
कटेश्वरनाथ धाम में पूरे सावन भर लगने वाले मेले को लेकर भी विशेष तैयारियां की गई हैं। सोमवार को श्रद्धालुओं की बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है।
सावन के पहले दिन जिले के बाजारों में भी रौनक रही। बेलपत्र, धतूरा, फूल-माला, रुद्राक्ष, कांवड़, पूजन सामग्री और प्रसाद की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही। मंदिरों में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, भजन-कीर्तन और सुंदरकांड पाठ जैसे धार्मिक आयोजनों का क्रम भी शुरू हो गया है।
धर्माचार्य पंडित धनंजय मिश्र ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने इसी कालखंड में किया था। उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
इस माह रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और शिव पूजन का विशेष महत्व माना गया है।
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पहले दिन मंदिरों में दिनभर दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। चार सावन सोमवार को और अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए हैं।
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इटवा स्थित कटेश्वरनाथ धाम, देईपार का प्राचीन शिव मंदिर, भारतभारी शिव मंदिर, हल्लौर का बाबा सिद्धेश्वरनाथ मंदिर, भानपुर रानी का बाबा भुवनेश्वरनाथ मंदिर, बेवा चौराहा शिव मंदिर, बांसी क्षेत्र के प्राचीन शिवालय, जोगिया क्षेत्र के शिव मंदिर, नगर के रामलीला मैदान स्थित दुर्गा-शिव मंदिर, राप्ती तट स्थित शिव मंदिर, शोहरतगढ़, बढ़नी, नौगढ़, उसका बाजार, बिस्कोहर, खेसरहा और कपिलवस्तु क्षेत्र के विभिन्न शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
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मंदिर परिसरों में सफाई, आकर्षक सजावट, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
सावन में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार बांसी क्षेत्र के राप्ती नदी स्थित परसोहन घाट से बड़ी संख्या में कांवड़िए जल भरकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। खुनियांव क्षेत्र के अमहवा घाट से भी स्थानीय कांवड़ यात्राएं निकल रही हैं।
कटेश्वरनाथ धाम में पूरे सावन भर लगने वाले मेले को लेकर भी विशेष तैयारियां की गई हैं। सोमवार को श्रद्धालुओं की बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है।
सावन के पहले दिन जिले के बाजारों में भी रौनक रही। बेलपत्र, धतूरा, फूल-माला, रुद्राक्ष, कांवड़, पूजन सामग्री और प्रसाद की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही। मंदिरों में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, भजन-कीर्तन और सुंदरकांड पाठ जैसे धार्मिक आयोजनों का क्रम भी शुरू हो गया है।
धर्माचार्य पंडित धनंजय मिश्र ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने इसी कालखंड में किया था। उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
इस माह रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और शिव पूजन का विशेष महत्व माना गया है।

सेमरा स्थित बाबा पल्टन नाथ शिव मंदिर पर जल चढ़ाते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : Samvad