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Siddharthnagar News: 100 एकड़ में विकसित होगा औद्योगिक क्षेत्र
Tue, 11 Aug 2026 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 11 Aug 2026 12:08 AM IST
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तहसील बांसी। संवाद
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सिद्धार्थनगर। जिले में औद्योगिक विकास की लंबे समय से चली आ रही मांग अब धरातल पर नजर आने लगी है। सिद्धार्थनगर में करीब 100 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया बृहस्पतिवार से शुरू होगी।
इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की तीन सदस्यीय टीम 13 अगस्त को जिले में पहुंचकर संभावित भूमि का निरीक्षण और चिह्नीकरण करेगी। टीम जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर ऐसी जमीन तलाशेगी, जहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक रूप से अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध हों। यूपीसीडा मुख्यालय के निर्देश पर गठित टीम में क्षेत्रीय प्रबंधक गोरखपुर धर्मचंद्र, वरिष्ठ प्रबंधक (निर्माण-सिविल), जगदीशपुर अमेठी प्रवीण सलोनिया और भूमि अध्याप्ति अधिकारी, यूपीसीडा मुख्यालय कानपुर ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी शामिल हैं। टीम संभावित भूमि का निरीक्षण करने के साथ ही उसकी स्थिति, उपलब्धता और औद्योगिक क्षेत्र के लिहाज से उपयोगिता का परीक्षण करेगी। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की अगली कार्रवाई शुरू होगी।
सिद्धार्थनगर में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित होने के कारण यहां कृषि उपज से जुड़े प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और अन्य लघु और मध्यम उद्योगों की संभावनाएं हैं।
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स्थानीय स्तर पर उद्योगों का पर्याप्त आधार नहीं होने से युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है। अब 100 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने की पहल को जिले के औद्योगिक परिदृश्य में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में आधारभूत सुविधाएं विकसित होने के बाद स्थानीय उद्यमियों के साथ ही बाहर के निवेशकों को भी उद्योग स्थापित करने का अवसर मिल सकता है।
जमीन चयन सबसे अहम चुनौती : औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण उपयुक्त जमीन की तलाश है। यूपीसीडा की टीम प्रशासन के साथ मिलकर संभावित स्थानों का परीक्षण करेगी। जमीन के चयन में सड़क संपर्क, बिजली, पानी, परिवहन, बाजार तक पहुंच और भविष्य में औद्योगिक विस्तार की संभावना जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जाएगा।
सिद्धार्थनगर की स्थिति को देखते हुए औद्योगिक क्षेत्र के लिए ऐसी जगह का चयन महत्वपूर्ण होगा, जहां से जिले के प्रमुख बाजारों के साथ-साथ बस्ती, गोरखपुर और नेपाल सीमा क्षेत्र तक माल की आवाजाही आसान हो सके। इससे औद्योगिक इकाइयों के लिए कच्चा माल लाने और तैयार उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में लागत कम हो सकती है।
एक्सप्रेसवे के आसपास हो सकता है भूमि चिह्नांकन : औद्योगिक क्षेत्र के लिए सबसे अहम सुविधा आवागमन होने के कारण जिले से होकर गुजरने वाले गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के आसपास ही भूमि का चिह्नांकन किया जा सकता है। बांसी क्षेत्र में यह एक्सप्रेसवे एनएच-28 से कनेक्ट होगा, जिस कारण औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए यह क्षेत्र सबसे मुफीद माना जा रहा है।
यह आकांक्षी जनपद सिद्धार्थनगर में औद्योगिक विकास की नई पहल है। स्थानीय व्यापारिक संगठनों की ओर से भी लंबे समय से जिले में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की मांग की जाती रही है। औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए प्रशासनिक स्तर पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया था।
कृषि आधारित उद्योगों को मिल सकता है फायदा : सिद्धार्थनगर में कृषि आधारित औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से जिले की स्थानीय उपज को बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी। धान, गेहूं, दलहन, तिलहन, सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े प्रसंस्करण उद्योग स्थापित होने पर किसानों को भी स्थानीय स्तर पर बाजार मिल सकता है।
फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और कृषि उपकरणों से जुड़े उद्योगों के लिए भी नया औद्योगिक क्षेत्र आधार बन सकता है। इससे कृषि को उद्योग से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावना है। बस्ती व संतकबीर नगर के बाद सिद्धार्थनगर में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना से जिले को भी पूर्वांचल के औद्योगिक नक्शे पर नई पहचान मिलने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।
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इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की तीन सदस्यीय टीम 13 अगस्त को जिले में पहुंचकर संभावित भूमि का निरीक्षण और चिह्नीकरण करेगी। टीम जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर ऐसी जमीन तलाशेगी, जहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक रूप से अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध हों। यूपीसीडा मुख्यालय के निर्देश पर गठित टीम में क्षेत्रीय प्रबंधक गोरखपुर धर्मचंद्र, वरिष्ठ प्रबंधक (निर्माण-सिविल), जगदीशपुर अमेठी प्रवीण सलोनिया और भूमि अध्याप्ति अधिकारी, यूपीसीडा मुख्यालय कानपुर ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी शामिल हैं। टीम संभावित भूमि का निरीक्षण करने के साथ ही उसकी स्थिति, उपलब्धता और औद्योगिक क्षेत्र के लिहाज से उपयोगिता का परीक्षण करेगी। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की अगली कार्रवाई शुरू होगी।
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सिद्धार्थनगर में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित होने के कारण यहां कृषि उपज से जुड़े प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और अन्य लघु और मध्यम उद्योगों की संभावनाएं हैं।
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स्थानीय स्तर पर उद्योगों का पर्याप्त आधार नहीं होने से युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है। अब 100 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने की पहल को जिले के औद्योगिक परिदृश्य में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में आधारभूत सुविधाएं विकसित होने के बाद स्थानीय उद्यमियों के साथ ही बाहर के निवेशकों को भी उद्योग स्थापित करने का अवसर मिल सकता है।
जमीन चयन सबसे अहम चुनौती : औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण उपयुक्त जमीन की तलाश है। यूपीसीडा की टीम प्रशासन के साथ मिलकर संभावित स्थानों का परीक्षण करेगी। जमीन के चयन में सड़क संपर्क, बिजली, पानी, परिवहन, बाजार तक पहुंच और भविष्य में औद्योगिक विस्तार की संभावना जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जाएगा।
सिद्धार्थनगर की स्थिति को देखते हुए औद्योगिक क्षेत्र के लिए ऐसी जगह का चयन महत्वपूर्ण होगा, जहां से जिले के प्रमुख बाजारों के साथ-साथ बस्ती, गोरखपुर और नेपाल सीमा क्षेत्र तक माल की आवाजाही आसान हो सके। इससे औद्योगिक इकाइयों के लिए कच्चा माल लाने और तैयार उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में लागत कम हो सकती है।
एक्सप्रेसवे के आसपास हो सकता है भूमि चिह्नांकन : औद्योगिक क्षेत्र के लिए सबसे अहम सुविधा आवागमन होने के कारण जिले से होकर गुजरने वाले गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के आसपास ही भूमि का चिह्नांकन किया जा सकता है। बांसी क्षेत्र में यह एक्सप्रेसवे एनएच-28 से कनेक्ट होगा, जिस कारण औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए यह क्षेत्र सबसे मुफीद माना जा रहा है।
यह आकांक्षी जनपद सिद्धार्थनगर में औद्योगिक विकास की नई पहल है। स्थानीय व्यापारिक संगठनों की ओर से भी लंबे समय से जिले में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की मांग की जाती रही है। औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए प्रशासनिक स्तर पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया था।
कृषि आधारित उद्योगों को मिल सकता है फायदा : सिद्धार्थनगर में कृषि आधारित औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से जिले की स्थानीय उपज को बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी। धान, गेहूं, दलहन, तिलहन, सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े प्रसंस्करण उद्योग स्थापित होने पर किसानों को भी स्थानीय स्तर पर बाजार मिल सकता है।
फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और कृषि उपकरणों से जुड़े उद्योगों के लिए भी नया औद्योगिक क्षेत्र आधार बन सकता है। इससे कृषि को उद्योग से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावना है। बस्ती व संतकबीर नगर के बाद सिद्धार्थनगर में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना से जिले को भी पूर्वांचल के औद्योगिक नक्शे पर नई पहचान मिलने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।