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Siddharthnagar News: मानसून की सुस्ती से धान पर संकट, 31 फीसदी कम हुई बारिश

Wed, 12 Aug 2026 11:07 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 12 Aug 2026 11:07 PM IST
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Siddharthnagar News: Paddy crop at risk due to sluggish monsoon; rainfall down by 31 percent
- 10 अगस्त तक सामान्य 510 मिमी के मुकाबले हुई 350 मिमी बारिश, पिछले साल भी 170 मिमी पीछे
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- 36.5 डिग्री तापमान और 81 फीसदी उमस ने बढ़ाई परेशानी, 13 अगस्त से बारिश की उम्मीद
सिद्धार्थनगर। मानसून की बेरुखी ने जिले में मौसम के साथ खेती की चिंता भी बढ़ा दी है। 10 अगस्त तक जिले में करीब 510 मिमी सामान्य बारिश के मुकाबले महज 350 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। इस तरह सामान्य से करीब 160 मिमी यानी 31 प्रतिशत कम बारिश हुई। पिछले वर्ष इसी अवधि में करीब 520 मिमी बारिश हुई थी। इस लिहाज से इस साल बारिश पिछले वर्ष के मुकाबले भी करीब 170 मिमी पीछे है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई बारिश से धान के खेतों को कुछ राहत जरूर मिली लेकिन मानसून के दोबारा सुस्त पड़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
बुधवार को अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.2 डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 27.5 डिग्री रहा। अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता 81 प्रतिशत और हवा की गति महज दो किलोमीटर प्रति घंटा रही। तेज धूप और उमस के बीच बारिश नहीं होने से लोगों के साथ खेतों में भी नमी का संकट बढ़ रहा है।
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आज से बदल सकता है मौसम
- मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा। इसके प्रभाव से 13 अगस्त से पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र के अनुसार सिद्धार्थनगर में भी बारिश के आसार हैं। हालांकि अगले 24 घंटे में अच्छी बारिश की संभावना नहीं है और कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश के ऊपर बना पुराना कम दबाव का क्षेत्र आगे बढ़ जाने से मानसूनी हवाओं की सक्रियता कमजोर हुई है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाओं में कमजोरी के कारण पर्याप्त नमी नहीं पहुंच रही है। इसी से बारिश का अंतराल बढ़ा है।
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धान के लिए खेत में नमी जरूरी
- धान की फसल के इस चरण में खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। बारिश का अंतराल बढ़ने पर किसान सिंचाई के लिए निजी नलकूप, पंपसेट और अन्य साधनों पर निर्भर हो रहे हैं। इससे डीजल, बिजली और मजदूरी का खर्च बढ़ रहा है। छोटे किसानों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बारिश न होने पर किसान खेत की नमी देखकर ही सिंचाई करें। अनावश्यक पानी लगाने से लागत बढ़ेगी। जहां संभव हो, खेत में उपलब्ध पानी को रोककर रखने और सिंचाई की योजना बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए बनाने से खर्च नियंत्रित किया जा सकता है। अगले दौर में अच्छी बारिश होती है तो धान की फसल को राहत मिलने के साथ सिंचाई खर्च भी घटेगा।
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बारिश के आंकड़े
अवधि
बारिश
सामान्य बारिश
करीब 510 मिमी
वास्तविक बारिश
करीब 350 मिमी
कमी
करीब 160 मिमी
सामान्य से कमी
करीब 31 प्रतिशत
2025 में इसी अवधि में
करीब 520 मिमी
2025 के मुकाबले कमी
करीब 170 मिमी
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