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Sitapur News: मिशन नवशक्ति ने 75 महिलाओं को बनाया सूक्ष्म उद्यमी
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 06 Mar 2026 09:17 PM IST
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सीतापुर। कटिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने महिलाओं को मत्स्य पालन के गुर सिखाने के लिए प्रशिक्षित किया है। विशेष रूप से अनुसूचित जाति समुदाय की 75 महिलाओं को एक्वेरियम निर्माण और सजावटी मछली प्रबंधन में दक्ष कर उन्हें सूक्ष्म-उद्यमी बनाया गया है। फिश बैंक के बतौर यह मछलियों के संग्रह और वितरण केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र कटिया में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के सहयोग से महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए मिशन नवशक्ति के तहत ऑर्नामेंटल फिश बैंक का संचालन किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म-उद्यमी बनाना है। केंद्र की ओर से प्रगतिशील मत्स्य पालकों को बाजार में उत्पाद बेचने में सहायता के लिए आइसबॉक्स और वेइंग स्केल जैसे आवश्यक उपकरण भी वितरित किए गए हैं। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ दया शंकर श्रीवास्तव ने बताया कि इस परियोजना के तहत अनुसूचित जाति समुदाय की 75 महिलाओं को एक्वेरियम निर्माण और सजावटी मछली प्रबंधन में दक्ष कर उन्हें सूक्ष्म-उद्यमी बनाया गया है।
रोजगार की नई संभावना बनीं रंगीन मछलियां
केवीके कटिया की पहल से रंगीन मछलियां गांवों में तमाम परिवारों के लिए रोजगार की नई संभावना बन रही हैं। केंद्र के अध्यक्ष डा. दया शंकर श्रीवास्तव ने लाभान्वित महिलाओं से संपर्क किया। उनके परिजनों व बच्चों से बात की। इससे बच्चों में अधिक रुचि दिखाई दी। वह इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे कम समय में अधिक आय होगी। घर में ही कार्य किया जा सकता है।
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इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म-उद्यमी बनाना है। केंद्र की ओर से प्रगतिशील मत्स्य पालकों को बाजार में उत्पाद बेचने में सहायता के लिए आइसबॉक्स और वेइंग स्केल जैसे आवश्यक उपकरण भी वितरित किए गए हैं। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ दया शंकर श्रीवास्तव ने बताया कि इस परियोजना के तहत अनुसूचित जाति समुदाय की 75 महिलाओं को एक्वेरियम निर्माण और सजावटी मछली प्रबंधन में दक्ष कर उन्हें सूक्ष्म-उद्यमी बनाया गया है।
रोजगार की नई संभावना बनीं रंगीन मछलियां
केवीके कटिया की पहल से रंगीन मछलियां गांवों में तमाम परिवारों के लिए रोजगार की नई संभावना बन रही हैं। केंद्र के अध्यक्ष डा. दया शंकर श्रीवास्तव ने लाभान्वित महिलाओं से संपर्क किया। उनके परिजनों व बच्चों से बात की। इससे बच्चों में अधिक रुचि दिखाई दी। वह इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे कम समय में अधिक आय होगी। घर में ही कार्य किया जा सकता है।
