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Sitapur News: अब सफेद सोना की खेती से आत्मनिर्भर बनेंगे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 14 Mar 2026 12:07 AM IST
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सीतापुर। जिले में कृषि विविधीकरण को नई दिशा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र कटिया की ओर से मखाना विकास योजना के तहत दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। इसमें मौजूद विशेषज्ञों ने किसानों को सफेद सोना माने जाने वाले मखाना की खेती से आत्मनिर्भर बनने के गुर बताए।
जिला उद्यान अधिकारी राजश्री ने प्रशिक्षण के मुख्य उद्देश्यों के बारे में बताते हुए कहा कि इसका प्राथमिक लक्ष्य जिले के किसानों को मखाना की वैज्ञानिक खेती, उन्नत प्रसंस्करण और बेहतर विपणन तकनीकों से जागरूक बनाना है। ताकि किसान बिचौलियों पर निर्भर न रहकर स्वयं उद्यमी बन सकें।
कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह ने बताया कि केंद्र वर्ष 2018-19 से ही मखाना उत्पादन के पैकेज ऑफ प्रैक्टिस पर निरंतर कार्य कर रहा है। जिले में स्थानीय जलवायु के अनुकूल मखाना उत्पादन का सफल अनुभव है, जिसका लाभ अब सीधे क्षेत्र के किसानों को मिल रहा है।
जलभराव वाले क्षेत्रों का होगा सदुपयोग
प्रसार वैज्ञानिक शैलेंद्र सिंह व वैज्ञानिक डॉ. शिशिर कांत सिंह ने कृषि विभाग की खेत तालाब योजना का संदर्भ देते हुए बताया कि मखाना एक ऐसी फसल है जो कम लागत में जलभराव वाले क्षेत्रों का सदुपयोग कर किसानों को अत्यधिक लाभ दिला सकती है। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. शुभम सिंह राठौर ने जलभराव वाले क्षेत्रों में मखाना की नर्सरी प्रबंधन, रोपाई की विधि और हानिकारक कीटों व रोगों से बचाव की बारीकियों पर अपनी प्रस्तुति दी। उद्यान निरीक्षक राजीव गुप्ता ने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि व्यवसायी बनाना है। प्रशिक्षण के सफल समापन पर सभी प्रशिक्षित किसानों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए जाएंगे।
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जिला उद्यान अधिकारी राजश्री ने प्रशिक्षण के मुख्य उद्देश्यों के बारे में बताते हुए कहा कि इसका प्राथमिक लक्ष्य जिले के किसानों को मखाना की वैज्ञानिक खेती, उन्नत प्रसंस्करण और बेहतर विपणन तकनीकों से जागरूक बनाना है। ताकि किसान बिचौलियों पर निर्भर न रहकर स्वयं उद्यमी बन सकें।
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कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह ने बताया कि केंद्र वर्ष 2018-19 से ही मखाना उत्पादन के पैकेज ऑफ प्रैक्टिस पर निरंतर कार्य कर रहा है। जिले में स्थानीय जलवायु के अनुकूल मखाना उत्पादन का सफल अनुभव है, जिसका लाभ अब सीधे क्षेत्र के किसानों को मिल रहा है।
जलभराव वाले क्षेत्रों का होगा सदुपयोग
प्रसार वैज्ञानिक शैलेंद्र सिंह व वैज्ञानिक डॉ. शिशिर कांत सिंह ने कृषि विभाग की खेत तालाब योजना का संदर्भ देते हुए बताया कि मखाना एक ऐसी फसल है जो कम लागत में जलभराव वाले क्षेत्रों का सदुपयोग कर किसानों को अत्यधिक लाभ दिला सकती है। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. शुभम सिंह राठौर ने जलभराव वाले क्षेत्रों में मखाना की नर्सरी प्रबंधन, रोपाई की विधि और हानिकारक कीटों व रोगों से बचाव की बारीकियों पर अपनी प्रस्तुति दी। उद्यान निरीक्षक राजीव गुप्ता ने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि व्यवसायी बनाना है। प्रशिक्षण के सफल समापन पर सभी प्रशिक्षित किसानों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए जाएंगे।