सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Pilgrims performed Sankirtan, Naimisharanya became filled with Rama

Sitapur News: परिक्रमार्थियों ने किया संकीर्तन, राममय हुआ नैमिष

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Feb 2026 12:18 AM IST
विज्ञापन
Pilgrims performed Sankirtan, Naimisharanya became filled with Rama
परिक्रमा में राम नाम का जयघोष लगाते साधु संत व श्रद्धालु। - फोटो : परिक्रमा में राम नाम का जयघोष लगाते साधु संत व श्रद्धालु।
विज्ञापन
नैमिषारण्य (सीतापुर)। कड़ाकड़ बम बोल..., जय सीता राम..., हर हर महादेव... का उद्घोष करते हुए परिक्रमार्थी आठ पड़ाव पार कर बृहस्पतिवार को 84 कोसी परिक्रमा के नौवें पड़ाव नैमिषारण्य पहुंचे। परिक्रमार्थियों ने यहां डेरा डालने के बाद पावन चक्रतीर्थ व आदि गंगा गोमती में डुबकी लगाकर मां ललिता देवी समेत विभिन्न मठ व मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद साधु-संत ध्यान में लीन हो गए। परिक्रमार्थी अपने डेरे पर राम नाम का संकीर्तन करने लगे। इससे समूचा नैमिष राममय हो गया। इस पड़ाव पर परिक्रमार्थी रात भर भजन कीर्तन करेंगे। शुक्रवार सुबह अगले पड़ाव कोल्हुआ बरेठी की ओर प्रस्थान करेंगे। शनिवार को परिक्रमा अपने अंतिम पड़ाव मिश्रिख पहुंचेगी।
Trending Videos

रामादल का नौवें पड़ाव नैमिषारण्य तीर्थ में बृहस्पतिवार सुबह से आगमन शुरू हो गया था। इस दौरान परिक्रमा पथ पर कई श्रद्धालु ढोल-मंजीरे की धुन पर भजन-कीर्तन करते पैदल चलते दिखे। वहीं, बड़ी संख्या में श्रद्धालु साइकिल, मोटर साइकिल, ट्रैक्टर-ट्रॉली व चार पहिया पर बैठकर यात्रा में शामिल हुए। रथ, हाथी व घोड़े पर सवार संत-महंत भी नैमिषारण्य तीर्थ में पहुंचकर जल्द ही स्नान व पूजन का क्रम शुरू करने को उत्सुक दिखे।
विज्ञापन
विज्ञापन

नैमिष तीर्थ में परिक्रमार्थियों ने खुले मैदान, धर्मशालाओं, बाग बगीचों, तीर्थ पुरोहितों व संत महात्माओं के आश्रमों में डेरा डाला। परिक्रमार्थियों ने राम नाम का जयकारा लगाते हुए ऋषियों की भूमि में तीर्थ की पवित्र नदी गोमती और चक्रतीर्थ में स्नान पूजन किया। इसके बाद मां ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, नैमिष नाथ, हनुमान गढ़ी, देवदेवेश्वर, देवपुरी, बाला जी, सत्यनारायण सन्निधि मंदिर, कालीपीठ आदि धार्मिक स्थलों का दर्शन-पूजन कर मोक्ष की कामना की।
इस दौरान पूरे नैमिष में परिक्रमार्थियों के छोटे-छोटे तंबू काफी आकर्षक लग रहे थे। कई जगह परिक्रमार्थी चूल्हे पर भोजन बताने दिखे। वहीं, कई आश्रमों व मंदिरों में भंडारे का दौर भी जारी रहा। पहला आश्रम में महंत नारायणदास, शिव शक्ति आश्रम में महंत सुरेश दास अवस्थी व श्रीनाथजी हवेली में धर्मेंद्र शास्त्री, महंत विवेक शास्त्री ने भंडारे का आयोजन किया। मंशा देवी मंदिर, कालीपीठ, रामानुजकोट समेत कई मंदिरों व अन्य स्थानों पर भी भंडारे लगे।



भगवान राम के जन्म की पृष्ठभूमि है नैमिष
भगवान राम से नैमिषारण्य का सीधा जुड़ाव है। दरअसल, प्रभु श्रीराम के जन्म की पृष्ठभूमि नैमिष ही है। सतयुग में मनु-सतरूपा ने नैमिष में हजारों वर्षों तक तपस्या की और भगवान श्रीहरि के दर्शन देने पर अगले जन्म में उन्हें पुत्र रूप में पाने का वरदान लिया। इस पर श्रीहरि ने वरदान देते हुए कहा कि त्रेता युग में वे रामावतार लेंगे। तब मनु राजा दशरथ व सतरूपा रानी कौशल्या बनेंगी।

श्रीराम ने चक्रतीर्थ में की थी गणेश मंदिर की स्थापना
भगवान राम ने अयोध्या वासियों के साथ नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा की थी। इसलिए आज भी परिक्रमार्थियों को रामादल कहा जाता है। परिक्रमा के दौरान कई ऐसे स्थानों के दर्शन होते हैं, जहां आज भी प्रभु श्रीराम की महिमा के प्रमाण मिलते हैं। चक्रतीर्थ पर स्थित गणेश मंदिर की स्थापना खुद भगवान राम ने की थी। आज भी परिक्रमार्थी भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग लगाकर ही परिक्रमा शुरू करते हैं।



श्रीराम को ब्रह्महत्या के दोष से यहीं मिली थी मुक्ति
मान्यता है कि जब भगवान राम को रावण का वध करने पर ब्रह्महत्या का दोष लगा तब ऋषि वशिष्ठ की आज्ञा लेकर उन्होंने नैमिषारण्य के समस्त तीर्थों में स्नान किया। ब्रह्म हत्या का दोष प्रभास्कर नामक तीर्थ में छूटा, तबसे इसका नाम हत्याहरण तीर्थ पड़ गया। यह स्थान अब 84 कोसी परिक्रमा के मध्य हरदोई जनपद में पड़ता है।


दशाश्वमेध घाट पर राम ने किया था यज्ञ

नैमिष में गोमती तट स्थित दशाश्वमेध घाट का वर्णन वाल्मीकि रामायण में मिलता है। भगवान राम ने सीता जी को वन भेज दिया था। लोक कल्याण के लिए उन्होंने इस स्थान पर अश्वमेध यज्ञ किया। उस समय सीताजी के स्थान पर उनकी सोने की मूर्ति रखकर पूजा की थी। इस स्थान पर अब सिद्धेश्वर नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। गोमती के तट पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने रामेश्वरम की स्थापना भी की थी।

पहली बार महर्षि दधीचि ने की थी परिक्रमा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सतयुग में क्रूर राक्षस वृत्तासुर था। वह देवताओं और ऋषियों को यज्ञ आदि करने में विघ्न डालता था। इस राक्षस के आतंक से परेशान होकर सभी देवताओं व ऋषियों ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की थी। तब भगवान नारायण ने बताया था कि जिस शस्त्र से व्रतासुर का वध हो सकता है वह शस्त्र महर्षि दधीचि के पास है, जिसे भगवान परशुराम तप के लिए जाते समय उन्हें दे गए थे। इस पर सभी ऋषि व देवतागण मिश्रिख के वन में निवास कर रहे महर्षि दधीचि के पास जाते हैं। दधीचि ऋषि बताते हैं कि उन शस्त्रों को तो मैं भगवान का प्रसाद समझकर घिसकर पी गया हूं, लेकिन उसका प्रभाव मेरी अस्थियों में आ चुका है।
तब देवता व ऋषिगण उनसे अस्थि दान करने के लिए निवेदन करते हैं। इस पर महर्षि दधीचि तैयार हो जाते हैं, पर इससे पहले सभी तीर्थों व देवों के दर्शन एवं परिक्रमा करने की शर्त रखते हैं। देवराज इंद्र के अनुरोध पर सभी तीर्थ व देवता आकर नैमिषारण्य तीर्थ के अंतर्गत 84 कोस की परिधि में विराजमान हो जाते हैं, लेकिन उस समय इंद्र के आमंत्रण पर प्रयागराज नहीं आते हैं, क्योंकि प्रयागराज सभी तीर्थों के राजा थे।
महर्षि दधीचि की शर्त पूरी करने के लिए पांच तीर्थों को मिलाकर पंच प्रयाग तीर्थ बनाया गया जो आज भी ललिता देवी मंदिर के पास विराजमान है। महर्षि दधीचि ने बड़ी संख्या में ऋषियों के साथ नैमिषारण्य तीर्थ में स्नान कर श्रीगणेश का पूजन करने के बाद तीर्थों व देवताओं की परिक्रमा प्रारंभ की। 15 दिवसीय परिक्रमा में सभी तीर्थों व देवताओं के दर्शन किए। परिक्रमा की समाप्ति पर अपने शरीर पर दही नमक लगाकर गायों से चटाकर अपनी अस्थियों का दान किया। उनकी अस्थियों से वज्र का निर्माण किया जाता है, जिससे देवराज इंद्र व्रतासुर का वध करते हैं। महर्षि दधीचि ने 84 कोस की परिधि में विराजमान सभी तीर्थों व देवताओं से जनकल्याण के लिए निवेदन किया था कि आप सभी अपने स्वरूप को यही छोड़कर जाएं, जिससे आने वाले समय में जब मनुष्य यह परिक्रमा करे तब उसको वही पुण्य प्राप्त हो जो आप सबके तीर्थों में जाने से मिलता है। महर्षि दधीचि के आग्रह पर सभी देवता व तीर्थ अपने-अपने अंश को 84 कोसी परिक्रमा की परिधि में छोड़कर चले जाते हैं। आज भी इस परिक्रमा के दौरान परिक्रमार्थियों को उन सभी तीर्थों व देवताओं के दर्शन प्राप्त होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed