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Sitapur News: नदी बनी बाधा तो खेत को ही बना दिया स्कूल
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 09 Apr 2026 01:08 AM IST
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कोचिंग में बच्चों को पढ़ाते रामू कुमार गौतम। संवाद
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सकरन। चौका नदी के कटान और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच हाजीपुर गांव के रामू कुमार गौतम बच्चों को साक्षर बनाने की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। ग्राम पंचायत अदवारी का मजरा हाजीपुर नदी के दूसरी तरफ बसा है, जहां पुल न होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
करीब 500 की आबादी वाले इस गांव में कोई विद्यालय नहीं है। शिक्षा के अभाव में बच्चे खेतों में काम करने को मजबूर थे। ग्रामीणों की इस पीड़ा को देखते हुए रामू ने साल 2024 में अपने खेत में तिरपाल डालकर निशुल्क कोचिंग सेंटर की शुरुआत की।
उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों को प्रेरित किया और बच्चों को मुफ्त शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराई। शुरुआत में कम छात्र थे, लेकिन रामू के संकल्प से आज कक्षा एक से पांच तक के 85 बच्चे यहां भविष्य संवार रहे हैं। रामू का लक्ष्य इन बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़कर गांव से अशिक्षा का अंधेरा मिटाना है।
तीन शिफ्टों में चल रही कोचिंग
रामू गौतम ने बताया कि वर्ष 2020 में स्नातक करने के बाद उन्होंने गांव के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का संकल्प लिया। वर्तमान में कोचिंग का संचालन तीन पालियों में किया जा रहा है। इस निस्वार्थ कार्य में उन्हें पारुल और गुड़िया का सहयोग मिल रहा है। कोचिंग में आने वाले सभी बच्चों को कॉपी, पेन और किताबें मुफ्त दी जाती हैं। रामू अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिजनों के निरंतर सहयोग को देते हैं।
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करीब 500 की आबादी वाले इस गांव में कोई विद्यालय नहीं है। शिक्षा के अभाव में बच्चे खेतों में काम करने को मजबूर थे। ग्रामीणों की इस पीड़ा को देखते हुए रामू ने साल 2024 में अपने खेत में तिरपाल डालकर निशुल्क कोचिंग सेंटर की शुरुआत की।
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उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों को प्रेरित किया और बच्चों को मुफ्त शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराई। शुरुआत में कम छात्र थे, लेकिन रामू के संकल्प से आज कक्षा एक से पांच तक के 85 बच्चे यहां भविष्य संवार रहे हैं। रामू का लक्ष्य इन बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़कर गांव से अशिक्षा का अंधेरा मिटाना है।
तीन शिफ्टों में चल रही कोचिंग
रामू गौतम ने बताया कि वर्ष 2020 में स्नातक करने के बाद उन्होंने गांव के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का संकल्प लिया। वर्तमान में कोचिंग का संचालन तीन पालियों में किया जा रहा है। इस निस्वार्थ कार्य में उन्हें पारुल और गुड़िया का सहयोग मिल रहा है। कोचिंग में आने वाले सभी बच्चों को कॉपी, पेन और किताबें मुफ्त दी जाती हैं। रामू अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिजनों के निरंतर सहयोग को देते हैं।