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Sonebhadra News: ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में 14 घंटे की अखंड योग भट्टी और मौन साधना
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रॉबर्ट्सगंज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में श्रद्धाजंलि देते बहनें और भाई। स
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रॉबर्ट्सगंज स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र विकासनगर में रविवार को आधुनिक युग के सांस्कृतिक उत्कर्ष के महानायक पिताश्री ब्रह्मा बाबा का अव्यक्त आरोहण दिवस मनाया गया। सेवाकेंद्र में 14 घंटे की अखंड योग भट्टी और मौन साधना की गई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि परमात्मा शिव के दिव्य साक्षात्कार के बाद ब्रह्मा बाबा ने अपने जीवन में अलौकिक आध्यात्मिक परिवर्तन को धारण कर संपूर्ण मानवता को नई राह दिखाई।
अपनी संपूर्ण चल-अचल संपत्ति ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित करते हुए उन्होंने वर्ष 1936 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थापना की और नारी सशक्तीकरण को केंद्र में रखा।
प्रतिष्ठान के सदस्यों की ओर से प्रारंभिक 14 वर्षों तक तपस्या करने के बाद संस्था सामाजिक क्षेत्र में उतरी। आज ब्रह्माकुमारीज विश्व के पांच महाद्वीपों के 140 से अधिक देशों में आध्यात्मिक सेवाओं के माध्यम से मानवता के दिव्यीकरण का अभियान चला रही है। विश्वशांति एवं मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से संस्थान को शांतिदूत पुरस्कार दिया जा चुका है।
18 जनवरी 1969 को ब्रह्मा बाबा ने नश्वर देह त्यागकर अव्यक्त रूप धारण किया था। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा को पुष्पांजलि अर्पित की तथा व्यक्तिगत जीवन में सनातन सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाकर स्वर्णिम, समृद्ध और सशक्त भारत निर्माण का संकल्प लिया। केंद्र संचालिका बीके सुमन ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
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कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि परमात्मा शिव के दिव्य साक्षात्कार के बाद ब्रह्मा बाबा ने अपने जीवन में अलौकिक आध्यात्मिक परिवर्तन को धारण कर संपूर्ण मानवता को नई राह दिखाई।
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अपनी संपूर्ण चल-अचल संपत्ति ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित करते हुए उन्होंने वर्ष 1936 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थापना की और नारी सशक्तीकरण को केंद्र में रखा।
प्रतिष्ठान के सदस्यों की ओर से प्रारंभिक 14 वर्षों तक तपस्या करने के बाद संस्था सामाजिक क्षेत्र में उतरी। आज ब्रह्माकुमारीज विश्व के पांच महाद्वीपों के 140 से अधिक देशों में आध्यात्मिक सेवाओं के माध्यम से मानवता के दिव्यीकरण का अभियान चला रही है। विश्वशांति एवं मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से संस्थान को शांतिदूत पुरस्कार दिया जा चुका है।
18 जनवरी 1969 को ब्रह्मा बाबा ने नश्वर देह त्यागकर अव्यक्त रूप धारण किया था। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा को पुष्पांजलि अर्पित की तथा व्यक्तिगत जीवन में सनातन सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाकर स्वर्णिम, समृद्ध और सशक्त भारत निर्माण का संकल्प लिया। केंद्र संचालिका बीके सुमन ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
