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Sonebhadra News: शिवालयों में लगी भक्तों की भीड़
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शिवद्वार उमा-माहेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए कांवरियों की लगी लंबी कतार। संवाद
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सोनभद्र/घोरावल। नाग पंचमी और सावन के सोमवार के दुर्लभ संयोग में महादेव के जलाभिषेक के लिए शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। घोरावल के शिवद्वार में रविवार की रात 12 बजे से कांवड़ियों की कतार लगी रही, जो सोमवार को पूरे दिन जारी रही। मंदिर प्रबंधन के मुताबिक तीसरे सोमवार पर कांवड़ियों सहित डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री उमा-महेश्वर के दर्शन और जलाभिषेक किए। जिले के अन्य मंदिराें में भी भक्तों का तांता लगा रहा। दर्शन-पूजन के साथ भक्तों ने रुद्राभिषेक सहित अन्य अनुष्ठान भी किए।
सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही के अलावा मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से कांवड़ियों का जत्था मिर्जापुर के बरियार घाट से गंगाजल लेकर रविवार की शाम तक ही शिवद्वार पहुंच गया था। आसपास डेरा डाले कांवड़िया रात 12 बजे से ही कतार में लगकर मंदिर के कपाट खुलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। हाथों में कांवड़ और जुबां पर ओम नम:शिवाय के उद्घोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया था। रात करीब एक बजे भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के अद्वितीय विग्रह का दिव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद मुख्य पुजारी सुरेश गिरि, अमरेश गिरि, सुभाष गिरि, अजय गिरि, शिवराज गिरि और विनय गिरि ने मंगला आरती कराई। मंदिर के कपाट खुलते ही अपने आराध्य भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर जलाभिषेक किया। सोमवार देर शाम तक दर्शन-पूजन और जलाभिषेक का क्रम चलता रहा। मुख्य पुजारी सुरेश गिरि ने बताया कि करीब एक लाख कांवड़ियों समेत करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने श्रीउमामहेश्वर का दर्शन-पूजन किया। उधर, रॉबर्ट्सगंज के बरेला महादेव, गौरीशंकर, रौंप स्थित पंचमुखी महादेव, वीरेश्वर महादेव, सोमनाथ मंदिर सहित अन्य शिवालयों में भी तीसरे सोमवार पर भक्तों की भारी भीड़ रही। इस दौरान मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े इंतजाम किए गए थे।
अधिकारियों ने संभाली व्यवस्था की कमान
घोरावल। डीएम चर्चित गौड़ और एसपी अभिषेक वर्मा ने सोमवार को शिवद्वार पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। आयोजन को सकुशल संपन्न कराने के लिए एसडीएम विशाल कुमार, तहसीलदार प्रवीण सिंह, नायब तहसीलदार विदित तिवारी, क्षेत्राधिकारी भुवनेश्वर सिंह, प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार सिंह, बीडीओ पंचायत रामचरण प्रसाद, ग्राम प्रधान सियाराम यादव सहित मंदिर प्रबंधन के लोग व्यवस्था में जुटे रहे। स्वास्थ्य विभाग की टीमें चिकित्सा व्यवस्था में, पंचायत विभाग साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था में तथा यातायात पुलिस और बिजली निगम के कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी संभालते रहे। पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के चलते भारी भीड़ के बावजूद आयोजन सकुशल संपन्न हुआ।
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जर्जर सड़कों ने बढ़ाई परेशानी
घोरावल। घोरावल से शिवद्वार और कोहरथा होते हुए शिवद्वार जाने वाले मार्ग पर कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही रही। सिंगल सड़क होने के कारण जाम की स्थिति भी बनी, हालांकि पुलिस प्रशासन के कुशल प्रबंधन से स्थिति नियंत्रित रही।
वहीं, प्रशासन के निर्देशों के बावजूद लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से जर्जर सड़कों ने कांवड़ियों की राह मुश्किल कर दी। खड़देउर-बेलन नदी से शिवद्वार धाम तक सड़क के एक हिस्से का ही लेपन कराया गया है, जबकि दूसरा हिस्सा अब भी बदहाल है। मिर्जापुर-घोरावल मार्ग पर जुड़िया गांव से भारतीय इंटर कॉलेज की गली और बिसरेखी गांव के पास सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील है। घोरावल-खुटहां बाईपास से शाहगंज तक की सड़क की हालत भी खराब है। कांवड़ यात्रा में शामिल राधेश्याम, महेश, दिलीप, शंकरपसाद, पूजा कुमारी अर्चना नीलम आदि ने बताया कि मिर्जापुर से शिवद्वार धाम तक करीब 70 किलोमीटर की यात्रा में लगभग 15 किलोमीटर सड़क जर्जर और गड्ढायुक्त है। इससे कांवड़ियों को पैदल यात्रा में काफी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों ने हर साल सामने आने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
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सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही के अलावा मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से कांवड़ियों का जत्था मिर्जापुर के बरियार घाट से गंगाजल लेकर रविवार की शाम तक ही शिवद्वार पहुंच गया था। आसपास डेरा डाले कांवड़िया रात 12 बजे से ही कतार में लगकर मंदिर के कपाट खुलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। हाथों में कांवड़ और जुबां पर ओम नम:शिवाय के उद्घोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया था। रात करीब एक बजे भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के अद्वितीय विग्रह का दिव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद मुख्य पुजारी सुरेश गिरि, अमरेश गिरि, सुभाष गिरि, अजय गिरि, शिवराज गिरि और विनय गिरि ने मंगला आरती कराई। मंदिर के कपाट खुलते ही अपने आराध्य भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर जलाभिषेक किया। सोमवार देर शाम तक दर्शन-पूजन और जलाभिषेक का क्रम चलता रहा। मुख्य पुजारी सुरेश गिरि ने बताया कि करीब एक लाख कांवड़ियों समेत करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने श्रीउमामहेश्वर का दर्शन-पूजन किया। उधर, रॉबर्ट्सगंज के बरेला महादेव, गौरीशंकर, रौंप स्थित पंचमुखी महादेव, वीरेश्वर महादेव, सोमनाथ मंदिर सहित अन्य शिवालयों में भी तीसरे सोमवार पर भक्तों की भारी भीड़ रही। इस दौरान मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े इंतजाम किए गए थे।
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अधिकारियों ने संभाली व्यवस्था की कमान
घोरावल। डीएम चर्चित गौड़ और एसपी अभिषेक वर्मा ने सोमवार को शिवद्वार पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। आयोजन को सकुशल संपन्न कराने के लिए एसडीएम विशाल कुमार, तहसीलदार प्रवीण सिंह, नायब तहसीलदार विदित तिवारी, क्षेत्राधिकारी भुवनेश्वर सिंह, प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार सिंह, बीडीओ पंचायत रामचरण प्रसाद, ग्राम प्रधान सियाराम यादव सहित मंदिर प्रबंधन के लोग व्यवस्था में जुटे रहे। स्वास्थ्य विभाग की टीमें चिकित्सा व्यवस्था में, पंचायत विभाग साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था में तथा यातायात पुलिस और बिजली निगम के कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी संभालते रहे। पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के चलते भारी भीड़ के बावजूद आयोजन सकुशल संपन्न हुआ।
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जर्जर सड़कों ने बढ़ाई परेशानी
घोरावल। घोरावल से शिवद्वार और कोहरथा होते हुए शिवद्वार जाने वाले मार्ग पर कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही रही। सिंगल सड़क होने के कारण जाम की स्थिति भी बनी, हालांकि पुलिस प्रशासन के कुशल प्रबंधन से स्थिति नियंत्रित रही।
वहीं, प्रशासन के निर्देशों के बावजूद लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से जर्जर सड़कों ने कांवड़ियों की राह मुश्किल कर दी। खड़देउर-बेलन नदी से शिवद्वार धाम तक सड़क के एक हिस्से का ही लेपन कराया गया है, जबकि दूसरा हिस्सा अब भी बदहाल है। मिर्जापुर-घोरावल मार्ग पर जुड़िया गांव से भारतीय इंटर कॉलेज की गली और बिसरेखी गांव के पास सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील है। घोरावल-खुटहां बाईपास से शाहगंज तक की सड़क की हालत भी खराब है। कांवड़ यात्रा में शामिल राधेश्याम, महेश, दिलीप, शंकरपसाद, पूजा कुमारी अर्चना नीलम आदि ने बताया कि मिर्जापुर से शिवद्वार धाम तक करीब 70 किलोमीटर की यात्रा में लगभग 15 किलोमीटर सड़क जर्जर और गड्ढायुक्त है। इससे कांवड़ियों को पैदल यात्रा में काफी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों ने हर साल सामने आने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।