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Sonebhadra News: अवर्षण के हालात ने बढ़ाई चिंता... 46 दिन में महज 88.5 मिमी बारिश, बांधों में लुढ़का जलस्तर

Fri, 17 Jul 2026 11:10 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 11:10 PM IST
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Drought-like conditions raise concern... merely 88.5 mm of rainfall in 46 days; water levels in dams have dropped.
रॉबर्ट्सगंज नगर में शुक्रवार को कुछ देर की बारिश से ही फ्लाईओवर के नीचे सर्विस लेन पर धर्मशाला 
खेतों में नर्सरी तैयार, पिछले वर्ष के मुकाबले एक चौथाई से भी कम बरसात के कारण नहीं हो पा रही रोपाई, किसानों में बढ़ी बेचैनी
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कृषि महकमे ने की कम पानी वाली फसलों को तरजीह देने की अपील, दलहन व श्रीअन्न की खेती को बताया जा रहा फायदेमंद
जिले में अवर्षण जैसी स्थिति ने किसानों की बेचैनी बढ़ा दी है। जुलाई के भी 17 दिन बीत गए हैं। खेतों में नर्सरी तैयार होने के बावजूद अच्छी बारिश न होने से रोपाई संभव नहीं हो पा रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले अब तक एक चौथाई से भी कम बारिश रिकाॅर्ड की गई है। 46 दिनों में महज 88.5 बारिश होने से खेती-किसान से जुड़े लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। बांधों में भी जलस्तर लुढ़का हुआ है। यूपी-एमपी के एक बड़े हिस्से के साथ ही बिहार की लाइफ लाइन मानी जाने वाली सोन नदी में भी जलस्तर चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है। बारिश न होने के चलते उसमें भी गिरावट का क्रम जारी है।
जिले में इस बार सीजन की शुरुआत से ही सूखे जैसी स्थिति बनी हुई। जून माह में जहां सामान्य तौर पर 104.50 मिमी बारिश होनी चाहिए वहां महज 22 मिमी बारिश ही दर्ज हो सकी है। जुलाई माह में सामान्य वर्षा का मानक 334 मिमी है लेकिन 16 जुलाई (17 जुलाई की सुबह आठ बजे तक) तक महज 66.5 मिमी बरसात हो पाई है। जबकि पिछले वर्ष जून माह में 184.50 मिमी बारिश हुई थी और जुलाई में 17 जुलाई की सुबह आठ बजे तक का आंकड़ा 219 मिमी था। महज 46 दिन के भीतर पिछले वर्ष 403.5 मिमी बरसात हुई थी। इस बार यह आंकड़ा महज 88.5 मिमी पहुंच पाया है।
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इस बार के मानसून पर अल नीलो को खासा असर है। आगे भी अच्छे बारिश के संकेत नहीं हैं। इसलिए जहां सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं। वहां भी कम समय में तैयार होने वाले धान की रोपाई ही फायदेमंद रहेगी। पर्याप्त बारिश न होने के कारण नुकसान से बचने के लिए दलहन (अरहर, तिल, उड़द) व मिलेट्स (श्री अन्न) की खेती करना ज्यादा अच्छा होगा। - वीरेंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
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