सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज के नगरीय इलाकों में जमीन के रेट बढ़ने वाले हैं। एक अगस्त से लागू हो रहे नए सर्किल रेट में नगर और उससे सटे इलाकों में 8-12 फीसदी तक मूल्यवृद्धि का प्रस्ताव है। उन क्षेत्रों पर ज्यादा असर है, जो मुख्य मार्ग या उससे सटे हुए हैं। करीब पौने दो साल बाद सर्किल रेट में होने वाली वृद्धि सभी तरह की संपत्तियों के सौदे पर लागू होगी। हालांकि प्रशासन का दावा है कि नए सर्किल रेट अभी भी बाजार मूल्य की अपेक्षा कम ही हैं। भूमि, मकान सहित अन्य संपत्ति की दरों को नियंत्रित रखने के लिए जिला स्तर पर मूल्यांकन कर उसकी सरकारी दर (सर्किल रेट) तय की जाती है। इसी आधार पर उस क्षेत्र में किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री के लिए स्टांप शुल्क जमा किया जाता है। पिछली बार एक दिसंबर 2024 को सर्किल रेट में बदलाव किया गया था। अब करीब 20 महीने बाद फिर से इसमें बदलाव की तैयारी है। सभी तहसीलों में पिछले सत्र में हुई खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड के आधार पर सर्किल रेट में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ज्यादातर स्थानों पर सर्किल रेट में 5-10 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। नगरीय इलाकों में यह वृद्धि 8 से 12 प्रतिशत तक है। नई दरों में नगर व आसपास के क्षेत्रों में भूमि की दरों में सर्वाधिक वृद्धि हुई है। भूमि की न्यूनतम दर प्रति हेक्टेयर या प्रतिवर्ग मीटर और गैर-वाणिज्यिक भवन की न्यूनतम निर्माण की दर निर्धारित की गई है। सर्किल रेट बढ़ने के बाद खरीदारों को स्टांप शुल्क भी अधिक देना होगा। ऐसे में उन्हें जमीन का सौदा महंगा पड़ सकता है। इसका असर उनके बजट पर भी पड़ना तय है। सर्किल रेट में सबसे ज्यादा वृद्धि की संभावना रॉबर्ट्सगंज नगर व उसके आसपास के क्षेत्रों में ही है। चुर्क रोड, घोरावल रोड, पन्नूगंज रोड, मधुपुर रोड पर स्थित भूमि के दाम बढ़ने तय हैं। इसके अलावा नगरीय क्षेत्र के आसपास विकसित हो रहीं नई कॉलोनियों वाले मोहल्ले में भी दाम बढ़ेंगे। अभी इन क्षेत्रों में खेती का रकबा अधिक था। अब प्लाटिंग के बाद आवासीय कॉलोनियां तेजी से बढ़ रही हैं। सहिजन कलां, खुर्द, रौंप, लोढ़ी, छपका, बिजपई, सजौर, कम्हारी, गुरमा, बढ़ौली, गोरडीहा आदि गांवों में जमीन खरीदना महंगा हो सकता है।