रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के अखाड़ा मोहाल स्थित एक निजी अस्पताल में पेट दर्द के उपचार के दौरान हुई 27 वर्षीय रुक्मिणी की मौत का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने अस्पताल प्रबंधन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। करमा थाना क्षेत्र के बसवां (सिरखोरा) निवासी रुक्मिणी को पांच मई को पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन सुबह उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा करते हुए उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया था। मृतका के पति जितेंद्र पटेल का आरोप था कि अस्पताल पहुंचने के समय रुक्मिणी की हालत सामान्य थी, लेकिन एक सहायक द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और मौत हो गई। चचेरे ससुर जयसिंह पटेल ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे। वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से डॉ. राहुल के हवाले से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में कहा गया था कि रुक्मिणी निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) से पीड़ित थी और छह मई की भोर तीन बजे कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट के कारण उसकी मृत्यु हुई। प्रमाण पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि उसे बचाने के लिए पांच मिनट तक सीपीआर और आवश्यक दवाएं दी गईं, लेकिन सफलता नहीं मिली। घटना के बाद कुछ दिनों तक मामला शांत रहा, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच को नई दिशा मिल गई है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में मृतका के फेफड़ों में पानी नहीं पाया गया, जबकि मौत के कारणों को लेकर अस्पताल की ओर से अलग दावा किया गया था। इसके अलावा पोस्टमार्टम में अनुमानित मृत्यु का समय भी अस्पताल द्वारा जारी प्रमाण पत्र में दर्ज समय से मेल नहीं खा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार मौत सुबह करीब पांच से छह बजे के बीच होने की संभावना जताई गई है, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र में समय भोर तीन बजे दर्ज है। एसीएमओ एवं नोडल पंजीयन अधिकारी डॉ. जीएस यादव ने बताया कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। अभी तक पीड़ित पक्ष की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।