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Sonebhadra News: सामाजिक संस्थाएं भी गोशालाएं कर सकती हैं संचालित

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 02:15 AM IST
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Social organizations can also run cow shelters.
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सोनभद्र। बेसहारा और निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत अब पंजीकृत सामाजिक संस्थान, एनजीओ, ट्रस्ट और गौ-सेवा समितियां भी गोशाला का संचालन कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति लेकर निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। गोशाला संचालित करने वाली संस्थाओं को शासन की तरफ से मिलने वाला अनुदान भी दिया जाएगा।
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आकांक्षी जिला सोनभद्र में घोरावल नगर, घोरावल ब्लॉक के केवली, चोपन ब्लॉक के चोपन गांव तथा नगवां ब्लॉक के मऊ खुर्द गांव में स्थायी गोशालाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं रॉबर्ट्सगंज नगर के साथ ही घोरावल ब्लॉक के भैसवार, चोपन ब्लॉक के बिल्ली मारकुंडी गांव, रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के नई गांव में अस्थायी गोशाला का संचालन किया जा रहा है। इन गोशालाओं में इस समय करीब 2678 पशु हैं। लगभग सभी गोशालाओं में क्षमता से अधिक पशु रखे गए हैं। इसके मद्देनजर तीन नए स्थाई गोशाला के निर्माण के लिए जिला प्रशासन की तरफ से जमीन चिह्नित की जा रही है। जबकि दुद्धी ब्लॉक के रजखड़ में एक वृहद गोशाला बनकर तैयार है, इसके संचालन की तैयारी चल रही है। जिले में अभी जो गोशाला संचालित हो रही है, उनके संचालन की जिम्मेदारी नगर निकाय या फिर सरकारी संस्थानाें के पास है। ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित गोशाला में पशुओं की देखभाल अच्छे ढंग से नहीं हो पाता है। ऐसे में ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित गोशालाओं का संचालन शासन की तरफ से सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कराए जाने पर जोर दिया जा रहा है। बीते 20 जनवरी को पशुपालन विभाग के अधिकारियों की बैठक में इस संबंध में दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में पशुपालन विभाग की तरफ से भी गोशाला संचालन के लिए सामाजिक संस्थाओं को आगे आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी से व्यवस्था और मजबूत होगी।
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जिले में खुलेंगी तीन नई गोशालाएं
पशुपालन विभाग की तरफ से पशुओं के संरक्षण के लिए जिले में तीन नई गोशाला खोली जाएंगें। इसके लिए जमीन की तलाश हो रही है। रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के हिन्दुआरी और सलखन गांव में तथा घोरावल ब्लॉक के ओबराडीह गांव में स्थायी गोशाला निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। हिन्दुआरी और सलखन गांव में जमीन चिह्नित कर ली गई है, जबकि घोरावल क्षेत्र में जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया अभी चल रही है। स्थायी गोशाला निर्माण होने के बाद अस्थायी रूप से संचालित हो रहे गोशालाओं को धीरे-धीरे कर बंद करने की तैयारी है। जो प्रधान ग्राम पंचायत स्तर पर गोशाला नहीं चला पा रहे हैं, उनके स्थान पर सामाजिक संस्थाओं को गोशाला संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी।
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प्रति गोवंश मिलता है 50 रुपये
गोशाला में आश्रित एक गोवंश के चारा एवं देखभाल के लिए 50 रुपये प्रति दिन के हिसाब से सरकार देती है। इसके साथ ही जो पशुपालक गोशाला से पशु ले जाते हैं, उसकी देखभाल के लिए भी 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है।
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वर्जन:
गोशाला का संचालन अब सामाजिक संस्थाएं भी कर सकती हैं। इसके लिए शासन की तरफ से पहल शुरू की गई है। जिले स्तर पर गोशाला संचालन के लिए इच्छुक सामाजिक संस्थाएं आगे आ सकती हैं। अभी जिले में संचालित सभी गोशालाओं का संचालन सरकारी संस्थाओं के माध्यम से कराई जा रही है। - डॉ.एके मिश्रा, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी।
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