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Unnao News: केंद्र सरकार के पैकेज से राहत, निर्यात में अब भी आफत
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फोटो नंबर-8-यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष चर्म निर्यात परिषद
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उन्नाव। ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच चल रहे युद्ध से पूरा खाड़ी क्षेत्र प्रभावित है। हवाई और समुद्री यातायात भी प्रभावित है। इसका उन्नाव के चमड़ा उद्योग और निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से दिए गए 497 करोड़ के पैकेज से उद्यमी राहत महसूस कर रहे हैं।
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष यादवेंद्र सचान ने बताया कि केंद्र सरकार के पैकेज से इतना राहत होगी कि बिना आपूर्ति रास्ते से लौटने वाले माल का अतिरिक्त भाड़ा उद्यमियों को नहीं देना होगा। साथ ही अतिरिक्त बीमा और शिपिंग चार्ज से भी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि उन्नाव-कानपुर का चमड़ा निर्यात का 60 फीसदी व्यापार प्रभावित है। आने वाले दिनों क्या हालात होंगे, इस पर भी असमंजस है। खाड़ी देशों के रास्ते यूरोपीय देशों में माल की आपूर्ति में भारी दिक्कतें आ रही हैं। बताया कि परिवहन लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। यूरोपीय देशों में माल पहुंचाने का किराया जो पहले 1100 से 1200 डॉलर था, अब 3500 डॉलर तक पहुंच गया है। राहत पैकेज से पानी के उन जहाजों का किराया नहीं देना पड़ेगा जो माल पहुंचाने में असफल होकर लौट रहे हैं। इसके अतिरिक्त सरकार जोखिम कवरेज प्रदान करेगी। परिवहन संबंधी अनिश्चितताओं के कारण व्यापार अंधेरे में है। उत्पादों की लागत और डिलीवरी का समय तय करना मुश्किल हो रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े रसायनों की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे माल की लागत निर्धारित करना और भी कठिन हो गया है।
व्यापार पर गहराता जा रहा संकट
चर्म निर्यात परिषद के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष असद कमाल इराकी ने बताया कि खाड़ी देशों के रास्ते यूरोपीय देशों में माल की आपूर्ति में कई बाधाएं आ रही हैं। माल की सप्लाई नहीं हो पा रही है जिससे निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है। चमड़ा उत्पादों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इनकी तैयारी एक लंबी प्रक्रिया है। ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
उत्पाद की डील में भी मुश्किल
व्यापारियों के अनुसार यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि उत्पादों की डील किस रेट में दी जाए। एक तरफ दूसरे देशों से प्रतिस्पर्धा है, दूसरी तरफ यह तमाम मुश्किलें। समझ नहीं पा रहे कि उत्पाद कितनी लागत में तैयार होंगे क्योंकि चमड़ा बनाने से लेकर उत्पाद तैयार करने तक की प्रक्रिया में महीनों का समय लगता है। इससे माल डिलीवरी के दिनों का वादा करना भी कठिन है।
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चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष यादवेंद्र सचान ने बताया कि केंद्र सरकार के पैकेज से इतना राहत होगी कि बिना आपूर्ति रास्ते से लौटने वाले माल का अतिरिक्त भाड़ा उद्यमियों को नहीं देना होगा। साथ ही अतिरिक्त बीमा और शिपिंग चार्ज से भी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि उन्नाव-कानपुर का चमड़ा निर्यात का 60 फीसदी व्यापार प्रभावित है। आने वाले दिनों क्या हालात होंगे, इस पर भी असमंजस है। खाड़ी देशों के रास्ते यूरोपीय देशों में माल की आपूर्ति में भारी दिक्कतें आ रही हैं। बताया कि परिवहन लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। यूरोपीय देशों में माल पहुंचाने का किराया जो पहले 1100 से 1200 डॉलर था, अब 3500 डॉलर तक पहुंच गया है। राहत पैकेज से पानी के उन जहाजों का किराया नहीं देना पड़ेगा जो माल पहुंचाने में असफल होकर लौट रहे हैं। इसके अतिरिक्त सरकार जोखिम कवरेज प्रदान करेगी। परिवहन संबंधी अनिश्चितताओं के कारण व्यापार अंधेरे में है। उत्पादों की लागत और डिलीवरी का समय तय करना मुश्किल हो रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े रसायनों की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे माल की लागत निर्धारित करना और भी कठिन हो गया है।
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व्यापार पर गहराता जा रहा संकट
चर्म निर्यात परिषद के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष असद कमाल इराकी ने बताया कि खाड़ी देशों के रास्ते यूरोपीय देशों में माल की आपूर्ति में कई बाधाएं आ रही हैं। माल की सप्लाई नहीं हो पा रही है जिससे निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है। चमड़ा उत्पादों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इनकी तैयारी एक लंबी प्रक्रिया है। ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
उत्पाद की डील में भी मुश्किल
व्यापारियों के अनुसार यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि उत्पादों की डील किस रेट में दी जाए। एक तरफ दूसरे देशों से प्रतिस्पर्धा है, दूसरी तरफ यह तमाम मुश्किलें। समझ नहीं पा रहे कि उत्पाद कितनी लागत में तैयार होंगे क्योंकि चमड़ा बनाने से लेकर उत्पाद तैयार करने तक की प्रक्रिया में महीनों का समय लगता है। इससे माल डिलीवरी के दिनों का वादा करना भी कठिन है।

फोटो नंबर-8-यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष चर्म निर्यात परिषद