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Unnao News: कल्याण के इंतजार में कल्याणी नदी
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फोटो-21-फतेहपुर चौरासी कस्बे से निकली नदी में उगी जलकुंभी। संवाद
- फोटो : 1
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उन्नाव। जलशक्ति मंत्री के फावड़ा चलाने के बाद भी कल्याणी नदी का कल्याण नहीं हो सका है। नदी के पुनरुद्धार के लिए पोकलैंड से गहरी खोदाई की जरूरत को देखते हुए शासन को भेजे 35 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई है। ऐसे में मनरेगा से जितना कार्य पूर्व में हुआ भी था वह बेकार हो गया है। नदी में घास उग आई है और फिर से कब्जा होने लगा है।
हरदोई के माधौगंज से निकलने वाली कल्याणी नदी गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में एक है। जिले के गंजमुरादाबाद, बांगरमऊ, फतेहपुर चौरासी, सफीपुर व सिकंदरपुर सरोसी ब्लाॅक के लगभग 32 गांवों से कल्याणी नदी निकली है। पड़ोसी जिले हरदोई और उन्नाव के कई गांवों के लिए कभी जीवनदायिनी रही कल्याणी नदी अवैध कब्जे और खनन से विलुप्त हो गई। वर्ष 2022 में नदी के पुनरुद्धार की कवायद शुरू हुई थी।
तत्कालीन सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने नदी का सर्वे कराया था। फिर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई थी। सीडीओ के प्रयास से 16 जून 2022 को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने बांगरमऊ के ततियापुर गांव में कल्याणी नदी का पूजन और फावड़ा चलाकर पुनरुद्धार कार्य का शुभारंभ किया था। वादा किया था कि नदी जल्द अपने पुराने रूप में लौटेगी।
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उस समय सीडीओ ने नदी का जीर्णोद्धार तीन चरणों में पूरा करने की बात कही थी। पहले दो चरणों में 24-24 किलोमीटर और तीसरे चरण में 20 किलोमीटर तक काम होना था। पहले चरण का काम तीन महीने में पूरा होने से पहले ही बारिश शुरू हो गई थी जिससे काम ठप हो गया था। जब बारिश थमी तो सीडीओ का तबादला हो गया था। नए सीडीओ ऋषिराज ने कार्यभार संभाला तो फिर से नदी के पुनरुद्धार की कवायद शुरू हुई थी। इसी बीच 2023 में निकाय व 2024 में लोकसभा चुनाव का पेच फंस गया और नदी को पुराने स्वरूप में लौटाने की कवायद फिर ठंडे बस्ते में चली गई। निकाय चुनाव के बाद फिर बारिश से काम शुरू नहीं हो सका। इसी बीच फिर सीडीओ का तबादला हो गया। इसके चलते नदी को पुराना स्वरूप देने का काम अधर में लटक गया।
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बीते साल फिर पुनरुद्धार की शुरू हुई थी कवायद
पिछले साल फरवरी में तत्कालीन डीएम गौरांग राठी ने मनरेगा, निजी संस्थाओं के सहयोग व शासन से बजट के जरिए नदी के पुनरुद्धार की कवायद शुरू की थी। तीन स्तर की कार्ययोजना तैयार हुई थी। पहली कार्ययोजना में मनरेगा से नदी से संपर्क वाले नालों व तालाबों की साफ सफाई और दूसरे स्तर पर पौधरोपण कराने के लिए करीब 9.89 करोड़ का प्रस्ताव तैयार हुआ था। इस पर काम भी शुरू कराया गया था लेकिन बीच में केंद्र सरकार से मजदूरी जारी न होने से मजदूरों से काम करने से इन्कार कर दिया था। जब अप्रैल 2025 में मजदूरी मिली तो गर्मी बढ़ गई थी जिससे मनरेगा कार्य पूरे नहीं हो सके थे और न ही पौधरोपण हो पाया था।
तीसरे स्तर पर नदी को पुराने स्वरूप में वापस लाने के लिए पोकलैंड मशीनों से गहरी खोदाई कराने की सहमति बनी थी। इसके लिए लगभग 35 करोड़ की डीपीआर तैयार हुई। जून 2025 में प्रशासन ने डीपीआर को शासन को भेजा था। हालांकि साल भर होने वाला है लेकिन अभी तक न स्वीकृति मिली है और न ही बजट जारी हुआ है। ऐसे में नदी के जीर्णोद्धार कार्य भी रुके हैं।
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कल्याणी नदी पर नजर
- जिले में लंबाई 68 किलोमीटर
- हरदोई से जिले के गंजमुरादाबाद ब्लाक के लोनारी गांव से जिले में प्रवेश
- गंजमुरादाबाद, बांगरमऊ, सफीपुर, फतेहपुर चौरासी से होकर सरोसी के देवीपुरवा के पास गंगा में मिलती है।
वर्जन....
कल्याणी नदी के पुनरुद्धार योजना में मनरेगा से कुछ कार्य कराने की जानकारी है। हालांकि कभी बारिश तो कभी चुनाव आदि के चलते कार्य पूरे नहीं हो पाए। गहरी खोदाई के लिए भेजे गए 35 करोड़ के प्रस्ताव को शासन से अभी मंजूरी नहीं मिली है। इसी कारण नदी का पुनरुद्धार नहीं हो पा रहा है। जिलाधिकारी के माध्यम से जल्द ही शासन को फिर से रिमाइंडर भिजवाया जाएगा। -मुकेश कुमार, मनरेगा उपायुक्त।
हरदोई के माधौगंज से निकलने वाली कल्याणी नदी गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में एक है। जिले के गंजमुरादाबाद, बांगरमऊ, फतेहपुर चौरासी, सफीपुर व सिकंदरपुर सरोसी ब्लाॅक के लगभग 32 गांवों से कल्याणी नदी निकली है। पड़ोसी जिले हरदोई और उन्नाव के कई गांवों के लिए कभी जीवनदायिनी रही कल्याणी नदी अवैध कब्जे और खनन से विलुप्त हो गई। वर्ष 2022 में नदी के पुनरुद्धार की कवायद शुरू हुई थी।
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तत्कालीन सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने नदी का सर्वे कराया था। फिर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई थी। सीडीओ के प्रयास से 16 जून 2022 को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने बांगरमऊ के ततियापुर गांव में कल्याणी नदी का पूजन और फावड़ा चलाकर पुनरुद्धार कार्य का शुभारंभ किया था। वादा किया था कि नदी जल्द अपने पुराने रूप में लौटेगी।
उस समय सीडीओ ने नदी का जीर्णोद्धार तीन चरणों में पूरा करने की बात कही थी। पहले दो चरणों में 24-24 किलोमीटर और तीसरे चरण में 20 किलोमीटर तक काम होना था। पहले चरण का काम तीन महीने में पूरा होने से पहले ही बारिश शुरू हो गई थी जिससे काम ठप हो गया था। जब बारिश थमी तो सीडीओ का तबादला हो गया था। नए सीडीओ ऋषिराज ने कार्यभार संभाला तो फिर से नदी के पुनरुद्धार की कवायद शुरू हुई थी। इसी बीच 2023 में निकाय व 2024 में लोकसभा चुनाव का पेच फंस गया और नदी को पुराने स्वरूप में लौटाने की कवायद फिर ठंडे बस्ते में चली गई। निकाय चुनाव के बाद फिर बारिश से काम शुरू नहीं हो सका। इसी बीच फिर सीडीओ का तबादला हो गया। इसके चलते नदी को पुराना स्वरूप देने का काम अधर में लटक गया।
बीते साल फिर पुनरुद्धार की शुरू हुई थी कवायद
पिछले साल फरवरी में तत्कालीन डीएम गौरांग राठी ने मनरेगा, निजी संस्थाओं के सहयोग व शासन से बजट के जरिए नदी के पुनरुद्धार की कवायद शुरू की थी। तीन स्तर की कार्ययोजना तैयार हुई थी। पहली कार्ययोजना में मनरेगा से नदी से संपर्क वाले नालों व तालाबों की साफ सफाई और दूसरे स्तर पर पौधरोपण कराने के लिए करीब 9.89 करोड़ का प्रस्ताव तैयार हुआ था। इस पर काम भी शुरू कराया गया था लेकिन बीच में केंद्र सरकार से मजदूरी जारी न होने से मजदूरों से काम करने से इन्कार कर दिया था। जब अप्रैल 2025 में मजदूरी मिली तो गर्मी बढ़ गई थी जिससे मनरेगा कार्य पूरे नहीं हो सके थे और न ही पौधरोपण हो पाया था।
तीसरे स्तर पर नदी को पुराने स्वरूप में वापस लाने के लिए पोकलैंड मशीनों से गहरी खोदाई कराने की सहमति बनी थी। इसके लिए लगभग 35 करोड़ की डीपीआर तैयार हुई। जून 2025 में प्रशासन ने डीपीआर को शासन को भेजा था। हालांकि साल भर होने वाला है लेकिन अभी तक न स्वीकृति मिली है और न ही बजट जारी हुआ है। ऐसे में नदी के जीर्णोद्धार कार्य भी रुके हैं।
कल्याणी नदी पर नजर
- जिले में लंबाई 68 किलोमीटर
- हरदोई से जिले के गंजमुरादाबाद ब्लाक के लोनारी गांव से जिले में प्रवेश
- गंजमुरादाबाद, बांगरमऊ, सफीपुर, फतेहपुर चौरासी से होकर सरोसी के देवीपुरवा के पास गंगा में मिलती है।
वर्जन....
कल्याणी नदी के पुनरुद्धार योजना में मनरेगा से कुछ कार्य कराने की जानकारी है। हालांकि कभी बारिश तो कभी चुनाव आदि के चलते कार्य पूरे नहीं हो पाए। गहरी खोदाई के लिए भेजे गए 35 करोड़ के प्रस्ताव को शासन से अभी मंजूरी नहीं मिली है। इसी कारण नदी का पुनरुद्धार नहीं हो पा रहा है। जिलाधिकारी के माध्यम से जल्द ही शासन को फिर से रिमाइंडर भिजवाया जाएगा। -मुकेश कुमार, मनरेगा उपायुक्त।

फोटो-21-फतेहपुर चौरासी कस्बे से निकली नदी में उगी जलकुंभी। संवाद- फोटो : 1

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