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Unnao News: ट्रैक्टर चालक की हत्या में दो को उम्रकैद
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उन्नाव। हत्या के करीब 22 साल पुराने मामले में न्यायाधीश ममता सिंह ने दो दोषियों भूरे और सरवन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 1.33 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में नामजद दो अन्य आरोपी मुकदमे के दौरान ही मौत का शिकार हो चुके हैं। सोहरामऊ थाना क्षेत्र के बरहा गांव के रहने वाले बृजेंद्र सिंह लखनऊ के हरिनाम सिंह का ट्रैक्टर चलाते थे। 6 अक्टूबर 2003 की रात दो अज्ञात युवक बृजेंद्र के घर पहुंचे और लकड़ी लदवाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली किराये पर मांगी। ट्रैक्टर मालिक हरिनाम के पूछने पर एक युवक ने अपना नाम राजेश बताया। विश्वास में आकर बृजेंद्र उनके साथ ट्रैक्टर लेकर चला गया। इसके बाद न तो बृजेंद्र लौटे और न ही ट्रैक्टर मिला।
परिजनों ने तलाश की। तीन-चार दिनों बाद भी कोई सूचना न मिलने पर पुलिस को तहरीर दी गई। 10 अक्टूबर को सफीपुर-मियागंज मार्ग पर तालाब किनारे लावारिश ट्रॉली मिली।
27 अक्टूबर 2003 को ट्रैक्टर मालिक हरिनाम ने हसनगंज बाजार में उन्हीं चार संदिग्ध युवकों को देखा जो ट्रैक्टर किराये पर लेने आए थे। उन्हें देखते ही वे भाग निकले। हरिनाम की सूचना पर पुलिस हरकत में आई। 30 अक्टूबर 2003 को, मोहान-मलिहाबाद मार्ग पर पुलिस ने चारों आरोपियों को उसी ट्रैक्टर से जाते हुए देखा। रोकने पर कूदकर भागने लगे लेकिन पुलिस ने आसीवन के बीरूगढ़ी निवासी भूरे और हसनगंज के हसेवा गांव निवासी रमाकांत को पकड़ लिया। पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया कि साथी सरवन और कल्लू के साथ मिलकर ट्रैक्टर-ट्रॉली लूटी और चालक बृजेंद्र की हत्या कर शव तालाब में फेंक दिया था। पुलिस ने चारों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।
मंगलवार को मामले की अंतिम सुनवाई हुई। न्यायाधीश ममता सिंह ने भूरे और सरवन को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, दोनों पर 1.33 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले में आरोपी रामाकांत और कल्लू की मुकदमे के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है।
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परिजनों ने तलाश की। तीन-चार दिनों बाद भी कोई सूचना न मिलने पर पुलिस को तहरीर दी गई। 10 अक्टूबर को सफीपुर-मियागंज मार्ग पर तालाब किनारे लावारिश ट्रॉली मिली।
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27 अक्टूबर 2003 को ट्रैक्टर मालिक हरिनाम ने हसनगंज बाजार में उन्हीं चार संदिग्ध युवकों को देखा जो ट्रैक्टर किराये पर लेने आए थे। उन्हें देखते ही वे भाग निकले। हरिनाम की सूचना पर पुलिस हरकत में आई। 30 अक्टूबर 2003 को, मोहान-मलिहाबाद मार्ग पर पुलिस ने चारों आरोपियों को उसी ट्रैक्टर से जाते हुए देखा। रोकने पर कूदकर भागने लगे लेकिन पुलिस ने आसीवन के बीरूगढ़ी निवासी भूरे और हसनगंज के हसेवा गांव निवासी रमाकांत को पकड़ लिया। पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया कि साथी सरवन और कल्लू के साथ मिलकर ट्रैक्टर-ट्रॉली लूटी और चालक बृजेंद्र की हत्या कर शव तालाब में फेंक दिया था। पुलिस ने चारों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।
मंगलवार को मामले की अंतिम सुनवाई हुई। न्यायाधीश ममता सिंह ने भूरे और सरवन को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, दोनों पर 1.33 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले में आरोपी रामाकांत और कल्लू की मुकदमे के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है।
