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Unnao News: पुरवा सीएचसी में 18 लाख के गबन का आरोप, जांच लटकी

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:16 AM IST
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फोटो-12- पुरवा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
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पुरवा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आयुष्मान भारत योजना के तहत क्लेम किए गए 18 लाख रुपये के गबन का आरोप लगा है। इस मामले की जांच के लिए सीएमओ की ओर से गठित टीम को 28 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन जांच प्रक्रिया में देरी करते हुए टीम ने 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि मामला ठंडे बस्ते में चला जाए।
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कटरा मोहल्ला, पुरवा निवासी शुभम कुमार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए सीएचसी को आयुष्मान योजना के तहत प्राप्त 18 लाख रुपये के क्लेम में अनियमितता की शिकायत की थी। यह राशि मरीजों के उपचार के लिए जारी की गई थी जिसमें से 75 फीसदी राशि रोगी कल्याण समिति और 25 फीसदी राशि स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहन के रूप में मिलनी चाहिए थी। आरोप है कि तत्कालीन सीएचसी प्रभारी डॉ. दिनेश कुमार ने 25 फीसदी धनराशि का कथित तौर पर फर्जीवाड़े से अपने करीबियों के बैंक खातों में स्थानांतरण कर दिया, जबकि यह राशि स्वास्थ्य कर्मियों के लिए थी।
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मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रभारी सीएमओ डॉ. एचएन प्रसाद ने 24 जनवरी को एसीएमओ व आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी डॉ. जेआर सिंह के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी को 28 जनवरी तक जांच पूरी कर रिपोर्ट सीएमओ को देनी थी। हालांकि टीम ने जांच के लिए 15 दिन का और समय मांगा है जिससे शिकायतकर्ता की चिंताएं बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जांच में देरी से स्वास्थ्य अधिकारी मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।


समिति सदस्यों को नहीं मामले की जानकारी
इस मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है कि रोगी कल्याण समिति के सदस्यों को इस राशि के वितरण या संबंधित समिति की बैठकों की जानकारी ही नहीं है। समिति में डॉ. तपन, एक फार्मासिस्ट और एक स्टाफ नर्स को शामिल किया गया था लेकिन उन्हें सदस्यता के बारे में भी पता नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब पुरवा सीएचसी में ऐसे आरोप लगे हैं। इससे पहले, 13 नवंबर को मोहल्ला दुर्गापुर निवासी राहुल की पत्नी मोनी की मृत्यु के मामले में भी नर्स नीलम और डॉ. आदर्श सचान पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगा था। आरोप था कि डॉक्टर को ऑनलाइन और नकद भुगतान के बावजूद लापरवाही बरती गई जिससे महिला की मौत हो गई। उस मामले में भी जांच टीम गठित की गई थी लेकिन कुछ समय बाद वह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया।

वर्जन...
मामले की जांच बंद नहीं है। तीन सदस्यीय टीम जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट में अगर फर्जी तरीके से धनराशि का प्रयोग किया गया है, तो कार्रवाई की जाएगी। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। -डॉ.एचएन प्रसाद, प्रभारी सीएमओ
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