फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   82-year-old Chudamani pursuing PhD at IIT while 90-year-old student scored 90% marks in MA at Varanasi

हौसला: 82 की चूड़ामणि आईआईटी से कर रहीं पीएचडी, 90 साल के छात्र को एमए में 90% मार्क्स; पढ़ें- इनकी खास कहानी

Wed, 30 Sep 2026 12:08 PM IST
Pragati Chand हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 30 Sep 2026 12:08 PM IST
सार

काशी के बुजुर्गों का हौसला ऐसा कि 82 वर्ष की चूड़ामणि आईआईटी से पीएचडी कर रहीं हैं। वहीं 90 साल के अमलधारी को एमए में 90% मार्क्स मिले। वहीं पढ़ते रहने की आदत आरके मौर्य की भूलने की बीमारी को दूर कर रही है। 

विज्ञापन
82-year-old Chudamani pursuing PhD at IIT while 90-year-old student scored 90% marks in MA at Varanasi
काशी के बुजुर्गों का हौसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुढ़ापे के साथ घटने वाले मेमोरी पॉवर और रीडिंग हैबिट को काशी के बुजुर्गों ने चैलेंज दिया है। 90 साल की उम्र में एमए पहले सेमेस्टर में 90 प्रतिशत अंक लाने वाले डॉ. अमलधारी सिंह हों या 82 साल में आईआईटी कानपुर से स्पाइनल कॉर्ड पर पीएचडी कर रहीं प्रो. सरोज चूड़ामणि। ये आज भी किसी युवा छात्र की तरह ही अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।

विज्ञापन


90 साल के अमलधारी चौथी बार कर रहे पीजी
90 साल की उम्र में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से एमए आचार्य कर रहे डॉ. अमलधारी सिंह को पहले सेमेस्टर में 90 फीसदी और दूसरे में 89 फीसदी अंक मिले हैं। अब तीसरा सेमेस्टर शुरू हो चुका है। वह चौथी बार पीजी कर रहे हैं। ऋग्वेद की दो गुमनाम शाखाओं शांखायन और आश्वलायन के मंत्रों को एक साथ कर किताब प्रकाशित करा चुके हैं। उन्होंने 21388 मंत्रों को सहेजा। डॉ. अमलधारी सिंह ने चार साल पहले बीएचयू के 102वें दीक्षांत समारोह में घुटनों के बल पर आकर मंच से डी-लिट की उपाधि ली थी। हाल ही में अयोध्या के गोविंद गिरी जी पर लिखी एक किताब का लोकार्पण बाबा रामदेव किया था। वेदों पर रिसर्च का काम जारी है। डॉ. अमलधारी सिंह के कॅरिअर की शुरुआत भारतीय सेना से हुई थी।

विज्ञापन

आईआईटी कानपुर में अपने से छोटे उम्र के प्रोफेसर के मार्गदर्शन में स्पाइनल कार्ड पर शोध कर रही हैं हैं डॉ.सरोज 
केजीएमयू लखनऊ की पहली महिला कुलपति और आईएमएस बीएचयू की जानी-मानी बाल सर्जन डॉ. सरोज चूड़ामणि 82 साल की उम्र में पढ़ाई जारी रखी है। पद्मश्री से सम्मानित डॉ. सरोज चूड़ामणि आईआईटी कानपुर से पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2024 में ही उन्होंने आईआईटी में शोध के लिए आवेदन किया था। यहां वह स्पाइनल कार्ड से जुड़े अपने 12 साल पुराने शोध को पूरा करेंगी। डॉ. सरोज ने बताया कि पढ़ने और पढ़ाना उम्र से परे की चीज है। शोध करने का जो सपना उन्होंने देखा था, उसको अब पूरा कर रही हैं। शोध शुरू हुए तीन साल बीत चुके हैं। बायोसाइंस एंड बायो इंजीनियरिंग विभाग में अपने से छोटे उम्र के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार के निर्देशन में पीएचडी पूरा करेंगी। खास बात यह है कि डॉ. सरोज के लिए संस्थान को अपने नियमों में बदलाव भी करने पड़े। 
विज्ञापन

भूलने की बीमारी को दूर कर रही पढ़ते रहने की आदत, एमए में 78% अंक, उर्दू-तमिल भी सीख रहे आरके मौर्य 
68 साल के आरके मौर्य नेबीएससी के बाद ही नौकरी जॉइन कर ली थी। एमएससी करने का मौका ही नहीं मिला। 2020 में जोनल सेल्स मैनेजर के पद से रिटायर होने के बाद काशी आ गए। इसके बाद काशी विद्यापीठ से एमए में दाखिला लिया। 2024 में इग्नू बीएचयू से एमए सोशियोलॉजी में दाखिला लिया। दूसरे साल की तैयारी की जा रही है। पहले वर्ष में मार्क्स 78 फीसदी आए थे। इसके अलावा मौलाना जी से उर्दू भी सीखी। अभी ऑनलाइन तमिल सीख रहे हैं। आगे पढ़ाई इसलिए जारी है क्योंकि तमिलनाडु के लोग हिंदी नहीं बोलते। मगर जब हम बात करेंगे तो वो भी मोटिवेट होंगे। आपसी विरोध कुछ कम होगा। उर्दू इसलिए पसंद है कि इसका एक्सेंट बहुत मीठा है। अब आगे पॉलिटिकल साइंस से एमए करने की तैयारी है। ये सब सिर्फ शौक के लिए कर रहा हूं। मेरा मानना है कि पढ़ने में रुचि रखते हैं मो मेमोरी मजबूत होती है। उम्र से कोई फर्क कम ही पड़ता है। रीडिंग हैबिट है तो फिर भूलने की दिक्कत नहीं होगी।
विज्ञापन

72 साल की उम्र में अवधेश नारायण सिंह ने शुरू की पढ़ाई 
अवधेश नारायण सिंह 72 साल की उम्र में फिर से पढ़ाई शुरू कर चुके हैं। सीनियर कंसल्टेंट के पद से 2013 में रिटायर हो गए थे। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट के बाद लगा कि ऐसे बहुत से काम हैं जिन्हें अपनी भाषा में लोगों तक आसानी से पहुंचाना जरूरी है। इस बीच इग्नू बीएचयू के निदेशक प्रो. उपेंद्र त्रिपाठी ने फायदे गिनाए और पत्रकारिता से एमए कर लिया। वर्तमान में एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट से पीजी डिप्लोमा कर रहे हैं। इससे पहले जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन से पीजी डिप्लोमा किया है। अब बीएचयू पत्रकारिता विभाग से पीएचडी करने की तैयारी है। उनका घर मीरानगर में है। उनकी पत्नी हिंदी विभाग की प्रोफेसर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed