Ravidas Jayanti: बेगमपुरा बसै मोर ठांव...के संदेश के साथ विदा हुई संगत, सीर में गूंजी गुरुवाणी; पंडाल खाली
Varanasi News: सीर गोवर्धन में चलने वाले तीन दिवसीय मेले का समापन हो गया। यहां टेंट खुलने लगे। रैदासी अपने घर के लिए वापसी करने लगे। यहां चलने वाला लंगर बंद हो जाएगा।
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Ravidas Jayanti: संत शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती पर सीर गोवर्धनपुर स्थित रविदास मंदिर क्षेत्र में तीन दिनों तक चला आस्था, संस्कृति और समरसता के महोत्सव का सोमवार को संपन्न हो गया। गुरु रविदास की वाणी और उनके सामाजिक समता के संदेश की गूंज दिन भर मेला क्षेत्र में गूंज रही थी। मन चंगा तो कठौती में गंगा... जैसे वचनों को आत्मसात कर अनुयायी लौटने लगे हैं।
पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित देश के कोने-कोने से लाखो रैदासी संत शिरोमणि गुरु रविदास के दर्शन को आए थे। सोमवार को भी मंदिर परिसर और सीर गोवर्धनपुर में मेले जैसा माहौल था। वहीं, मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालु मत्था टेक रहे थे।
जयंती समारोह के समापन के बाद मंदिर ट्रस्ट की ओर से चलाई गई विशेष ट्रेन से संत मंदीप दास, ट्रस्ट के ट्रस्टी, संतों और श्रद्धालुओं जालंधर (पंजाब) के लिए रवाना हो गए। इस दौरान संत रविदास की प्रतिमा के समक्ष नमन कर संतों ने अगली जयंती में पुनः काशी आने का संकल्प लिया।
दस दिनों तक चले भजन-कीर्तन के बाद खाली होने लगे पंडाल
रविदास जयंती समापन के बाद श्रद्धालुओं और संगत की घर वापसी का सिलसिला सुबह से देर शाम तक चलता रहा। पंडाल, तंबू और अस्थायी यात्री निवास धीरे-धीरे खाली होने लगे। अधिकांश संगत ट्रेन के अलावा बसों और निजी वाहनों से अपने गंतव्य को रवाना हो गए। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार दस दिनों तक चला बड़ा लंगर मंगलवार से बंद कर दिया जाएगा, हालांकि साफ-सफाई और व्यवस्थाओं को लेकर सेवाभाव जारी रहेगा।
मुक्तसर साहिब के 250 सेवादार 16 वर्षों से चला रहे लंगर
संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती पर सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास मंदिर परिसर में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं के लिए मेला क्षेत्र में कई स्थानों पर टेंट और पंडाल लगाकर लंगर की व्यवस्था की गई। इस सेवा कार्य में पंजाब के मुक्तसर साहिब से आए 250 महिला-पुरुष सेवादारों के विशेष दल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मालवा लंगर समिति के संत राम जी ने बताया कि वह पिछले 16 वर्षों से लगातार सीर गोवर्धनपुर में लंगर सेवा का दायित्व निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष संत रविदास जयंती से पहले ही उनका जत्था पंजाब से यहां पहुंच जाता है और मेले की अवधि तक संगत की सेवा में जुटा रहता है। लंगर में श्रद्धालुओं के लिए चाय, ब्रेड, खीर, लड्डू, बालूशाही सहित विभिन्न प्रकार के प्रसाद तैयार किए जाते हैं।
