Gyanvapi ASI Report: एएसआई को रिपोर्ट जमा करने के लिए मिला समय, अदालत ने दस दिनों की मोहलत दी
ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को 10 की मोहलत और मिल गई है। एएसआई ने 21 दिन का समय मांगा था। यह तीसरा मौका है, जब जिला जज की अदालत ने अतिरिक्त समय दिया है।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की तरफ से ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा था। जिस पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने एएसआई की टीम को दस दिनों की मोहलत दी है।
ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को 10 की मोहलत और मिल गई है। एएसआई ने 21 दिन का समय मांगा था। यह तीसरा मौका है, जब जिला जज की अदालत ने अतिरिक्त समय दिया है।जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने बृहस्पतिवार को आदेश देते हुए कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देना उचित लगता है। अदालत उम्मीद करती है कि निर्धारित समयसीमा पर रिपोर्ट दाखिल होगी। एएसआई आगे समय की मांग नहीं करेगा। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए 11 दिसंबर तिथि तय कर दी गई।
ज्ञानवापी परिसर में बीते 24 जुलाई से सर्वे शुरू हुआ था। दो नवंबर को एएसआई की टीम ने अदालत को बताया था कि सर्वे पूरा हो गया है। रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय और देना चाहिए। अदालत ने अनुरोध स्वीकार किया और 18 नवंबर तक का समय दिया था। इसके बाद एएसआई ने दोबारा समय बढ़ाने का अनुरोध किया था। अदालत ने 28 नवंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था, लेकिन इससे पहले ही एएसआई ने तीसरी बार समयसीमा बढ़ाने का आवेदन पत्र दाखिल कर दिया। इस पर गत बुधवार को सुनवाई हुई थी और अदालत ने आदेश की पत्रावली सुरक्षित रख ली थी। बृहस्पतिवार को अदालत ने एक बार फिर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत दी है।
मसाजिद कमेटी की आपत्ति खारिज
ज्ञानवापी की सर्वे रिपोर्ट पेश करने के लिए तीसरी बार समय मांगे जाने पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने कड़ी आपत्ति जताई। कमेटी की तरफ से कहा गया कि एएसआई बिना किसी ठोस कारण के बार-बार रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांग रहा है। इसलिए आवेदन खारिज किया जाए। बार-बार समय मांगने की इस प्रक्रिया का अंत होना चाहिए। तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, अदालत ने मसाजिद कमेटी की आपत्ति खारिज कर दी।