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Gyanvapi Case: सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिला अंतिम मौका, वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती, पढ़ें- खबरें

Thu, 20 Aug 2026 11:41 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 20 Aug 2026 11:41 AM IST
सार

Varanasi News: ज्ञानवापी मामले में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अंतिम मौका मिला। उधर वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती दी गई। वहीं एक मामले में मसाजिद कमेटी के रूख पर अदालत ने आपत्ति जताई। 

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Gyanvapi Case Sunni Central Waqf Board granted final opportunity appointment of next vad challenge in varanasi
Gyanvapi Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत ने बुधवार को ज्ञानवापी मामले में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अंतिम अवसर दिया। बोर्ड की तरफ से अधिवक्ता के उपस्थित नहीं हुए थे। अब मामले की सुनवाई 31 अगस्त को होगी। अदालत ने मूल पत्रावली भी तलब की है जो निचली अदालत के पास लंबित है। 

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यह निगरानी अर्जी इस मुकदमे में वादी पक्षकार रहे दिवंगत हरिहर पांडेय की तीन पुत्रियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेणु पांडेय ने दाखिल की है। इसमें ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने से संबंधित 1991 के मुकदमे में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को पद से हटाने का अनुरोध किया गया था। निगरानी अर्जी पर बुधवार को सुनवाई हुई है। 
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दरअसल, हरिहर पांडेय की मृत्यु के बाद उनकी तीनों पुत्रियों ने छह अप्रैल 2024 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत में दिवंगत पिता के स्थान पर मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर सुनवाई चल ही रही थी कि 31 मई 2025 को तीनों बहनों की ओर से मुकदमे में नियुक्त वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को पद से हटाने के लिए अलग प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। दोनों प्रार्थना पत्रों की एक साथ सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया गया था। 

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मसाजिद कमेटी के रूख पर आपत्ति, 14 अक्तूबर को होगी सुनवाई 
काशी विश्वनाथ मंदिर की जमीन की अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी से अदला-बदली किए जाने के मामले में बुधवार को दोपहर दो बजे जज खफीफा तुलिका बंधु की अदालत में सुनवाई हुई। मसाजिद कमेटी की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए जवाब दाखिल करने से इन्कार किया गया। इस पर वादी नित्यानंद राय ने कड़ी आपत्ति जताई। मामले में अगली सुनवाई 14 अक्तूबर को होगी।

वादी की तरफ से अदालत में दलील दी गई कि सर्वे रिपोर्ट अथवा प्रभावकारी अंतरिम या अंतिम आदेश पर रोक है, मुकदमे की पूरी कार्यवाही पर नहीं। उन्होंने विपक्षी पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की है।

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने भी जवाब दाखिल करने की अवधि समाप्त करने संबंधी पूर्व आदेश को वापस लेने की मांग की। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर नित्यानंद राय से लिखित आपत्ति दाखिल करने को कहा। वादी ने सात सितंबर 2024 को सरकार, मंदिर न्यास और अंजुमन इंतेजामिया को पक्षकार बनाते हुए दावा दाखिल किया था। उन्होंने प्लॉट संख्या 8276 को काशी विश्वनाथ मंदिर की संपत्ति बताते हुए 10 जुलाई 2021 के अदला-बदली दस्तावेज को शून्य घोषित करने की मांग की है। 

वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती, एक सितंबर को सुनवाई
ज्ञानवापी परिसर से जुड़े 1991 के मूल वाद में 2019 में हुई वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिका पर अपर जिला जज अष्टम अमित कुमार तिवारी की अदालत में सुनवाई हुई। अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।

1991 में भगवान आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के मालिकाना हक, राग-भोग, पूजा-अर्चना और मंदिर पुनर्निर्माण की मांग को लेकर वाद दाखिल किया गया था। इसमें स्व. सोमनाथ व्यास, स्व. रामरंग शर्मा और स्व. हरिहर पांडेय वादी थे। आवेदिका अनुष्का तिवारी ने 2019 में विजय शंकर रस्तोगी की वाद मित्र के रूप में हुई नियुक्ति को चुनौती देते हुए जिला जज की अदालत में रिवीजन दाखिल किया था। 

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मूल वाद के तत्कालीन एकमात्र जीवित वादी स्व. हरिहर पांडेय के अधिवक्ता के प्रति विश्वास का लाभ उठाकर वाद मित्र की नियुक्ति हासिल की गई। मामले में विजय शंकर रस्तोगी की ओर से प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दाखिल की गई। इसके जवाब में अनुष्का तिवारी की ओर से प्रति-आपत्ति दाखिल की गई। वहीं, अदालत ने अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को डिले कंडोनेशन प्रार्थना पत्र और लिखित आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया है। अनुष्का तिवारी ने मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भगवान के अधिकारों से जुड़ा बताते हुए शीघ्र निस्तारण की मांग की है।

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