{"_id":"6abcf29acbe82dd77509daaf","slug":"hearing-in-gyanvapi-case-order-likely-on-october-5-in-oldest-matter-in-varanasi-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"ज्ञानवापी केस में सुनवाई: सबसे पुराने मामले में पांच अक्तूबर को आ सकता है आदेश, वादमित्र ने दाखिल किए दस्तावेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ज्ञानवापी केस में सुनवाई: सबसे पुराने मामले में पांच अक्तूबर को आ सकता है आदेश, वादमित्र ने दाखिल किए दस्तावेज
Wed, 30 Sep 2026 05:00 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Wed, 30 Sep 2026 05:00 PM IST
सार
ज्ञानवापी के सबसे पुराने मामले में पांच अक्तूबर को आदेश आ सकता है। मुकदमे के वादी रहे दिवंगत हरिहर पांडेय की बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेणु पांडेय की ओर से अधिवक्ता ने विरोध दर्ज कराया।
विज्ञापन
Gyanvapi Case
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत में मंगलवार को ज्ञानवापी के सबसे पुराने मामले में सुनवाई हुई। नए मंदिर के निर्माण, हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने और वादमित्र को हटाने से संबंधित वर्ष 1991 के मुकदमे में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की तरफ से दस्तावेज दाखिल किए गए। साथ ही उन्हें पत्रावली पर लेने का अनुरोध किया गया। इसका वादियों के अधिवक्ता ने विरोध किया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थना पत्र पर आदेश के लिए पांच अक्तूबर की तिथि तय की है।
विज्ञापन
सबसे पुराने मुकदमे के वादी रहे दिवंगत हरिहर पांडेय की बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेणु पांडेय की ओर से अधिवक्ता ने विरोध दर्ज कराया। अधिवक्ता ने कहा कि दाखिल दस्तावेज फोटोस्टेट हैं। इनका कोई विधिक महत्व नहीं है। मुकदमे की सुनवाई के लिए मूल पत्रावली अदालत में उपलब्ध है।
विज्ञापन
तीनों बेटियों ने 6 अप्रैल 2024 को पिता के स्थान पर मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। 31 मई 2025 को वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को पद से हटाने की मांग करते हुए अलग से प्रार्थना पत्र दिया गया। सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) भावना भारतीय की अदालत ने 11 जुलाई 2025 को वादमित्र को हटाने संबंधी प्रार्थना पत्र को पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ तीनों बहनों ने अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है।
विज्ञापन