फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Jivitputrika 2026 Nirjala Vrat worship during Pradosh Kaal and breaking of fast at 7:28 AM on October 4th

जीवित्पुत्रिका: संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत, प्रदोषकाल में पूजा, चार अक्तूबर को सुबह 7:28 बजे पारण

Wed, 30 Sep 2026 01:09 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 30 Sep 2026 01:09 PM IST
सार

संतान की लंबी उम्र के लिए महिलाएं तीन अक्तूबर को जीवित्पुत्रिका का निर्जला रखेंगी। प्रदोषकाल में पूजा करेंगी। वहीं चार अक्तूबर की सुबह 07:28 बजे से पारण करेंगी। लक्ष्मीकुंड पर जिउतिया पूजन के लिए मेला लगेगा।

विज्ञापन
Jivitputrika 2026 Nirjala Vrat worship during Pradosh Kaal and breaking of fast at 7:28 AM on October 4th
Jitiya vrat 2026 - फोटो : AI

विस्तार

संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के लिए माताओं का तीन दिवसीय जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत दो अक्तूबर को नहाय खाय के साथ शुरू हो जाएगा। तीन अक्तूबर को वह निराजल व्रत रखेंगी। प्रदोष काल यानी शाम 06:05 बजे से मंदिरों, कुंडों व घाटों पर सविधि पूजन करेंगी। जीउतवाहन की कथा का श्रवण करेंगी। चार अक्तूबर को सुबह 07:28 बजे से पारण करेंगी। लक्ष्मीकुंड पर जिउतिया पूजन के लिए मेला लगेगा।

विज्ञापन


संतान की दीर्घायु का पर्व जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार अष्टमी तिथि तीन अक्तूबर को है। महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास रखकर प्रदोष काल में राजा जीमूतवाहन की पूजा करेंगी। अगले दिन अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद पारण होगा। 

विज्ञापन

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इस व्रत को खर जिउतिया भी कहते हैं। क्योंकि इसमें दिनभर निराजल व्रत रखा जाता है। इस बार अष्टमी तिथि तीन अक्तूबर को सुबह 9:53 से अगले दिन सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी और अगले दिन सुबह 5:50 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। इस तरह से नवमी तिथि का क्षय रहेगा।

तीन अक्तूबर को अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन है। अष्टमी तिथि तीन को लगने के साथ ही जिउतिया व्रत रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दिन महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को कुंडों, तालाबों, घाटों और मंदिरों पर विविध नैवेद्य के साथ जिउतिया माता का पूजन करेंगी। रात्रि जागरण कर कथा का श्रवण और मंगल गीत गाएंगी। 

विज्ञापन

आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि व्रत की शुरुआत दो अक्तूबर को नहाय-खाय से होगी। इस दिन महिलाएं स्नान, शुद्धि और सात्विक भोजन के साथ व्रत का संकल्प लेंगी। लोकमान्यता के अनुसार कुछ महिलाएं भोर में सरगी ग्रहण करती हैं। तीन अक्तूबर को निराजल व्रत रखेंगी। शाम को प्रदोष काल में पूजन अर्चन करेंगी। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि तीन अक्तूबर की सुबह शुरू होगी और चार अक्तूबर को सुबह 07:28 बजे से पारण होगा।
विज्ञापन

पितरों को खिलाएंगी पकवान
लोकमान्यताओं में जिउतिया व्रत से पहले सरगी या ओठगन की परंपरा निभाई जाती है। रात में विशेष पकवान और मिष्ठान तैयार किए जाते हैं। पकवानों में से पितरों, चील, सियार, गाय और कुत्ते के लिए भी अंश निकालने की परंपरा है। व्रत में सतपुतिया की सब्जी का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा में धूप, दीप, सरसों का तेल, खली, फल-फूल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। महिलाएं विधिवत पूजा के साथ जीमूतवाहन की कथा का श्रवण करती हैं। पारण के बाद पूजा में चढ़ाए गए सरसों के तेल को बच्चों के सिर पर आशीर्वाद स्वरूप लगाने की भी परंपरा है। कुश से राजा जीमूतवाहन की प्रतिमा तैयार कर पूजा स्थल पर स्थापित की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed