लॉकडाउन की मार, पहले रोजगार चौपट, फिर घर पहुंचने को पैदल ही तय कर रहे 154 किलोमीटर का सफर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए देश में लॉक डाउन प्रभावी है। ऐसे में देशभर में 21 दिनों के लॉक डाउन से सबसे ज्यादा दिक्कत बाहर कमाने गये लोगों को घर वापस लौटने में हो रही है। सवारी वाहन न मिलने से लोग को कोसों दूर पैदल चलने को विवश हैं। शुक्रवार को एक श्रमिक परिवार राबट्र्सगंज नगर से सटे इमरती कालोनी के समीप मिला, जो वाराणसी के राजघाट से लगभग 154 किलोमीटर पैदल चलकर दुद्धी जा रहा श्रमिक परिवार मिला।
दुद्धी तहसील क्षेत्र के गोरसिंग गांव के रहने वाले संजय घसिया, राजन, मुन्नालाल, दाऊ, सीताराम का कहना है कि वे 12 की संख्या में एक सप्ताह पहले वाराणसी के राजघाट मजदूरी करने गये थे। उनके साथ चार औरतें और दो बच्चे थे। सभी राजघाट के समीप एक निर्माणाधीन मकान में काम कर रहे थे।
24 मार्च की रात लॉकडाउन की घोषणा होने पर मालिक ने पैसे का भुगतान कर दिया। संजय घसिया ने बताया कि लॉकडाउन होने पर वे 25 मार्च की सुबह राजघाट से पैदल ही परिवार के साथ घर के लिए चल दिए। रास्ते में दुकान और होटल न खुलने की वजह से वह लोगों से खाने-पीने की सामान मांगकर खाते-पीते चले आ रहे हैं।
श्रमिक परिवार दो दिन में लगभग 90 किलोमीटर पैदल चलकर राजघाट से राबट्र्सगंज पहुंचा। बताया कि दुद्धी पहुंचने के लिए अभी उन्हे लगभग 80 किलोमीटर पैदल चलना होगा। राबट्र्सगंज ब्लॉक के उरमौरा में श्रमिक परिवार से मिलने पर सोशल वर्क के कुछ लोगों ने वाहन की व्यवस्था कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से बात की, लेकिन नतीजा सिफर निकला। दोपहर 12.30 बजे के बाद तक श्रमिक परिवार को घर पहुंचाने के लिए प्रशासन की तरफ से वाहन की व्यवस्था नहीं की जा सकी थी।

कमेंट
कमेंट X