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Varanasi News: पहली बार संगीत की झोली में दो पद्म सम्मान, प्रो. एन राजम को मिला पद्मविभूषण; जानें खास

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 26 Jan 2026 12:18 AM IST
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सार

Varanasi News: अमर उजाला से बातचीत में प्रो. मंगला कपूर, प्रो. एन राजम और प्रो. श्यामसुंदर ने इसे बाबा का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि इस तरह के सम्मान से नई जिम्मेदारी का अहसास होता है।

Varanasi News two Padma awards bestowed upon of music Professor Rajam receives Padma Vibhushan
गणतंत्र दिवस पर मिला सम्मान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा होते ही काशी में नया कीर्तिमान बन गया। ऐसा पहली बार हुआ है जब संगीत के क्षेत्र में यहां से दो पद्म सम्मान मिले। बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय में प्रोफेसर रहीं प्रो. एन. राजम को पद्मविभूषण मिला, तो महिला महाविद्यालय के संगीत विभाग में प्रोफेसर रहीं मंगला कपूर ने पद्मश्री पाकर काशी का मान बढ़ाया।

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चिकित्सा क्षेत्र से कालाजार उन्मूलन की दिशा में अहम भूमिका निभाने वाले आईएमएस बीएचयू के मेडिसिन विभाग के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर श्यामसुंदर अग्रवाल का नाम पद्मश्री सम्मान पाने वालों में शामिल है।
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हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर देशभर में पद्म सम्मान पाने वालों की सूची में काशी से शिक्षा, चिकित्सा, संगीत आदि क्षेत्रों के लोगों के नाम रहते हैं। पिछले छह वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब काशी से तीन लोगों को सम्मान मिला है। अमर उजाला से बातचीत में प्रो. मंगला कपूर, प्रो. एन राजम और प्रो. श्यामसुंदर ने इसे बाबा का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि इस तरह के सम्मान से नई जिम्मेदारी का अहसास होता है।

12 साल की थीं तो एसिड से जला दिया गया चेहरा, रिटायरमेंट के बाद भी जारी है संगीत साधना
बीएचयू महिला महाविद्यालय से यूजी, पीजी और पीएचडी करने के बाद प्रो. मंगला कपूर ने संगीत विभाग में 1989 में शिक्षक के रूप में सेवा शुरू की। यहां से 2019 में वह सेवानिवृत्त हो गईं। मुख्य रूप से ग्वालियर घराने की संगीत परंपरा से जुड़ी प्रो. मंगला की संगीत साधना आज भी जारी है।

अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्ष 1965 की बात है, जब वह 12 साल की थीं। उस समय सिंधिया घाट पर रहने के दौरान पारिवारिक कलह में नौकर से उनके चेहरे पर एसिड फिंकवाया गया। इससे उनका चेहरा झुलस गया। वह बहुत दिनों तक घर में ही रहीं। उस समय लगा कि अब आगे का जीवन कैसे चलेगा। माता-पिता ने किसी तरह संभाला, तब हिम्मत मिली।

कालाजार में पहले एक महीने तक इलाज, अब लगता है बस एक दिन
कालाजार जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन की दिशा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले आईएमएस बीएचयू के मेडिसिन विभाग के डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर श्यामसुंदर अग्रवाल पद्मश्री अवार्ड पाने के बाद काफी उत्साहित हैं। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी प्रो. श्यामसुंदर ने बताया कि उन्होंने बीएचयू से 1972 में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की।

इसके बाद 1978 में एमडी मेडिसिन करने के बाद 1981 में लेक्चरर (अब असिस्टेंट प्रोफेसर) के रूप में शिक्षक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद रीडर और प्रोफेसर रहते हुए सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2019 से डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर के रूप में सेवा जारी है। उन्होंने बताया कि कालाजार से ग्रसित मरीजों को मुंह से दी जाने वाली दवा कितनी कारगर होगी, इसका परीक्षण किया गया। छह साल तक परीक्षण के बाद सफलता मिली, जिससे मरीजों को इलाज में बड़ी सहूलियत हो रही है।

बीएचयू में 38 साल दी सेवा, 42 साल पहले मिल चुका है पद्मश्री
पद्मविभूषण पाने वाली प्रो. एन. राजम ने बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में 38 वर्षों तक सेवा दी। आज भी उनके शिष्य न केवल बीएचयू बल्कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में संगीत के छात्रों को शिक्षित कर रहे हैं। मूल रूप से केरल निवासी प्रो. एन. राजम ने बताया कि उन्होंने 1959 में बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में प्रवक्ता के रूप में सेवा शुरू की थी। 38 साल की सेवा के बाद 1997 में सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी संगीत साधना जारी रही।

पिछले छह साल में मिले पद्म सम्मान

  • 2026 – प्रो. एन. राजम (पद्मविभूषण), प्रो. मंगला कपूर, प्रो. श्यामसुंदर अग्रवाल (पद्मश्री)
  • 2025 – पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ (पद्मश्री)
  • 2024 – गोदावरी सिंह, संगीतज्ञ सुरेंद्र मोहन मिश्र (पद्मश्री)
  • 2023 – प्रो. ऋत्विक सान्याल, चिकित्सा से प्रो. मनोरंजन साहू (पद्मश्री)
  • 2022 – राधेश्याम खेमका (मरणोपरांत पद्मविभूषण), आचार्य वशिष्ठ त्रिपाठी (पद्मभूषण), प्रो. कमलाकर त्रिपाठी, बाबा शिवानंद, शिवनाथ मिश्र (पद्मश्री)
  • 2021 – पंडित रामयत्न शुक्ल (पद्मश्री), मरणोपरांत डोमराराज जगदीश चौधरी (पद्मश्री), किसान चंद्रशेखर सिंह (पद्मश्री)
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