यूपी: छात्र से यौन शोषण के प्रयास में शिक्षक को 10 साल की सजा, एक लाख रुपये का जुर्माना; 2902 दिन बाद फैसला
वाराणसी में एक छात्र से यौन शोषण के प्रयास के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने कोचिंग शिक्षक चंद्र भूषण सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे दस साल के कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की 70 प्रतिशत राशि पीड़ित को देने का आदेश दिया गया है। मामला वर्ष 2018 में दर्ज हुआ था।
विस्तार
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट आलोक कुमार की अदालत ने 13 वर्षीय छात्र के साथ यौन शोषण के प्रयास के मामले में कोचिंग शिक्षक चंद्र भूषण सिंह को दोषी करार दिया है। अदालत ने अभियुक्त को दस साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की 70 प्रतिशत राशि पीड़ित को देने का आदेश दिया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, चोलापुर निवासी वादी ने 15 अक्तूबर 2018 को थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि घटना वाले दिन दोपहर करीब तीन बजे वादी का 13 वर्षीय पुत्र कोचिंग पढ़ने गया था। वहां चंद्र भूषण सिंह उसे पढ़ाते थे। कोचिंग से घर लौटने के बाद बच्चे ने परिजनों को घटना की जानकारी दी।
अभियोजन के मुताबिक, बच्चे ने परिजनों को बताया कि कोचिंग के दौरान शिक्षक ने उसके साथ गलत काम करने का प्रयास किया। इसके बाद परिवार के लोगों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी और शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान पुलिस ने घटना से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को एकत्र किया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चंद्र भूषण सिंह के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले से संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने चंद्र भूषण सिंह को मामले में दोषी पाया।
अदालत ने दोषी शिक्षक को दस साल के कारावास की सजा सुनाई और एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। न्यायालय ने जुर्माने की राशि में से 70 प्रतिशत पीड़ित को देने का आदेश भी दिया है। अदालत के फैसले के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामला वर्ष 2018 में दर्ज हुआ था और करीब आठ वर्ष बाद अदालत ने इसमें फैसला सुनाया।