Corona Update In Varanasi: ममता की छांव में रहकर दो मासूम लड़ रहे कोरोना से जंग
घेर लेने को जब बलाएं आ गई, ढाल बनकर मां की दुआएं आ गई, मुनव्वर राणा के शायरी की इन पंक्तियों को पढ़ने के बाद मां की ममता का अहसास हो जाता है। एक मां ही है जो अपने बेटे को कभी तकलीफ में नहीं देखना चाहती है। हर दुख को सहते हुए बस बेटे को खुशी देना ही उसका सपना होता है, लेकिन जब मां और बेटा दोनों एक जगह अस्पताल में हो तो वह दृश्य कैसा होगा, इसकी कल्पना कोरोना की जंग लड़ रहे उन मासूमों को देखकर की जा सकती है।
ये मासूम ममता की छांव में रहकर कोरोना को मात देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं, कोरोना के दो बाल योद्धाओं की जो इस समय आइसोलेशन वार्ड में कोरोना की जंग लड़ रहे हैं। अभी तो घर में मां की आंचल में खेल रहे थे, उन्हें क्या पता था कि कोरोना उन्हें भी अपने चपेट में ले लेगा। जहां घर पर वो खिलौनों के साथ खेलते वहां अब आइसोलेशन वार्ड में दवाइयां, इंजेक्शन के सहारे कोरोना से जंग लड़ रहे हैं।
मामा से बच्ची और मां से संक्रमित हुआ बच्चा
मड़ौली निवासी दवा कारोबारी के संपर्क में आने की वजह से ही उसके घर में रहने वाली डेढ़ साल की भांजी की भी तबियत बिगड़ी और जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। दूसरी ओर आईएमएस बीएचयू लैब में कोरोना सैंपल की जांच करने वाली पोस्ट डॉक्टोरल छात्रा का एक साल के बेटे में भी कोरोना की पुष्टि मां के संपर्क में आने से हुई। अब दोनों बच्चे मां की ममता को हथियार बनाकर कोरोना से लड़ रहे हैं। मड़ौली निवासी कारोबारी की भांजी की बात करे तो उसके पिता खुद भी डाक्टर हैं और इन दिनों कोविड हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल में लगे हैं।
अस्पताल में भी घर जैसा माहौल
कोरोना संक्रमण की जद में आए इन बच्चों के सामने मजबूरी है कि वो घर की जगह अस्पताल में इस समय है लेकिन राहत की बात यह है कि यहां भी उन्हें घर जैसा माहौल मिल रहा है। परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे को सामने देख रहे हैं, हर दिन बातचीत के साथ ही सबका सुख-दुख भी बांट रहे हैं।
इसमें बाग बरियार कालोनी स्थित बीएचयू माइक्रोबायोलॉजी लैब में कोरोना सैंपल की जांच कर रही पोस्ट डॉक्टोरल छात्रा (पहले से कोरोना संक्रमित) का एक साल का बच्चा और छात्रा के पिता जहां बीएचयू अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती है, वहीं कोविड हॉस्पिटल ( दीनदयाल अस्पताल) में भर्ती डेढ़ साल की बच्ची भी अपनी मां, नाना, मामा और मामी के साथ एक ही वार्ड में भर्ती है।
बच्चों की सेहत पर रखनी होगी विशेष नजर
घर हो या बाहर बच्चों की सेहत को लेकर हर समय अलर्ट रहने की जरूरत है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में इनमें प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इसी वजह से समय से टीकाकरण भी कराया जाता है। कोरोना का संक्रमण चल रहा है, तब तो और सतर्क रहने की जरूरत है।-प्रो. एसपी शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ, बीएचयूबरतें ये सावधानी
- घर में बच्चों की सेहत पर विशेष नजर रखें
- किसी भी तरीके की परेशानी पर तुरंत डाक्टर के पास ले जाएं।
- नियमित तौर पर बच्चों को टीका भी लगवाते रहे।
- उनके खानपान पर भी नजर रखना चाहिए।
मां और बेटे का जो रिश्ता है, उसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती है। एक मां हमेशा अपने बेटे को अपने सामने खुश देखना चाहती है। जहां तक मासूमों के कोरोना से जंग लड़ने की बात है तो मां भी उनके साथ है। इसलिए उसका मनोबल भी बेटे को लेकर कम नहीं होगा। वह खुद भी बच्चे का देखभाल करने के साथ ही अस्पताल में भर्ती परिवार के अन्य सदस्यों को भी सामने देखती रहेगी तो तनावमुक्त रहेगी। मनोबल बढ़ने का जुड़ाव भी प्रतिरोधक क्षमता से होता है।
प्रो. संजय गुप्ता, मनोचिकित्सक, बीएचयू

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