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Almora News: आपदा की भेंट चढ़ीं नहरों का होगा कायाकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:27 AM IST
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अल्मोड़ा। जिले के लमगड़ा विकासखंड में आपदा की भेंट चढ़ी सैंज भाटकोेट और बसगांव नहरों के जल्द अस्तित्व में लौटने की उम्मीद है। इन नहरों का संरक्षण होने से किसान अपनी 32 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई कर सकेंगे।
सिंचाई विभाग योजना को धरातल पर उतार कर किसानों के बंजर खेतों तक पानी पहुंचाएगा। वहीं उन्हें सिंचाई के लिए बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लमगड़ा ब्लॉक में सिंचाई विभाग ने 1982 में सैंज भाटकोट और 1994 में बसगांव नहर का निर्माण किया। 2.80 किमी लंबी सैंज भटाकोट नहर से सैंज भाटकोट, उरेगी, सिमल्ट के 20 परिवार और तीन किमी बसगांव नहर से 40 से अधिक परिवार के खेतों तक पानी पहुंचता था लेकिन दोनों नहरों पर आपदा की मार पड़ने से वह क्षतिग्रस्त हो गई।
नहरों के क्षतिग्रस्त होने से 60 परिवार के लिए खेतों की सिंचाई करना चुनौती बन गया है। सिंचाई विभाग की पहल पर नाबार्ड योजना के तहत 51 लाख रुपये से दोनों नहरों की कुल 5.8 किमी लंबी नहरों का संरक्षण होगा। नहरों के अस्तित्व में आने पर इससे जुड़े गांवों में 32 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। जहां 16 हेक्टेयर भूमि में किसान रबी और 16 हेक्टेयर भूमि में खरीफ की फसल का उत्पादन कर सकेंगे। इससे किसानों को अपने खेतों को सींचने के लिए बारिश पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
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संवेदनशील स्थानों पर एचडीपीई पाइप से पहुंचेगा पानी
विभाग के मुताबिक नहर के रास्ते में संवेदनशील क्षेत्रों में एचडीपीई पाइप के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही नहर की हेड में वायर क्रेट, पैराफिट दीवार, प्लास्टर और नहर की भू-कटाव से सुरक्षा के लिए रिटेनिंग और ब्रेस्ट वाल का निर्माण किया जाएगा ताकि नहरों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
16 लाख से अधिक का लाभ होगा
दोनों नहरों के अस्तित्व में आने से किसानों के खेतों में फसलें लहराएंगी। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इससे किसानों को वार्षिक आय में 16 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इससे सिंचाई के अभाव में खेती से मुंह मोड़ रहे किसान फिर खेती की ओर लौटेंगे। वहीं खेती से अच्छी आमदनी होगी तो क्षेत्र में पलायन पर भी रोक लगेगी।
सैंज भाटकोट और बसगांव नहरों के जीर्णोद्धार के लिए शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके इसके लिए जल्द नहरों का संरक्षण किया जाएगा
-मोहन सिंह रावत, ईई, सिंचाई खंड, अल्मोड़ा
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सिंचाई विभाग योजना को धरातल पर उतार कर किसानों के बंजर खेतों तक पानी पहुंचाएगा। वहीं उन्हें सिंचाई के लिए बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लमगड़ा ब्लॉक में सिंचाई विभाग ने 1982 में सैंज भाटकोट और 1994 में बसगांव नहर का निर्माण किया। 2.80 किमी लंबी सैंज भटाकोट नहर से सैंज भाटकोट, उरेगी, सिमल्ट के 20 परिवार और तीन किमी बसगांव नहर से 40 से अधिक परिवार के खेतों तक पानी पहुंचता था लेकिन दोनों नहरों पर आपदा की मार पड़ने से वह क्षतिग्रस्त हो गई।
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नहरों के क्षतिग्रस्त होने से 60 परिवार के लिए खेतों की सिंचाई करना चुनौती बन गया है। सिंचाई विभाग की पहल पर नाबार्ड योजना के तहत 51 लाख रुपये से दोनों नहरों की कुल 5.8 किमी लंबी नहरों का संरक्षण होगा। नहरों के अस्तित्व में आने पर इससे जुड़े गांवों में 32 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। जहां 16 हेक्टेयर भूमि में किसान रबी और 16 हेक्टेयर भूमि में खरीफ की फसल का उत्पादन कर सकेंगे। इससे किसानों को अपने खेतों को सींचने के लिए बारिश पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
संवेदनशील स्थानों पर एचडीपीई पाइप से पहुंचेगा पानी
विभाग के मुताबिक नहर के रास्ते में संवेदनशील क्षेत्रों में एचडीपीई पाइप के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही नहर की हेड में वायर क्रेट, पैराफिट दीवार, प्लास्टर और नहर की भू-कटाव से सुरक्षा के लिए रिटेनिंग और ब्रेस्ट वाल का निर्माण किया जाएगा ताकि नहरों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
16 लाख से अधिक का लाभ होगा
दोनों नहरों के अस्तित्व में आने से किसानों के खेतों में फसलें लहराएंगी। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इससे किसानों को वार्षिक आय में 16 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इससे सिंचाई के अभाव में खेती से मुंह मोड़ रहे किसान फिर खेती की ओर लौटेंगे। वहीं खेती से अच्छी आमदनी होगी तो क्षेत्र में पलायन पर भी रोक लगेगी।
सैंज भाटकोट और बसगांव नहरों के जीर्णोद्धार के लिए शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके इसके लिए जल्द नहरों का संरक्षण किया जाएगा
-मोहन सिंह रावत, ईई, सिंचाई खंड, अल्मोड़ा