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Bageshwar News: 66 की उम्र में खेतों में पसीना बहा रहीं द्रौपदी
Sat, 08 Aug 2026 11:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:22 PM IST
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द्रौपदी देवी
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कपकोट (बागेश्वर)। बढ़ती उम्र को अधिकांश लोग आराम का समय मानते हैं। कपकोट ब्लॉक के दोबाड़ गांव की ग्राम प्रधान द्रौपदी देवी 66 वर्ष की उम्र में भी कर्मठता, सादगी और सेवा भाव की मिसाल बनी हुई हैं। वह आज भी खेती-बाड़ी, पशुपालन और बागवानी के साथ ग्राम पंचायत की जिम्मेदारियां पूरे उत्साह और समर्पण से निभा रही हैं।
कक्षा 10 तक शिक्षित द्रौपदी देवी के दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। सभी का विवाह हो चुका है। बड़ा पुत्र निजी क्षेत्र में कार्यरत है, जबकि छोटा पुत्र ठेकेदारी करता है। बड़ी बहू पुलिस विभाग में और छोटी बहू नर्स के पद पर सेवाएं दे रही हैं। परिवार के आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद द्रौपदी देवी ने शहर की चकाचौंध के बजाय पुश्तैनी गांव में रहकर ग्रामीण जीवन की जिम्मेदारियों को निभाना चुना।
उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी होने के बाद चुनाव लड़ा और ग्राम प्रधान बनीं। उनकी दिनचर्या सुबह पशुओं के लिए चारा जुटाने और खेत-खलिहानों में काम करने से शुरू होती है। वह गांव में मौसमी फसलों और सब्जियों की खेती करने के साथ करीब 130 कीवी के पौधों की भी देखभाल करती हैं। उनका मानना है कि गांव की जमीन बंजर नहीं होनी चाहिए।
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द्रौपदी ने बताया कि खेती-बाड़ी और पशुपालन से ही लोगों के बीच मेरी पहचान बनी थी इसलिए आज भी वही काम करती हूं। ग्रामीणों के अटूट विश्वास के बल पर प्रधान निर्वाचित हुई हूं। प्रधान बनने के बाद मैंने अपने पुराने काम नहीं छोड़े।
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कक्षा 10 तक शिक्षित द्रौपदी देवी के दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। सभी का विवाह हो चुका है। बड़ा पुत्र निजी क्षेत्र में कार्यरत है, जबकि छोटा पुत्र ठेकेदारी करता है। बड़ी बहू पुलिस विभाग में और छोटी बहू नर्स के पद पर सेवाएं दे रही हैं। परिवार के आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद द्रौपदी देवी ने शहर की चकाचौंध के बजाय पुश्तैनी गांव में रहकर ग्रामीण जीवन की जिम्मेदारियों को निभाना चुना।
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उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी होने के बाद चुनाव लड़ा और ग्राम प्रधान बनीं। उनकी दिनचर्या सुबह पशुओं के लिए चारा जुटाने और खेत-खलिहानों में काम करने से शुरू होती है। वह गांव में मौसमी फसलों और सब्जियों की खेती करने के साथ करीब 130 कीवी के पौधों की भी देखभाल करती हैं। उनका मानना है कि गांव की जमीन बंजर नहीं होनी चाहिए।
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द्रौपदी ने बताया कि खेती-बाड़ी और पशुपालन से ही लोगों के बीच मेरी पहचान बनी थी इसलिए आज भी वही काम करती हूं। ग्रामीणों के अटूट विश्वास के बल पर प्रधान निर्वाचित हुई हूं। प्रधान बनने के बाद मैंने अपने पुराने काम नहीं छोड़े।