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Bageshwar News: फल्यांटी से गिरेछीना के बीच चहका दुर्लभ चीर फीसेंट
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 12 May 2026 11:23 PM IST
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बागेश्वर। जिले के फल्यांटी से गिरेछीना के बीच जंगलों से वन्यजीव प्रेमियों के लिए सुखद खबर सामने आई है। हिमालयी ऊंचाइयों में पाए जाने वाले दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षी चीर फीसेंट की मौजूदगी फल्यांटी से गिरेछीना के बीच जंगलों में दर्ज की गई है। इस दुर्लभ पक्षी के दिखाई देने से यह साफ हो गया है कि जिले के मध्य हिमालयी जंगल इन विलुप्तप्राय प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित बसेरा बन रहे हैं।
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार चीर फीसेंट आमतौर पर मानवीय हस्तक्षेप से दूर शांत ढलानों और घास के मैदानों में रहना पसंद करता है। फल्यांटी से गिरेछीना तक के जंगलों में जिस तरह का शांत वातावरण और पारिस्थितिक तंत्र है, वह इस पक्षी के प्रजनन और वास के लिए पूरी तरह अनुकूल है। पहली बार इस क्षेत्र में इसकी पुष्टि होने से अब बर्ड वॉचर्स की नजरें क्षेत्र की ओर भी टिक गई हैं।
स्थानीय लोगों और प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि यदि फल्यांटी और आसपास के जंगलों को पक्षी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उभर सकता है। चीर फीसेंट जैसे दुर्लभ पक्षी को देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं जिससे स्थानीय युवाओं को गाइड और होमस्टे के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
तीन-चार दिन चला सर्च ऑपरेशन
फल्यांटी क्षेत्र में दुर्लभ चीर फीसेंट का मिलना विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत और धैर्य का परिणाम है। इस अत्यंत शर्मीले और संकटग्रस्त पक्षी की मौजूदगी दर्ज करने के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों को गिरेछीना रोड से सटे जंगलों में कई दिनों तक खाक छाननी पड़ी। पक्षी विशेषज्ञ/वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हिमांशु तिरुवा ने बताया कि वह बीते दिनों किसी शादी समारोह में शिरकत करने जिले में पहुंचे थे।
फल्यांटी के आसपास के भौगोलिक वातावरण को देखते हुए वहां चीर फीसेंट के होने की प्रबल संभावना थी। इस संभावना को पुख्ता करने के लिए उन्होंने गिरेछीना रोड और फल्यांटी के आसपास के दुर्गम जंगलों में लगातार तीन-चार दिनों तक गहन खोजबीन की। घंटों की निगरानी और धैर्य के बाद आखिरकार वह इस दुर्लभ पक्षी के दो जोड़ों को अपने कैमरे में कैद करने में सफल रहे।
......
फल्यांटी के जंगलों में चीर फीसेंट का दिखना इस बात की पुष्टि करता है कि जिले के जंगलों का पारिस्थितिक तंत्र सुरक्षित और समृद्ध है। यह पक्षी बहुत कम स्थानों पर पाया जाता है। इसका संरक्षण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। गिरेछीना रोड में इसकी मौजूदगी जिले के वाइल्डलाइफ डेटा के लिए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है।
-हिमांशु तिरुवा, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर व पक्षी विशेषज्ञ, कार्बेट नेशनल पार्क रामनगर
.........
जिले के ऊंचाई वाले कौसानी क्षेत्र के घने जंगलों में चीर फीसेंट की दस्तक पहले भी दर्ज हुई है। गिरेछीना की तरफ दुर्लभ पक्षी की दस्तक सुखद पहलू है। विभाग की ओर से दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए वनों को संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों से भी अपील है कि जंगलों को आग से बचाकर इन प्रजातियों के संरक्षण में सहयोग करें।
-आदित्य रत्न, डीएफओ बागेश्वर
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पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार चीर फीसेंट आमतौर पर मानवीय हस्तक्षेप से दूर शांत ढलानों और घास के मैदानों में रहना पसंद करता है। फल्यांटी से गिरेछीना तक के जंगलों में जिस तरह का शांत वातावरण और पारिस्थितिक तंत्र है, वह इस पक्षी के प्रजनन और वास के लिए पूरी तरह अनुकूल है। पहली बार इस क्षेत्र में इसकी पुष्टि होने से अब बर्ड वॉचर्स की नजरें क्षेत्र की ओर भी टिक गई हैं।
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स्थानीय लोगों और प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि यदि फल्यांटी और आसपास के जंगलों को पक्षी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उभर सकता है। चीर फीसेंट जैसे दुर्लभ पक्षी को देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं जिससे स्थानीय युवाओं को गाइड और होमस्टे के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
तीन-चार दिन चला सर्च ऑपरेशन
फल्यांटी क्षेत्र में दुर्लभ चीर फीसेंट का मिलना विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत और धैर्य का परिणाम है। इस अत्यंत शर्मीले और संकटग्रस्त पक्षी की मौजूदगी दर्ज करने के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों को गिरेछीना रोड से सटे जंगलों में कई दिनों तक खाक छाननी पड़ी। पक्षी विशेषज्ञ/वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हिमांशु तिरुवा ने बताया कि वह बीते दिनों किसी शादी समारोह में शिरकत करने जिले में पहुंचे थे।
फल्यांटी के आसपास के भौगोलिक वातावरण को देखते हुए वहां चीर फीसेंट के होने की प्रबल संभावना थी। इस संभावना को पुख्ता करने के लिए उन्होंने गिरेछीना रोड और फल्यांटी के आसपास के दुर्गम जंगलों में लगातार तीन-चार दिनों तक गहन खोजबीन की। घंटों की निगरानी और धैर्य के बाद आखिरकार वह इस दुर्लभ पक्षी के दो जोड़ों को अपने कैमरे में कैद करने में सफल रहे।
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फल्यांटी के जंगलों में चीर फीसेंट का दिखना इस बात की पुष्टि करता है कि जिले के जंगलों का पारिस्थितिक तंत्र सुरक्षित और समृद्ध है। यह पक्षी बहुत कम स्थानों पर पाया जाता है। इसका संरक्षण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। गिरेछीना रोड में इसकी मौजूदगी जिले के वाइल्डलाइफ डेटा के लिए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है।
-हिमांशु तिरुवा, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर व पक्षी विशेषज्ञ, कार्बेट नेशनल पार्क रामनगर
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जिले के ऊंचाई वाले कौसानी क्षेत्र के घने जंगलों में चीर फीसेंट की दस्तक पहले भी दर्ज हुई है। गिरेछीना की तरफ दुर्लभ पक्षी की दस्तक सुखद पहलू है। विभाग की ओर से दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए वनों को संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों से भी अपील है कि जंगलों को आग से बचाकर इन प्रजातियों के संरक्षण में सहयोग करें।
-आदित्य रत्न, डीएफओ बागेश्वर