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रसायनों का अनियंत्रित प्रयोग भूमि की उर्वरता के लिए घातक : वैज्ञानिक
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 12 May 2026 11:33 PM IST
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अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र हवालबाग में संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के तहत किसान गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती के महत्व की जानकारी दी।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. आरपी मीणा ने कहा कि उर्वरकों का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने किसानों को चेताया कि रसायनों का अनियंत्रित और अत्यधिक प्रयोग पर्यावरण के साथ-साथ भूमि की उर्वरता के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर विशेष जोर दिया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश चंद घासल ने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी। साथ ही मिट्टी के नमूने एकत्र करने की वैज्ञानिक विधियों के बारे में विस्तार से बताया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पीके मिश्रा ने किसानों से जैविक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मृदा उर्वरता बढ़ाने में जैव उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं इफको के प्रतिनिधि नीरज कुमार ने किसानों को बाजार में उपलब्ध नवीन उर्वरक उत्पादों और उनके प्रभावी उपयोग के तरीकों की जानकारी दी।
संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. केके मिश्रा ने टिकाऊ और लाभकारी कृषि के लिए मृदा स्वास्थ्य को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती में आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की ताकि कृषि उत्पादकता को स्थिर रखा जा सके। कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. कुशाग्रा जोशी, डॉ. अशोक कुमार, ग्राम प्रधान पूरन सिंह नेगी सहित कई किसान मौजूद रहे।
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संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. आरपी मीणा ने कहा कि उर्वरकों का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने किसानों को चेताया कि रसायनों का अनियंत्रित और अत्यधिक प्रयोग पर्यावरण के साथ-साथ भूमि की उर्वरता के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर विशेष जोर दिया।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश चंद घासल ने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी। साथ ही मिट्टी के नमूने एकत्र करने की वैज्ञानिक विधियों के बारे में विस्तार से बताया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पीके मिश्रा ने किसानों से जैविक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मृदा उर्वरता बढ़ाने में जैव उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं इफको के प्रतिनिधि नीरज कुमार ने किसानों को बाजार में उपलब्ध नवीन उर्वरक उत्पादों और उनके प्रभावी उपयोग के तरीकों की जानकारी दी।
संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. केके मिश्रा ने टिकाऊ और लाभकारी कृषि के लिए मृदा स्वास्थ्य को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती में आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की ताकि कृषि उत्पादकता को स्थिर रखा जा सके। कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. कुशाग्रा जोशी, डॉ. अशोक कुमार, ग्राम प्रधान पूरन सिंह नेगी सहित कई किसान मौजूद रहे।