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Kotdwar News: चैत्र मास में भिटौली के लिए बढ़ी अरसों की डिमांड
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Fri, 03 Apr 2026 06:56 PM IST
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अशोक केष्टवाल (खास खबर)
कोटद्वार। नगर में चैत्र मास में भिटौली (कलेवा) के लिए अरसों की डिमांड भी बढ़ने लगी है। अरसा बनाने के काम में जुटीं क्षेत्र की महिलाओं की ओर से बनाए जा रहे अरसे 170 से 180 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं।
उत्तराखंड में शादी समारोह हो या अन्य कोई भी शुभ अवसर, बहिन, बेटियों व नाते-रिश्तेदारों को मिष्ठान के रूप में अरसा देने की परंपरा रही हैं। शादी समारोह में तो 40 से 60 पाथ (ढाई किलो) गुड के अरसे तक बनते हैं। पर्वतीय क्षेत्र के बाद अब कोटद्वार में भी कुछ सालों से अरसों की डिमांड होने लगी है। इसी को देखते हुए मिष्ठान भंडारों में भी अरसे बनने शुरू हो गए हैं। स्वयं सहायता समूहों की ओर से भी अरसे बनाए जा रहे हैं। कोटद्वार भाबर में अरसे बनाने के जानकार महिलाओं व पुरुषों ने भी अरसे की दुकानें खोली हैं।
चैत्र मास में भिटौली में भी अरसा देने की परंपरा रही है। इससे चैत्र मास में अरसे की डिमांड भी बढ़ने लगी है। लोगों की ओर से अपने विवाहित बहिनों व बेटियों को भिटौली देने के लिए अरसों की डिमांड दी जा रही है। जिससे अरसे के कारोबार से जुड़े पुरूष व महिलाएं इन दिनों डिमांड को पूरा करने में जुटे हुए हैं।
क्या है भिटौली
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में चैत्र महीने में विवाहित बहनों व बेटियों को भिटौली देने की विशिष्ट परंपरा आज भी जीवित है। चैत्र माह को भिटौली का महीना भी कहते हैं। चैत्र मास यानि भिटौली के महीने की शुरुआत पहाड़ में मीन संक्रांति (14-15 मार्च) से शुरू हो जाती है। इसके तहत ससुराल में रह रहीं बहन व बेटियों से मिलने, उन्हें नए वस्त्र व विविध उपहार देने और मां के हाथों से तैयार पकवान देने का काफी पुराना रिवाज है।
चैत्र मास में भिटौली के लिए अरसे की डिमांड काफी बढ़ गई है। अभी तक दो क्विंटल अरसे की डिमांड मिल चुकी है। लगातार अरसे तैयार कर डिमांड को पूरा किया जा रहा है। अरसे 170 से 180 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं। - अनीता उपाध्याय, अरसा व्यवसायी
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उत्तराखंड में शादी समारोह हो या अन्य कोई भी शुभ अवसर, बहिन, बेटियों व नाते-रिश्तेदारों को मिष्ठान के रूप में अरसा देने की परंपरा रही हैं। शादी समारोह में तो 40 से 60 पाथ (ढाई किलो) गुड के अरसे तक बनते हैं। पर्वतीय क्षेत्र के बाद अब कोटद्वार में भी कुछ सालों से अरसों की डिमांड होने लगी है। इसी को देखते हुए मिष्ठान भंडारों में भी अरसे बनने शुरू हो गए हैं। स्वयं सहायता समूहों की ओर से भी अरसे बनाए जा रहे हैं। कोटद्वार भाबर में अरसे बनाने के जानकार महिलाओं व पुरुषों ने भी अरसे की दुकानें खोली हैं।
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चैत्र मास में भिटौली में भी अरसा देने की परंपरा रही है। इससे चैत्र मास में अरसे की डिमांड भी बढ़ने लगी है। लोगों की ओर से अपने विवाहित बहिनों व बेटियों को भिटौली देने के लिए अरसों की डिमांड दी जा रही है। जिससे अरसे के कारोबार से जुड़े पुरूष व महिलाएं इन दिनों डिमांड को पूरा करने में जुटे हुए हैं।
क्या है भिटौली
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में चैत्र महीने में विवाहित बहनों व बेटियों को भिटौली देने की विशिष्ट परंपरा आज भी जीवित है। चैत्र माह को भिटौली का महीना भी कहते हैं। चैत्र मास यानि भिटौली के महीने की शुरुआत पहाड़ में मीन संक्रांति (14-15 मार्च) से शुरू हो जाती है। इसके तहत ससुराल में रह रहीं बहन व बेटियों से मिलने, उन्हें नए वस्त्र व विविध उपहार देने और मां के हाथों से तैयार पकवान देने का काफी पुराना रिवाज है।
चैत्र मास में भिटौली के लिए अरसे की डिमांड काफी बढ़ गई है। अभी तक दो क्विंटल अरसे की डिमांड मिल चुकी है। लगातार अरसे तैयार कर डिमांड को पूरा किया जा रहा है। अरसे 170 से 180 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं। - अनीता उपाध्याय, अरसा व्यवसायी
